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सीट का समीकरण: 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां हैट्रिक लगाने से चूकी भाजपा, ऐसा है फेफना का चुनावी इतिहास

Tue, 15 Sep 2026 08:10 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा Published by: अमन तिवारी Updated Tue, 15 Sep 2026 08:10 PM IST
सार

बलिया की फेफना विधानसभा सीट साल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। 2012 में यहां पहला चुनाव हुआ। 2012 और 2017 में इस सीट पर भाजपा को जीत मिली। वहीं, पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को जीत की हैट्रिक लगाने से रोक दिया। आइए, जानते हैं फेफना सीट का पूरा चुनावी इतिहास और सियासी गणित।

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विस्तार

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। देश की राजनीति का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके वर्चस्व को खत्म कर देगा। यूपी की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात बलिया जिले की फेफना विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
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पहले जानते हैं फेफना विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला बलिया है। जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बेल्थरा रोड, रसड़ा, सिकंदरपुर, फेफना, बलिया नगर, बांसडीह और बैरिया शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज फेफना विधानसभा सीट की बात करेंगे। बलिया जिले की फेफना विधानसभा सीट साल 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव साल 2012 में हुआ था। फेफना विधानसभा क्षेत्र के पहले चुनाव में भाजपा के उपेंद्र तिवारी विधायक चुने गए थे।
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फेफना विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
फेफना विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में यादव, अनुसूचित जाति, ठाकुर (क्षत्रिय), राजभर, ब्राह्मण और भूमिहार आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। अगर जातिगत आंकड़ों पर नजर डालें तो क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी यादव मतदाताओं की है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 20% हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 19% है। ठाकुर (क्षत्रिय) मतदाता लगभग 12%, राजभर मतदाता करीब 7%, ब्राह्मण मतदाता लगभग 6% और भूमिहार मतदाता करीब 6% हैं। वहीं कोइरी, बनिया और मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग 4-4% है। इसके अलावा बाकी बचे लगभग मतदाता अन्य जातियों और समुदायों से आते हैं।  

फेफना विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
बलिया की फेफना विधानसभा सीट के पहले यानी की साल 2012 के चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में भाजपा के उपेंद्र तिवारी विजयी हुए। उन्होंने सपा के अंबिका चौधरी को 7,387 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में उपेंद्र तिवारी को 51,151 वोट, जबकि अंबिका चौधरी को 43,764 वोट मिले। वहीं, सुभासपा के संग्राम सिंह यादव तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 36 हजार से ज्यादा वोट मिले।
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भाजपा ने दोहराई जीत
वहीं 2017 के चुनाव में बलिया जिले की फेफना विधानसभा सीट से भाजपा के उपेंद्र तिवारी दोबारा जीत हासिल की। उन्होंने बसपा के अंबिका चौधरी को 17,897 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में उपेंद्र तिवारी को 70,588 वोट मिले, जबकि अंबिका चौधरी को 52,691 वोट मिले। वहीं, सपा के संग्राम सिंह 50,016 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022: सपा ने मारी बाजी
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बलिया जिले की फेफना विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के संग्राम सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उपेंद्र तिवारी को 19,354 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में संग्राम सिंह को 92,516 वोट मिले, जबकि उपेंद्र तिवारी को 73,162 वोट प्राप्त हुए। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के कमल देव 14,154 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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