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Atul Kulkarni: थिएटर से की शुरुआत, जीते दो नेशनल अवॉर्ड्स; जानें अतुल कुलकर्णी की 10 यादगार फिल्में
Wed, 10 Sep 2025 12:53 AM IST
हिमांशु सोनी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Wed, 10 Sep 2025 12:53 AM IST
सार
Atul Kulkarni Movies: अभिनेता, प्रोड्यूसर और स्क्रीनराइटर अतुल कुलकर्णी किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। इडंस्ट्री में उन्होंने दमदार किरदारों और काम से पहचान बनाई है। आज अतुल पूरे 60 साल के हो गए हैं।
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अतुल कुलकर्णी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कलाकारों की कमी नहीं है जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो अभिनय की विविधता और गंभीरता दोनों को परिभाषित करते हैं। अतुल कुलकर्णी उन्हीं में से एक हैं। मराठी थिएटर से शुरुआत करने वाले अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और अंग्रेजी फिल्मों में भी अपनी पहचान बनाई। अतुल कुलकर्णी आज अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। ऐसे में चलिए बताते हैं उनकी यादगार फिल्मों के बारे में।
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अतुल कुलकर्णी
- फोटो : एक्स
अतुल कुलकर्णी का बचपन
अतुल कुलकर्णी का जन्म 10 सितंबर 1965 को महाराष्ट्र के बेलगाम (अब कर्नाटक) में हुआ था। उनका बचपन एक साधारण माहौल में बीता। शुरू में उन्होंने इंजीनियरिंग पढ़ाई के लिए पुणे कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, लेकिन यह राह उन्हें रास नहीं आई। बचपन से ही कला और नाटकों की ओर उनका झुकाव था। पढ़ाई छोड़कर उन्होंने थिएटर का रास्ता चुना और यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
थिएटर से अभिनय की शुरुआत
स्कूल के दिनों से ही अतुल नाट्य प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे। 1989 से 1992 तक उन्होंने महाराष्ट्र राज्य नाट्य स्पर्धा में लगातार कई पुरस्कार जीते। इस दौरान उन्होंने अभिनय और निर्देशन दोनों में अपनी प्रतिभा दिखाई। कॉलेज के दिनों में वे नाट्य आराधना नामक सोलापुर स्थित एक थियेटर ग्रुप से जुड़े। यहीं से उनके अभिनय की नींव मजबूत हुई।
अतुल कुलकर्णी का जन्म 10 सितंबर 1965 को महाराष्ट्र के बेलगाम (अब कर्नाटक) में हुआ था। उनका बचपन एक साधारण माहौल में बीता। शुरू में उन्होंने इंजीनियरिंग पढ़ाई के लिए पुणे कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, लेकिन यह राह उन्हें रास नहीं आई। बचपन से ही कला और नाटकों की ओर उनका झुकाव था। पढ़ाई छोड़कर उन्होंने थिएटर का रास्ता चुना और यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
थिएटर से अभिनय की शुरुआत
स्कूल के दिनों से ही अतुल नाट्य प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे। 1989 से 1992 तक उन्होंने महाराष्ट्र राज्य नाट्य स्पर्धा में लगातार कई पुरस्कार जीते। इस दौरान उन्होंने अभिनय और निर्देशन दोनों में अपनी प्रतिभा दिखाई। कॉलेज के दिनों में वे नाट्य आराधना नामक सोलापुर स्थित एक थियेटर ग्रुप से जुड़े। यहीं से उनके अभिनय की नींव मजबूत हुई।
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अतुल कुलकर्णी
- फोटो : एक्स
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से शुरुआत
1995 में अतुल कुलकर्णी ने नई दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया। यहीं उनकी मुलाकात गीताांजलि कुलकर्णी से हुई, जो बाद में उनकी पत्नी बनीं और खुद एक सफल थिएटर कलाकार हैं। एनएसडी से निकलने के बाद अतुल ने गंभीरता से फिल्मों और नाटकों में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई।
ये खबर भी पढ़ें: Janhvi Kapoor: वरुण धवन को भूल गईं जान्हवी, पुराने को-एक्टर्स संग ‘बिजुरिया’ गाने पर डांस करती दिखीं
हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा में सफर
अतुल कुलकर्णी उन चुनिंदा अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि मराठी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और यहां तक कि अंग्रेजी फिल्मों में भी बेहतरीन काम किया। 'हे राम' और 'चांदनी बार' जैसी फिल्मों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वहीं 'रंग दे बसंती' और 'खाकी' जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया।
