{"_id":"bb4ead92-be0e-11e2-a519-d4ae52bc57c2","slug":"arjun-kapoor-narrate-story-of-film-aurangzeb","type":"story","status":"publish","title_hn":"अर्जुन कपूर से ही सुनिए 'औरंगजेब' के किस्से","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
अर्जुन कपूर से ही सुनिए 'औरंगजेब' के किस्से
रोहित मिश्र
Updated Thu, 16 May 2013 03:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
'औरंगजेब' एक ऐसी फिल्म है जो अपने नाम से ही दर्शकों को अपने रहस्य के साथ जोड़ लेती है। 17 मई को रिलीज हो रही 'औरंगजेब' में आखिर है क्या इसे बताने के लिए फिल्म के लीड एक्टर अर्जुन कपूर खुद अमर उजाला के कॉर्पोरेट ऑफिस आए, खुद उन्हीं से सुनते हैं उनके और 'औरंगजेब' के किस्से
विज्ञापन
'इश्कजादे' से अलग है यह फिल्म
इस फिल्म से पहले अर्जुन कपूर 'इश्कजादे' में नजर आए थे। यह उनकी दूसरी फिल्म है। अर्जुन ने कहा कि उस फिल्म का अनुभव अलग तरह का था। पूरी यूनिट एक साथ 60 दिनों तक साथ रही। फिल्म को कोई बड़ी स्टारकास्ट नहीं थी, इसलिए हम पर तुलना जैसा कोई दबाव नहीं था। एक बिगड़ैल लड़के का किरदार करना मुझे बहुत कठिन नहीं लगा।
विज्ञापन
'औरंगजेब' थोड़ी कठिन फिल्म है। यह आपसे पर्दे पर एक हीरो जैसी उम्मीद करती है। यहां मेरी दोहरी भूमिका है। दोनों भूमिकाएं एक-दूसरे से अलग-अलग हैं। एक ही दिन दो अलग-अलग तरह के किरदार जीना वाकई कठिन रहा। 'औरंगजेब' फिल्म की खासियत यह है कि यहां हर आदमी के दो शेड हैं। हर आदमी पॉवर पाने के लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं।
विज्ञापन
परिणिती मेरी खास दोस्त
अर्जुन कहते हैं कि मैने पहली फिल्म परिणिती चोपड़ा के साथ की। दूसरी फिल्म में साशा आगा मेरे साथ है। दोनों अभिनेत्रियों टैलेंटड हैं। फर्क यह है कि परिणिती के साथ मेरी ट्यूनिंग साथी कलाकार की न होकर एक दोस्त की तरह है।
'इश्कजादे' की शूटिंग के दौरान ही हमारा परिचय हुआ और हम दोनों दोस्त बन गए। हम टच में हैं और हम दोनों ही एक-दूसरे से अपनी-अपनी फिल्मों के बारे में बात करते रहत हैं। साशा भी महात्वाकांक्षी और टैलेंटेड लड़की है। वह करियर में आगे बढ़ेगी।
बड़े कलाकारों का दबाब
जब आपके साथ जैकी श्राफ, ऋषि कपूर और अमृता सिंह जैसे मंझे हुए कलाकार शूटिंग कर रहे होते हैं तो आप पर एक स्वाभाविक दबाव होता है। हम इस बात से टेंशन में होते हैं कि जो सीन मैं पहली बार कर रहा हूं मेरा साथी कलाकार न जाने कितने बार कर चुका होगा।
मैं कैसे उसके सामने उसके जैसा परफॉर्म कर सकता हूं। लेकिन अच्छा यह लगा कि न तो ऋषि कपूर और न ही जैकी श्राफ ने इस बात का एहसास होने दिया कि वह कितने बड़े और सीनियर कलाकार हैं।
खुद को मारना सबसे चैलेंजिंग सीन
अर्जुन कपूर इस फिल्म में एक जगह अपनी दोहरी भूमिका वाले किरदार को थप्पड़ मार रहे होते हैं। इस सीन को वह सबसे चैलेंजिंग मानते हैं।
अर्जुन कहते हैं कि पहले हवा में थप्पड़ मारने की फीलिंग और फिर थप्पड़ खाने की फीलिंग दिखाना वाकई कठिन था। मैने थप्पड़ मारने के सीन के लिए 20 बार और थप्पड़ खाने के सीन के लिए 33 रीटेक लिए थे।
कोशिश है कि अच्छा इंसान बना रहूं
अर्जुन कपूर कहते हैं कि दर्शक कभी भी यह सोचकर फिल्म देखने नहीं जाते कि वह किसी कलाकार के बेटे की फिल्म देखने जा रहे हैं। वह बस पर्दे के एक्टर को देखने जाते हैं। मेरी कोशिश रहेगी मैं जल्द से जल्द अपने ऊपर से इस बात का ठप्पा हटा लूं कि मैं बोनी कपूर का बेटा हूं।
मैं चाहूंगा कि लोग मुझे अर्जुन कपूर के नाम से पहचाने। इसके साथ ही मेरी ख्वाहिश है कि एक इंसान के रूप में मैं कभी न बदलूं। मैं जैसा हूं वैसा ही दस बरस बाद भी रहना चाहता हूं।
अभी तो छोकरा जवान हुआ है
शादी के सवाल पर अर्जुन कपूर ने अपनी पहली फिल्म इश्कजादे का एक गाना "हुआ छोकरा जवां रे" गाकर सुना दिया। अर्जुन ने कहा कि अभी शादी को लेकर कोई प्लानिंग नहीं है।
अभी मैं बस अलग-अलग तरह की फिल्में करके अपनी पहचान बनाना चाहता हूं। साथी जीवन का एक हिस्सा है और जब मुझे लगेगा कि मुझे शादी करनी चाहिए तो मैं शादी कर लूंगा।
बॉलीवुड कलाकारों से सीखी हिंदी
फिल्म अय्या में नजर आ चुके पृथ्वीराज इस बात से उत्साहित दिखें कि उन्हें डायलॉग के लिए हिंदी की डबिंग नहीं करनी पड़ी। उन्होंने खुद ही फिल्मों के संवाद बोले हैं।
पृथ्वीराज ने कहा कि साऊथ के लोग हिंदी तेजी के साथ सीख रहे हैं तो उसकी एक बड़ी वजह हिंदी फिल्में हैं। मैने भी हिंदी सीखने के लिए किसी ट्यूटर को नहीं बुलाया था। हिंदी फिल्में देखते-देखते इतनी हिंदी सीख गया हूं कि मैं हिंदी फिल्मों में डायलॉग बोल सकूं।
हिंदी फिल्मों से मिलता है एक्सपोजर
पृथ्वीराज ने कहा कि जब आप हिंदी फिल्में कर लेते हैं तो आपकी पहचान पूरे देश में समान रूप से हो जाती है। साऊथ के सुपरस्टार भी हिंदी फिल्में इसीलिए करने के लिए आते हैं ताकि उनकी पहचान एक ऐसे नायक के रूप में बन सके जिसे पूरा देश जानता है।
मैं खुशनसीब हूं कि मुझे औरंगजेब में ऐसा किरदार मिला है जो साऊथ का न होकर हरियाणा का है। अपने प्रिय कलाकार की बात पर उन्होंने अमिताभ बच्चन का नाम लिया।