अमिताभः विद्रोही बेटे भी बने और सहयोगी पिता भी

- अनुराधा गोयल Updated Thu, 11 Oct 2012 03:35 PM IST
amitabh acting journey a rebel son to cooperating father
जिस तरह मां की जगह कोई नहीं ले सकता उसी तरह पिता की भी उतनी ही अहम भूमिका है। इस जगह को कोई नहीं भर सकता। जैसे बॉलीवुड में मां का मेकओवर हो गया है उसी तरह से दशकों से बॉलीवुड फिल्मों में आ रहे पिता के स्वरूप में भी जबरदस्त बदलाव आया है। बॉलीवुड में ऐसे बेटे भी हैं जिन्होंने फिल्मों में अक्सर अपने फिल्मी पिता का, उनके विचारों का विरोध किया है और ऐसे बेटे भी हैं जो पिता के साथ पूरा सहयोग करते हैं और उनकी बात मानते हैं, अपने पिता से प्यार करते हैं।

बॉलीवुड के पिता और बेटों की छवि को अलग-अलग रूप में दिखाने के लिए बात करें अमिताभ बच्चन की, जिन्होंने युवावस्था में पुत्र की भूमिका निभाई तो हमेशा अपने पिता का विरोध करते नजर आए। लेकिन उम्र के ढलते समय के साथ अमिताभ बच्चन ने जब स्वयं परदे पर पिता की भूमिका निभाई तो वे अपने बेटों से प्यार करते, उनका सहयोग करते नजर आए।

बेटे के रूप में दिखाए अभिनय के रंग
पिता के प्रति नफरत
अमिताभ बच्चन की अस्सी से नब्बे के दशक की फिल्मों पर गौर फरमाएं तो ‘शक्ति’ अमिताभ बच्चन की युवावस्था की ऐसी फिल्म थी जिसमें उन्होंने अपने पिता दिलीप कुमार का पुरजोर विरोध किया क्योंकि बाल्यावस्था में अपहरण होने पर अपहरणकर्ताओं को अपनी नैतिकता के चलते पिता दिलीप कुमार बेटे की जान दांव पर लगा देता है, जिससे अमिताभ बच्चन पूरी उम्र अपने पिता से नफरत करता हैं। वहीं फिल्म ‘शराबी’में अमिताभ बच्चन अपने पिता प्राण से इसीलिए नफरत करता है क्योंकि उसके पिता अपने बिजनेस के चलते उसे समय नहीं दे पाते, जिससे वह अपने पिता को पिता मानने से इंकार कर देता है।

पिता से लिया मां का बदला
फिल्म ‘त्रिशूल’ में अमिताभ बच्चन अपने पिता संजीव कुमार से अपनी मां के अपमान का बदला लेता है। अमिताभ अपने पिता संजीव को उसी के बिजनेस में मात देकर कंगाल बना देता हैं। वहीं फिल्म ‘सुहाग’में जब अमिताभ को पता चलता है कि अमजद खान उसका पिता है और उसकी मां को बचपन में छोड़कर चला गया था, तो वह अपने भाई शशि कपूर के साथ मिलकर अपने पिता को सबक सिखाता है। फिल्म ‘लावारिस’ में अमिताभ बच्चन अपने पिता से इसीलिए नफरत करता है क्योंकि उसके पिता ने उसकी मां से शादी करने से इनकार कर उसे धोखा देता है। जिससे उसके मन में अपने पिता के लिए नफरत भर गई थी।

दोस्‍त के सामने पिता कुछ नहीं
फिल्म ‘नमकहराम’ में अमिताभ बच्चन अपने पिता को अपने दोस्त की मौत का बदला लेने के लिए जेल भिजवा देता है। फिल्म ‘दीवार’ का मशहूर डॉयलाग ‘मेरा बाप चोर है’ पूरी फिल्म में अमिताभ बच्चन के गुस्से को बखूबी जाहिर करता है।
इसी तरह से फिल्म ‘मिली’ में भी अमिताभ बच्चन अपना फ्रस्‍टेशन जाहिर करता है, क्योंकि सब उन्हें इसीलिए परेशान करते हैं क्योंकि उसके पिता पर आतंकवादी और गद्दार होने का कलंक लगा हुआ होता है। ये तो थी अमिताभ बच्चन की बतौर पुत्र की भूमिकाएं। लेकिन जब अमिताभ बच्चन ने परदे पर पुत्र के बजाए पिता की भूमिका निभाई तो उनके लिए पिता की परिभाषा बदल गई।

पिता के भी कई रूप दिखाए अमिताभ ने
फिल्म ‘बागबां’ में अमिताभ बच्चन ने अपने बेटों को पढ़ा-लिखाकर उनकी हर संभव मदद की लेकिन अपने स्वाभिमान को भी कायम रखा। फिल्म ‘वक्त... द रेस अगेंस्ट टाइम’ में अमिताभ बच्चन ने अपने बेटे अक्षय कुमार के हर अच्छे-बुरे फैसले में साथ दिया मगर जरूरत पड़ने पर पिता का फर्ज निभाकर उसे कामयाब इंसान बनने की राह भी दिखाई।

फिल्म ‘वीर-जारा’में अमिताभ बच्चन ने अपने बेटे को न सिर्फ उच्च शिक्षा दिलवाई बल्कि अपने बेटे की हर इच्छा पूरी करने की कोशिश की फिर चाहे वह पाकिस्तानी लड़की से शादी करने का फैसला ही क्यों न हो। फिल्म ‘भूतनाथ’में एक तड़पते पिता की भूमिका निभाकर अपने बेटे की खुशी में अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया लेकिन समय आने पर उसके गलत निर्णय में उसका साथ नहीं दिया।

फिल्म ‘अरमान’में एक सीनियर डॉक्टर होने के बाद भी एक पिता के रूप में अहम भूमिका निभाते हुए अनिल कपूर को समय-समय पर निर्णय लेने में मदद की। फिल्म ‘कभी अलविदा न कहना’में अभिषेक बच्चन के पिता रूप में अमिताभ बच्चन ने आदर्श पिता, पिता रूप में एक दोस्त का सहज प्रदर्शन किया।

बाद में आई फिल्म ‘दीवार’ में अमिताभ ने एक बहादुर पिता की भूमिका निभाई। इस तरह से अमिताभ बच्चन में पिता की अलग-अलग भूमिकाओं को निभाकर साबित कर दिया कि पिता चाहे तो वह वाकई अपने बच्चों के अच्छे दोस्त हो सकते हैं। उनके फैसलों में उनकी मदद कर सकते हैं। न सिर्फ पिता की भूमिका बल्कि एक ही फिल्म में पिता-पुत्र की भूमिका निभाकर यानी डबल रोल करके भी पिता की भूमिका को उन्होंने नए आयाम दिए।

बहरहाल अमिताभ बच्चन ने पिता के रूप में इतनी भूमिकाएं निभाई हैं कि पिता के अलग-अलग रूपों को समझने के लिए अमिताभ की फिल्मों को देखकर ही पिता के असली रूपों को समझा जा सकता है। साथ ही पुत्र के रूप में पिता से होने वाले मतभेदों के जरिए पिता की नकारात्मक भूमिकाओं को भी अमिताभ बच्चन ने बहुत अच्छी तरह से प्रस्तुत किया है। अगर अमिताभ बच्चन को सदी का महानायक न कहकर बॉलीवुड का डायमंड कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

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