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कितने ही बड़े आदमी हो जाएं लेकिन पहले विनम्र इंसान बनें : बोमन ईरानी

Sat, 24 Feb 2018 10:22 AM IST
मायादर्पण डेस्क, अमर उजाला
मायादर्पण डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 24 Feb 2018 10:22 AM IST
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Interview of actor Boman Irani- opened the secret and some tips for moving forward in the life
- फोटो : अमर उजाला

बोमन ईरानी पर्दे पर दर्शकों का मनोरंजन करते हैं, लेकिन उनकी पहचान प्रेरणादायी भाषण देने वाले वक्ता की भी है। जब वह फिल्में नहीं करते, तो लोगों को मुश्किलों से जूझने और उबरने की सीख देते हैं। बीते तीन साल में वह सिनेमा में कम दिखे। क्या थी वजह? अमर उजाला से विशेष बातचीत में बोमन ईरानी ने खोला राज और दिए जिंदगी में आगे बढ़ने के कुछ टिप्स...

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जॉली एलएलबी, दिलवाले और पीके के बाद बीते तीन साल में आप फिल्मों में बहुत कम दिखे। 2017 में आपकी कोई फिल्म ही नहीं आई। क्या वजह रही?
कुछ प्लान नहीं था, लेकिन इससे पहले बहुत भागमभाग हो गई थी। साल में छह फिल्मों का एवरेज था। क्या होता है इसमें कि किसी कारण के बगैर ही आप थोड़ा स्लो हो जाते हैं। परिवार के साथ वक्त बिताने की जरूरत महसूस होने लगती है। फिर यह भी हुआ कि 2016 में मैं दादा बन गया! मुझे लगा कि इसे भी एंजॉय करना चाहिए। वैसे मैं जब घर पर था, तब भी बहुत काम कर रहा था। इस बीच मैंने दो-तीन रीजनल फिल्में (तेलुगु-मराठी) कीं। इन सबमें मजा आया।
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-इस ब्रेक में कोई अलग और खास काम किया?
ज्यादा तो बता नहीं सकता, लेकिन हां, इस टाइम ऑफ में मैंने एक फिल्म की स्क्रिप्ट लिखनी शुरू की। इसे मैं ही डायरेक्ट करूंगा। शूटिंग के दौरान हमें, जो ब्रेक मिलते हैं, उसमें लिखा नहीं जा सकता, तो मैंने वक्त निकाला।
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-अपनी बातों से आप लोगों को मोटिवेट (प्रेरित) करते हैं। आपके जीवन में भी बहुत संघर्ष रहा।
मैं अपने जीवन के अनुभव लोगों से बांटता हूं। मुझे लगता है कि संघर्ष बुरी चीज नहीं है। स्ट्रगल नहीं हो, तो हम किसी चीज पर मेहनत नहीं करते। जो हमें मिलता है, उसकी कद्र नहीं करते। मैं सोचता हूं कि जीवन में स्ट्रगल न भी हो, तो हमें ढूंढना चाहिए कि जिससे लगे हमने कुछ पाने के लिए मेहनत की।

Interview of actor Boman Irani- opened the secret and some tips for moving forward in the life

-मोटिवेशनल टॉक्स में आपसे सवाल-जवाब होते हैं, तो क्या पाते हैं? आज लोगों की समस्याएं क्या हैं? आप उन्हें किस तरह समझाते हैं?
इंसान तो इंसान है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर हो या किसी ऑफिस में काम करने वाला। उसके दिमाग में चलने वाली समस्याएं एक हैं। हम भले ही समाज में, परिवार में रहें, लेकिन हम अपने आप में भी रहते हैं। लोगों के अरमान होते हैं, नाकामियां मिलती हैं। सवाल यह है कि आप जिंदगी से क्या चाहते हैं? क्या आप अरमानों को पूरा कर सकते हैं? अगर वे पूरे नहीं हुए तो खुश कैसे रह सकते हैं, क्योंकि जैसे ही आपके भीतर अरमान पैदा होते हैं, वैसे ही मुश्किलें भी नजर आने लगती हैं। यह मुश्किलें जीवन का संघर्ष हैं। मैं वहां फिल्म ऐक्टर की तरह बात नहीं करता, बल्कि आम आदमी की तरह होता हूं।

-जीवन में इस मुकाम तक पहुंचने में आपके सामने, जो मुश्किलें आईं, उन्हें क्या सोचते हुए पार किया?
एक ही रास्ता है कि संघर्षों को पार करें। अगर फेल हो जाएं, तो यह न सोचें कि सब खो गया। जब तक जिंदा हैं, तो फेल होने का सिर्फ यही मतलब है कि एक और बाधा आई है और सफल होने में थोड़ा ज्यादा वक्त लगेगा। 44 की उम्र में मेरी पहली फिल्म रिलीज हुई, तो मैं भी सोच सकता था कि अब क्या होगा? तब मैं फेल हो जाता। अब मुझे फिल्म बनानी है, 58 का हो गया हूं, दादा बन गया हूं, क्या यह सपना छोड़ दूं?

-आप खुद प्रेरित होने के लिए किन हस्तियों की किताबें पढ़ते/भाषण सुनते हैं?
बहुत सारे लोग हैं। अब्राहम लिंकन से लेकर महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग को लीजिए। फील्ड मार्शल सैम मानेक शॉ या जेआरडी टाटा की बातें सुनता हूं, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जितने बड़े लोग थे, उतने ही साधारण थे। फिल्मों में एंथनी हॉपकिंस और रॉबर्ट डी नीरो से लेकर हमारे अपने बलराज साहनी जी की बातें पढ़-सुन लीजिए। इनकी जिंदगियां देखिए। हमारे संघर्ष क्या हैं, इन लोगों के आगे?

Interview of actor Boman Irani- opened the secret and some tips for moving forward in the life
बोमन ईरानी - फोटो : ANI
-हिंदी फिल्मों में छाप लगती है। बढ़िया ऐक्टर होने पर भी आपको कॉमेडी से जोड़कर देखा जाता है। इसे कैसे लेते हैं?
मैंने विभिन्न फिल्मों में अलग-अलग कैरेक्टर किए हैं। चाहे वह 'जॉली एलएलबी' हो, 'हाउसफुल' हो या 'डॉन'। विलेन भी बना हूं। सबसे ज्यादा, तो सीरियस कैरेक्टर किए हैं। मैं सोचता हूं कि फिल्मोग्राफी की वजह से नहीं, बल्कि मेरी तीन-चार बड़ी फिल्मों (मुन्नाभाई सीरीज, पीके) के कैरेक्टर्स में कॉमिक टच की वजह से यह बात हुई है। अच्छा यह है कि मेरे निभाए किरदारों का एक-दूसरे से कोई संबंध नहीं रहा। लोगों के जेहन में अगर मेरे कॉमेडी रोल बसे हैं, तो मुझे इसमें प्रॉब्लम नहीं है। मेरे दिमाग में क्लियर है कि मैं एक्टर हूं।

आने वाला कल-
-'वेलकम टू न्यूयॉर्क' के बाद बोमन जॉन अब्राहम की 'परमाणु', कैलाश सत्यार्थी के जीवन से प्रेरित 'झलकी' और 'टोटल धमाल' में नजर आएंगे।
-बोमन को फोटोग्राफी के साथ लेखन का शौक है। वह लोगों की मदद करने वाली प्रेरक पुस्तकें लिखना चाहते हैं।
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