1995 में अतुल कुलकर्णी ने नई दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया। यहीं उनकी मुलाकात गीताांजलि कुलकर्णी से हुई, जो बाद में उनकी पत्नी बनीं और खुद एक सफल थिएटर कलाकार हैं। एनएसडी से निकलने के बाद अतुल ने गंभीरता से फिल्मों और नाटकों में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई।
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हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा में सफर
अतुल कुलकर्णी उन चुनिंदा अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि मराठी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और यहां तक कि अंग्रेजी फिल्मों में भी बेहतरीन काम किया। 'हे राम' और 'चांदनी बार' जैसी फिल्मों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वहीं 'रंग दे बसंती' और 'खाकी' जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया।
अतुल कुलकर्णी
- फोटो : एक्स
'लाल सिंह चड्ढा' के स्क्रीनराइटर
अतुल ना सिर्फ वर्सटाइल एक्टर हैं बल्कि प्रोड्यूसर और स्क्रीनराइटर भी हैं। आमिर खान की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' के लिए अतुल ने स्क्रीनप्ले लिखा था, जिसे काफी सराहा गया था। हालांकि बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म कुछ खास नहीं कर पाई थी।
अतुल कुलकर्णी के एनजीओ कार्य
अभिनय के साथ-साथ अतुल कुलकर्णी सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। वो क्वेस्ट एजुकेशन सपोर्ट ट्रस्ट नाम की संस्था के अध्यक्ष हैं, जो वंचित बच्चों को शिक्षा देने का काम करती है। इसके अलावा, वो महाराष्ट्र के सतारा जिले में 24 एकड़ बंजर जमीन को हरियाली में बदलने जैसे पर्यावर्णीय प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े रहे हैं।
अतुल ना सिर्फ वर्सटाइल एक्टर हैं बल्कि प्रोड्यूसर और स्क्रीनराइटर भी हैं। आमिर खान की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' के लिए अतुल ने स्क्रीनप्ले लिखा था, जिसे काफी सराहा गया था। हालांकि बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म कुछ खास नहीं कर पाई थी।
अतुल कुलकर्णी के एनजीओ कार्य
अभिनय के साथ-साथ अतुल कुलकर्णी सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। वो क्वेस्ट एजुकेशन सपोर्ट ट्रस्ट नाम की संस्था के अध्यक्ष हैं, जो वंचित बच्चों को शिक्षा देने का काम करती है। इसके अलावा, वो महाराष्ट्र के सतारा जिले में 24 एकड़ बंजर जमीन को हरियाली में बदलने जैसे पर्यावर्णीय प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े रहे हैं।
अतुल कुलकर्णी
- फोटो : एक्स
राष्ट्रीय पुरस्कार और उपलब्धियां
अतुल कुलकर्णी को दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। साल 2000 में फिल्म 'हे राम' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार और साल 2001 में फिल्म 'चांदनी बार' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का अवॉर्ड। इन उपलब्धियों ने उन्हें न सिर्फ एक अभिनेता के रूप में बल्कि एक कलाकार के रूप में भी अलग पहचान दिलाई।
चलिए अब बात करते हैं अतुल कुलकर्णी की 10 यादगार फिल्मों के बारे में
हे राम (2000)
कमल हासन द्वारा निर्देशित इस फिल्म में अतुल ने श्रीराम अभ्यंकर का किरदार निभाया। गांधी की हत्या की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में उनकी अदाकारी ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया।
अतुल कुलकर्णी को दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। साल 2000 में फिल्म 'हे राम' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार और साल 2001 में फिल्म 'चांदनी बार' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का अवॉर्ड। इन उपलब्धियों ने उन्हें न सिर्फ एक अभिनेता के रूप में बल्कि एक कलाकार के रूप में भी अलग पहचान दिलाई।
चलिए अब बात करते हैं अतुल कुलकर्णी की 10 यादगार फिल्मों के बारे में
हे राम (2000)
कमल हासन द्वारा निर्देशित इस फिल्म में अतुल ने श्रीराम अभ्यंकर का किरदार निभाया। गांधी की हत्या की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में उनकी अदाकारी ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया।
