कान फिल्म फेस्टिवल में भारत का जलवा, रेड कार्पेट से अवॉर्ड तक का शानदार सफर; जानें भारतीय फिल्मों का इतिहास
Cannes Film Festival: दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में गिने जाने वाले कान फिल्म फेस्टिवल में भारतीय सिनेमा का सफर बेहद खास रहा है। आइए जानते हैं फेस्टिवल में भारतीय फिल्मों के इतिहास के बारे में।
विस्तार
दशकों से भारतीय फिल्मों, कलाकारों और फिल्ममेकर्स ने कान फिल्म फेस्टिवल में अपनी अलग पहचान बनाई है। कभी फिल्मों ने यहां तालियां बटोरीं, तो कभी भारतीय सितारों का रेड कार्पेट लुक चर्चा में रहा। आइए जानते हैं भारतीय सिनेमा के सफर के बारे में।
‘नीचा नगर’ बनी पहली भारतीय फिल्म
भारत ने पहली बार साल 1946 में कान फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लिया था। ‘नीचा नगर’ पहली भारतीय फिल्म थी, जिसने कान में बड़ी सफलता हासिल की। फिल्म को उस समय फेस्टिवल का सबसे बड़ा सम्मान पाम डी ओर (तब ग्रैंड प्रिक्स) मिला था। यह भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल था।
सत्यजित रे ने बढ़ाया भारत का मान
इसके बाद धीरे-धीरे भारतीय फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी मजबूत करनी शुरू की। सत्यजित रे की फिल्मों ने कान में भारत का नाम रोशन किया। उनकी कई फिल्मों को वहां सराहा गया और दुनियाभर के दर्शकों ने भारतीय कहानी कहने के अंदाज को पसंद किया।
‘सलाम बॉम्बे!’ ने बटोरी तारीफें
साल 1988 में ‘सलाम बॉम्बे!’ ने कान में खूब तारीफें बटोरीं और कैमरा डी'ऑर अवॉर्ड जीता। इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को नई पहचान दिलाई। वहीं ‘मीरा नायर’ भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो गईं।
भारतीय सितारों ने खींचा सबका ध्यान
कान फिल्म फेस्टिवल में सिर्फ फिल्में ही नहीं, भारतीय सितारों का फैशन और ग्लैमर भी हमेशा चर्चा में रहता है। ऐश्वर्या राय बच्चन, दीपिका पादुकोण, सोनम कपूर और प्रियंका चोपड़ा जैसे सितारों ने रेड कार्पेट पर अपने शानदार अंदाज से दुनियाभर का ध्यान खींचा।
जब भारत को ‘कंट्री ऑफ ऑनर’ चुना गया
साल 2022 भारत के लिए और भी खास रहा, जब भारत को कान फिल्म फेस्टिवल में ‘कंट्री ऑफ ऑनर’ चुना गया। उसी साल दीपिका पादुकोण को जूरी सदस्य बनने का मौका मिला, जो भारतीय सिनेमा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई।
‘ऑल वी इमेजिन एज लाइट’ जैसी फिल्मों का शानदार प्रदर्शन
हाल के वर्षों में ‘ऑल वी इमेजिन एज लाइट’ जैसी फिल्मों ने भी कान में शानदार प्रदर्शन किया और साबित किया कि भारतीय सिनेमा अब सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी कहानियां दुनियाभर के दर्शकों को प्रभावित कर रही हैं।
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आज कान फिल्म फेस्टिवल भारतीय सिनेमा के लिए सिर्फ एक मंच नहीं, बल्कि दुनिया के सामने अपनी कला, संस्कृति और कहानियों को दिखाने का सबसे बड़ा अवसर बन चुका है।