{"_id":"58b035bc4f1c1b0953b26a98","slug":"alankriata-reaction-on-rejecting-lipstick-under-my-burka","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लिपस्टिक अंडर माई बुर्का: डायरेक्टर ने सेंसर बोर्ड पर निकाली भड़ास","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
लिपस्टिक अंडर माई बुर्का: डायरेक्टर ने सेंसर बोर्ड पर निकाली भड़ास
टीम डिजिटल/ अमर उजाला,नई दिल्ली
Updated Sat, 25 Feb 2017 01:05 PM IST
विज्ञापन
बॉलीवुड
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने सर्टिफिकेट देने से इंकार कर दिया है। इस पर फिल्म की डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव ने सेंसर बोर्ड पर जमकर अपनी भड़ास निकाली है। उन्होंने कहा, 'सेंसर बोर्ड का ये निर्णय जनता की बुद्धिमता का अपमान है।' इसे सर्टिफिकेट ना देने का एकमात्र कारण ये बताया गया कि इसकी कहानी महिलाओं पर आधारित है जिसमें सामान्य जीवन से कहीं ज्यादा आगे की सोच दिखाई गई है। इसमें कई ऐसे सीन हैं जो विवाद खड़ा कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें गालियां, ऑडियो पॉर्नोग्रफी और सोसाइटी के कुछ ऐसे हिस्सों को छुआ गया है जो अत्यंत संवेदनशील हैं। इसलिए इसे मंजूर नहीं किया गया।
अलंकृता ने अपना गुस्सा निकालते हुए कहा कि सेंसर बोर्ड आइटम नंबर को तो बहुत जल्दी स्वीकृति दे देता है क्योंकि वह लोगों का मनोरंजन करते हैं, क्या तब उन्हें उसमें महिला नहीं दिखती। क्या इस पुरुष प्रधान समाज को महिलाओं पर आधारित फिल्म दिखा कर उनका मनोबल नहीं बढ़ाना चाहिए।
विज्ञापन
अलंकृता ने अपना गुस्सा निकालते हुए कहा कि सेंसर बोर्ड आइटम नंबर को तो बहुत जल्दी स्वीकृति दे देता है क्योंकि वह लोगों का मनोरंजन करते हैं, क्या तब उन्हें उसमें महिला नहीं दिखती। क्या इस पुरुष प्रधान समाज को महिलाओं पर आधारित फिल्म दिखा कर उनका मनोबल नहीं बढ़ाना चाहिए।
विज्ञापन
बॉलीवुड
इस फिल्म को इंटरनेशन फिल्म फेस्टिवल में काफी सराहा गया है। इस पर अलंकृता ने कहा कि यह काफी अचंभे वाली बात है कि इस फिल्म को दुनियाभर में तारीफ मिली सिर्फ अपनी धरती को छोड़कर। यह सेंसर बोर्ड की छोटी सोच को दर्शाता है। उनका काम इसे सर्टिफिकेट देना है ना कि इसे रोकना।
अलंकृता का कहना है कि वह इसके लिए Film Certification Appellate Tribunal के पास जाएंगी और तब तक लड़ेगीं जब तक इसे पास नहीं किया जाता। उनके हिसाब से इस फिल्म को मंजूरी ना देना महिलाओं का अपमान करना है।
अलंकृता का कहना है कि वह इसके लिए Film Certification Appellate Tribunal के पास जाएंगी और तब तक लड़ेगीं जब तक इसे पास नहीं किया जाता। उनके हिसाब से इस फिल्म को मंजूरी ना देना महिलाओं का अपमान करना है।