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आपको भी खटकी होंगी 'वंस अपॉन..' की यह 5 कमियां
रोहित मिश्र
Updated Sat, 17 Aug 2013 12:17 PM IST
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'वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई' की सीक्वल फिल्म 'वंस अपॉन एक टाइम इन मुंबई दोबारा' को एवरेज ओपनिंग मिली है। अभी तक इस फिल्म से जुड़ी जो प्रतिक्रिया आई हैं उनके अनुसार इस अच्छी फिल्म को कुछ वजहों ने खराब कर दिया है।
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दर्शकों ने इस फिल्म की तुलना पिछली फिल्म से की ही इसके अलावा अक्षय की तुलना अजय देवगन और इमरान खान की तुलना इमरान हाशमी से हुई। ज्यादातर दर्शकों को यह किरदार रोल के अनुसार फिट नहीं लगे। देखते हैं कि इस फिल्म की पांच बड़ी कमियां कौन सी रहीं।
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*इस फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी रोल के मुताबिक स्टारकास्ट का फिट न बैठना हैं। अक्षय कुमार और इमरान खान दोनों ही गैंगस्टर के रोल में फिट नहीं बैठते हैं। मासूम से चेहरे वाले इमरान और कॉमेडी फिल्मों का बड़ा चेहरा बन चुके अक्षय कुमार रोल के हिसाब से बिल्कुल मिसफिट लगते हैं। लगता ही नहीं कि दोनों गैंगस्टर हैं।
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*इस फिल्म में अक्षय कुमार की डायलॉग डिलवरी भी फिल्म की बड़ी कमी है। अक्षय कुमार जिस तरह से डायलॉग बोलते हैं उसे देखकर लगता है कि उन्हें किरदार से कोई मतलब नहीं है वे बस डायलॉग बोलने की रस्म कर रहे हैं। किरदार से बिल्कुल कटकर।
*इस फिल्म के संवाद रजत अरोड़ा ने लिखे हैं। अच्छे डायलॉग उनकी यूएसपी होती है। इस फिल्म की प्रीक्वल फिल्म के अलावा 'डर्टी पिक्चर' में भी उनके लिखे डायलॉग खूब पसंद किए गए थे। डायलॉग तो इस फिल्म में भी अच्छे हैं लेकिन उनका डोज इतना ज्यादा हो जाता है कि उबाऊ और बासी लगने लगते हैं।
*फिल्म की कहानी इस फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है। चूंकि कहानी में ही गलती थी इसलिए स्क्रीनप्ले और डायलॉग के जरिए उस कमी को पूरा नहीं किया जा सकता। सेकेंड हॉफ में यह फिल्म अपनी कहानी की वजह से पूरी तरह से बिखर जाती है। क्लाइमेक्स बहुत ही सतही है।
*इस फिल्म में 'नायक' का न होना एक बहुत बड़ी कमी लगी। विलेन बने अक्षय कुमार के किरदार के सामने हीरो बने इमरान खान पर बहुत भारी पड़े हैं। हीरो के पास न तो विलेन जैसे डायलॉग हैं और न ही हीरो को हीरो जैसा दिखाने का दमखम फिल्म की स्किप्ट में दिखा।