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ऋतुपर्णो को दादा कहें या दीदी वह बुरा नहीं मानेंगे

Thu, 30 May 2013 04:53 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 30 May 2013 04:53 PM IST
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a story define the nature of rituparno ghosh

49 साल की उम्र में 12 राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले फिल्मकार कम ही होते हैं। ऋतुपर्णो घोष एक ऐसा ही नाम थे। जिस बेबाकी के साथ उन्होंने फिल्में बनायी हैं उसी बेबाक अंदाज से वह अपनी जटिल सेक्सुअलिटी को स्वीकार्य करते हैं। उन्हें कोई दादा या दीदी इससे वह बुरा नहीं मानते थे।

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उनके न रहने पर तमाम फिल्मकारों ने ऋतुपर्णो दा के साथ अपने अनुभव शेयर किएं। बीबीसी हिंदी के साथ बातचीत करते हुए निर्देशक कल्पना लाजमी कहती हैं कि जया बच्चन, शबाना आज़मी औऱ भूपेन हज़ारिका ने ऋतुपर्णो की पहली फिल्म 'हीरेर आंग्टी' (हीरे की अंगूठी) 1994 को बनाने में आर्थिक मदद की थी।
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कल्पना बताती हैं "जब ऋतु बहुत प्रसिद्ध नहीं हुआ था, भूपेन और मैं तब से उनकी फिल्में देख रहे हैं। उसमें इतनी एनर्जी थी कि वो एक साल में 2-3 फिल्में बना लेता था। सत्यजीत रे के बाद उसी की फिल्में भारतीय सिनेमा का अच्छा प्रतिनिधित्व करती थीं।"
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कुशल निर्देशक

'हीरेर आंग्टी' की अभिनेत्री मुनमुन सेन ने बताया "ऋतु ने मुझे अपनी पहली फिल्म 'हीरेर आंग्टी' की स्क्रिप्ट पढ़कर सुनाई थी। मेरा छोटा सा ही रोल था लेकिन फिल्म बहुत अच्छी थी। उसने मुझसे वायदा किया था कि रायमा को अपनी हर फिल्म में लेगा।"

ऋतु ने एक हद तक अपना वायदा निभाया भी क्योंकि 'चोखेर बाली' से लेकर 'नौकाडूबी' और 'खेला' उनकी लगभग हर फिल्म में रायमा सेन ने अभिनय किया है।

सिर्फ रायमा ही नहीं हिंदी सिनेमा का जाना-माना नाम एश्वर्या राय बच्चन ने भी अपने करियर की श्रेष्ठतम फिल्में ऋतुपर्णो के साथ ही की हैं। एश्वर्या की खूबसूरती के बाद उनकी अभिनय क्षमता की बात 'चोखेर बाली' के बाद ही की गई थी।

समलैंगिकता पर सहज थे ऋतुपर्णो

ऋतुपर्णो खुद को समलैंगिक मानते थे और अपनी सेक्शुएलिटी को लेकर वो काफी सहज भी थे। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'मेमरीज़ ऑफ मार्च' में उन्होंने एक समलैंगिक की भूमिका भी निभाई थी।

फैशन शो हो या फिर पुरस्कार समारोह, ऋतु महिलाओं की पोशाक में नज़र आते थे जिसके लिए वो कई बार मीडिया में चर्चा का पात्र भी बन जाते थे। बावजूद इसके वो बिना किसी झिझक या शर्म के महिलाओं के कपड़े पहनते थे और समलैंगिकता पर अपने विचार खुलकर व्यक्त करते थे।

इस फिल्म में उनकी सहकलाकार रही दीप्ति नवल ने बताया "अपनी सेक्शुएलिटी को लेकर इतना सहज मैंने किसी को नहीं देखा। उसने मुझे बताया था कि एक बार अभिषेक बच्चन ने उसे ऋतु दा नहीं ऋतु दी कहा और ये बताते हुए उसकी आंखों में चमक थी।"


दीप्ति के अनुसार "ऋतु सिर्फ पुरुषों और महिलाओं के ही नहीं हर मुद्दे को इतनी गंभीरता और संजीदगी से प्रस्तुत करते थे कि मैं क्या कहूं। उनकी अकस्मात मृत्यु से मैं बहुत सदमे में हूं।"

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