अतुल कुलकर्णी
- फोटो : एक्स
चांदनी बार (2001)
माधुरी दीक्षित की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में अतुल ने पोट्या सावंत का किरदार निभाया। अंडरवर्ल्ड के गैंगस्टर के रूप में उनका अभिनय इतना प्रभावी था कि उन्हें इसके लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
रंग दे बसंती (2006)
युवा पीढ़ी को प्रेरित करने वाली इस फिल्म में अतुल ने लक्ष्मण पांडे की भूमिका निभाई। उनका किरदार देशभक्ति और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया।
माधुरी दीक्षित की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में अतुल ने पोट्या सावंत का किरदार निभाया। अंडरवर्ल्ड के गैंगस्टर के रूप में उनका अभिनय इतना प्रभावी था कि उन्हें इसके लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
रंग दे बसंती (2006)
युवा पीढ़ी को प्रेरित करने वाली इस फिल्म में अतुल ने लक्ष्मण पांडे की भूमिका निभाई। उनका किरदार देशभक्ति और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया।
अतुल कुलकर्णी
- फोटो : एक्स
पेज 3 (2005)
पत्रकारिता और ग्लैमर वर्ल्ड की कड़वी सच्चाइयों पर बनी इस फिल्म में अतुल ने एक सशक्त किरदार निभाया। फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों दोनों ने खूब सराहा।
खाकी (2004)
अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार के साथ इस फिल्म में अतुल कुलकर्णी ने डॉ. इकबाल अंसारी की अहम भूमिका निभाई। फिल्म की कहानी और उनके किरदार ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया।
पत्रकारिता और ग्लैमर वर्ल्ड की कड़वी सच्चाइयों पर बनी इस फिल्म में अतुल ने एक सशक्त किरदार निभाया। फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों दोनों ने खूब सराहा।
खाकी (2004)
अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार के साथ इस फिल्म में अतुल कुलकर्णी ने डॉ. इकबाल अंसारी की अहम भूमिका निभाई। फिल्म की कहानी और उनके किरदार ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया।
अतुल कुलकर्णी
- फोटो : एक्स
दिल्ली-6 (2009)
राकेश ओमप्रकाश मेहरा की इस फिल्म में अतुल ने गोबर का किरदार निभाया। यह साधारण लगने वाला किरदार भी उनकी अभिनय क्षमता को दर्शाता है।
नटरंग (2010)
मराठी सिनेमा की इस क्लासिक फिल्म में उन्होंने गुन्या का किरदार निभाया। थिएटर और तमाशा की दुनिया को दर्शाने वाली यह फिल्म उनकी करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है।
राकेश ओमप्रकाश मेहरा की इस फिल्म में अतुल ने गोबर का किरदार निभाया। यह साधारण लगने वाला किरदार भी उनकी अभिनय क्षमता को दर्शाता है।
नटरंग (2010)
मराठी सिनेमा की इस क्लासिक फिल्म में उन्होंने गुन्या का किरदार निभाया। थिएटर और तमाशा की दुनिया को दर्शाने वाली यह फिल्म उनकी करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है।
मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी
- फोटो : एक्स
मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी (2019)
कंगना रनौत की इस फिल्म में अतुल ने तात्या टोपे का किरदार निभाया। इस ऐतिहासिक फिल्म में उनकी मौजूदगी ने कहानी को और भी मजबूत बनाया।
द अटैक्स ऑफ 26/11 (2013)
राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म में अतुल कुलकर्णी ने एक पुलिस अधिकारी शिंदे की भूमिका निभाई। मुंबई हमलों की सच्ची घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में उनका अभिनय दिल दहला देने वाला था।
ए थर्सडे (2022)
यामी गौतम अभिनीत इस फिल्म में अतुल ने जावेद खान का किरदार निभाया। यह फिल्म एक सस्पेंस-थ्रिलर थी और इसमें अतुल की भूमिका बेहद अहम रही।
कंगना रनौत की इस फिल्म में अतुल ने तात्या टोपे का किरदार निभाया। इस ऐतिहासिक फिल्म में उनकी मौजूदगी ने कहानी को और भी मजबूत बनाया।
द अटैक्स ऑफ 26/11 (2013)
राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म में अतुल कुलकर्णी ने एक पुलिस अधिकारी शिंदे की भूमिका निभाई। मुंबई हमलों की सच्ची घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में उनका अभिनय दिल दहला देने वाला था।
ए थर्सडे (2022)
यामी गौतम अभिनीत इस फिल्म में अतुल ने जावेद खान का किरदार निभाया। यह फिल्म एक सस्पेंस-थ्रिलर थी और इसमें अतुल की भूमिका बेहद अहम रही।