Chhaava Piracy Case: ‘छावा’ की पायरेसी मामले में मुंबई पुलिस को मिली बड़ी सफलता, पुणे से एक गिरफ्तार
Chhaava Online Leak Case: हिंदी फिल्म ‘छावा’ की पायरेसी के मामले में मुंबई की साउथ साइबर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में पुलिस ने एक शख्स को पुणे से गिरफ्तार किया गया है।
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मुंबई के साउथ साइबर पुलिस स्टेशन को फिल्म ‘छावा’ की पायरेसी के खिलाफ चल रही जांच में बड़ी कामयाबी मिली है। इस मामले में एक 26 साल के शख्स को पुणे से गिरफ्तार किया गया है। हाल ही में रिलीज हुई इस फिल्म को कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर गैरकानूनी तरीके से फैलाया गया था, जिससे निर्माताओं को भारी नुकसान हुआ था। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं...
विक्की कौशल स्टारर ‘छावा’ 14 फरवरी 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन जल्द ही यह पायरेसी की चपेट में आ गई। इसके बाद अगस्त्य एंटरटेनमेंट कंपनी के सीईओ रजत राहुल हक्सर ने साइबर पुलिस में इसको लेकर शिकायत दर्ज की। उन्होंने कहा कि 14 फरवरी से 20 मार्च 2025 के बीच व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, यूट्यूब और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म्स पर फिल्म के 1818 अवैध लिंक फैलाए गए। इन लिंक्स ने कॉपीराइट कानून का उल्लंघन करते हुए फिल्म की कमाई को बड़ा नुकसान पहुंचाया।
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पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और पता चला कि इन लिंक्स में से एक का कनेक्शन पुणे के दौंड तालुका के रावनवाड़ी, रंधवान वस्ती के रहने वाले माणिक रंधवन से है। 26 साल का सागर होस्टिंगर से डोमेन खरीदकर ‘छावा’ जैसी नई रिलीज फिल्मों को अपलोड करता था। उसने एक खास ऐप भी बनाया था, जिसके जरिए यूजर्स पैसे देकर फिल्में डाउनलोड करते थे। सागर की यह गैरकानूनी कमाई का जरिया था, लेकिन पुलिस की सतर्कता ने उसे पकड़ लिया।
10 अप्रैल 2025 को साउथ साइबर पुलिस की टीम ने दौंड पुलिस की मदद से सागर को गिरफ्तार किया। पीएसआई रूपाली चौधरी की अगुआई में पुलिस ने उसे मुंबई लाया। सागर को हॉलिडे कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे 13 अप्रैल 2025 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस पायरेसी रैकेट में और कौन-कौन शामिल है।
इस मामले में साइबर पुलिस ने कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इनमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2) और 318(3), कॉपीराइट एक्ट की धारा 51, 63 और 65(ए), सिनेमैटोग्राफ एक्ट की धारा 6एए और 6एबी और सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट की धारा 66 और 63(जे) शामिल हैं। ये सभी धाराएं पायरेसी जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान करती हैं।