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सीट का समीकरण: अमेठी ने पिछले पांच चुनाव में तीन अलग-अलग दलों को चुना, दो-दो बार भाजपा-सपा के नाम रही जीत
Wed, 21 Oct 2026 12:11 AM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 21 Oct 2026 12:11 AM IST
सार
अमेठी विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई थी। यहां के पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद यहां से कांग्रेस, भारतीय जनसंघ, भाजपा और सपा सहित कई दलों ने समय-समय पर जीत हासिल की। आइए इस विधानसभा सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं...
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अमेठी सीट का समीकरण
- फोटो : अमेठी सीट का समीकरण
विस्तार
क्या उत्तर प्रदेश में 2027 में भाजपा अपनी सत्ता की हैट्रिक बनाएगी, या फिर विपक्षी पार्टियां 10 साल के इंतजार के बाद लखनऊ के सिंहासन पर काबिज होंगी? इस सवाल का जवाब तो वक्त देगा, लेकिन इसकी कहानी अभी से लिखी जाने लगी है, जिसे लेकर सभी राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात अमेठी जिले की अमेठी विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं अमेठी विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला अमेठी है। जिले के अंतर्गत कुल चार विधानसभा सीटें आती हैं- तिलोई, जगदीशपुर, गौरीगंज और अमेठी। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम अमेठी विधानसभा सीट की बात करेंगे। अमेठी जिले की अमेठी विधानसभा सीट वैसे तो पहले आम चुनाव से ही अस्तित्व में है, लेकिन उस समय यह क्षेत्र कई अलग-अलग हिस्सों में विभाजित था। हालांकि, साल 1957 में यह 'अमेठी' नाम से नए स्वरूप में स्वतंत्र सीट के रूप में अस्तित्व में आई। इस सीट पर पहला चुनाव साल 1957 में हुआ था। यहां से पहले विधायक रामकांत सिंह बने थे, जिन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
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पहले जानते हैं अमेठी विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला अमेठी है। जिले के अंतर्गत कुल चार विधानसभा सीटें आती हैं- तिलोई, जगदीशपुर, गौरीगंज और अमेठी। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम अमेठी विधानसभा सीट की बात करेंगे। अमेठी जिले की अमेठी विधानसभा सीट वैसे तो पहले आम चुनाव से ही अस्तित्व में है, लेकिन उस समय यह क्षेत्र कई अलग-अलग हिस्सों में विभाजित था। हालांकि, साल 1957 में यह 'अमेठी' नाम से नए स्वरूप में स्वतंत्र सीट के रूप में अस्तित्व में आई। इस सीट पर पहला चुनाव साल 1957 में हुआ था। यहां से पहले विधायक रामकांत सिंह बने थे, जिन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
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अमेठी विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
अमेठी विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में ब्राह्मण, अनुसूचित जाति (दलित), क्षत्रिय (ठाकुर) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी ब्राह्मण मतदाताओं की है, जो लगभग 23% हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति (दलित) मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 20% और क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की आबादी लगभग 18% है।
अन्य प्रमुख वर्गों में यादव समाज के मतदाता करीब 9% और मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 8% है। इसके अलावा वैश्य समुदाय के मतदाता करीब 5% हैं, जबकि बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
अमेठी विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
कांग्रेस के दबदबे से शुरुआत
अमेठी विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1957 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में कांग्रेस के रामकांत सिंह विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी बिजई पाल को 8,811 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रामकांत सिंह को 16,970 वोट, जबकि बिजई पाल को 8,159 वोट मिले थे।
अमेठी विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में ब्राह्मण, अनुसूचित जाति (दलित), क्षत्रिय (ठाकुर) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी ब्राह्मण मतदाताओं की है, जो लगभग 23% हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति (दलित) मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 20% और क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की आबादी लगभग 18% है।
अन्य प्रमुख वर्गों में यादव समाज के मतदाता करीब 9% और मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 8% है। इसके अलावा वैश्य समुदाय के मतदाता करीब 5% हैं, जबकि बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
अमेठी विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
कांग्रेस के दबदबे से शुरुआत
अमेठी विधानसभा सीट के पहले यानी कि 1957 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में कांग्रेस के रामकांत सिंह विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी बिजई पाल को 8,811 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रामकांत सिंह को 16,970 वोट, जबकि बिजई पाल को 8,159 वोट मिले थे।
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इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1962: कांग्रेस ने दोहराई जीत
इस चुनाव में अमेठी से कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी। चुनाव में कांग्रेस के वैद्य बैजनाथ सिंह विजयी हुए थे। उन्होंने निर्दलीय राम बली को 12,425 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में वैद्य बैजनाथ सिंह को 19,391 वोट, जबकि राम बली को 6,966 वोट मिले।
1967: पहली बार जीता भारतीय जनसंघ
इसके बाद राज्य में 1967 के चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार भारतीय जनसंघ (BJS) ने अमेठी विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। इस चुनाव में जनसंघ के रविंद्र प्रताप सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के बैजनाथ सिंह वैद्य को 9,231 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रविंद्र प्रताप सिंह को 22,022 वोट मिले, जबकि बैजनाथ सिंह वैद्य को 12,791 वोट प्राप्त हुए।
1969: भारतीय जनसंघ ने दोहराई जीत
वहीं 1969 के विधानसभा चुनाव में भी भारतीय जनसंघ (बीजेएस) ने अमेठी सीट पर अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। इस चुनाव में जनसंघ के राजा रंजय सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के बैजनाथ सिंह वैद्य को 4,683 वोटों के अंतर से पराजित किया। चुनाव में राजा रंजय सिंह को 22,372 वोट मिले, जबकि बैजनाथ सिंह वैद्य को 17,689 वोट प्राप्त हुए।
इस चुनाव में अमेठी से कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी। चुनाव में कांग्रेस के वैद्य बैजनाथ सिंह विजयी हुए थे। उन्होंने निर्दलीय राम बली को 12,425 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में वैद्य बैजनाथ सिंह को 19,391 वोट, जबकि राम बली को 6,966 वोट मिले।
1967: पहली बार जीता भारतीय जनसंघ
इसके बाद राज्य में 1967 के चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार भारतीय जनसंघ (BJS) ने अमेठी विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। इस चुनाव में जनसंघ के रविंद्र प्रताप सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के बैजनाथ सिंह वैद्य को 9,231 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रविंद्र प्रताप सिंह को 22,022 वोट मिले, जबकि बैजनाथ सिंह वैद्य को 12,791 वोट प्राप्त हुए।
1969: भारतीय जनसंघ ने दोहराई जीत
वहीं 1969 के विधानसभा चुनाव में भी भारतीय जनसंघ (बीजेएस) ने अमेठी सीट पर अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। इस चुनाव में जनसंघ के राजा रंजय सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के बैजनाथ सिंह वैद्य को 4,683 वोटों के अंतर से पराजित किया। चुनाव में राजा रंजय सिंह को 22,372 वोट मिले, जबकि बैजनाथ सिंह वैद्य को 17,689 वोट प्राप्त हुए।
1974 में कांग्रेस ने की वापसी
इस चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के राजा रंजय सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के रवींद्र प्रताप सिंह को 3,582 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजा रणंजय सिंह को 20,464 वोट, जबकि रवींद्र प्रताप सिंह को 16,882 वोट मिले।
आपातकाल का समय
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
इस चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के राजा रंजय सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के रवींद्र प्रताप सिंह को 3,582 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजा रणंजय सिंह को 20,464 वोट, जबकि रवींद्र प्रताप सिंह को 16,882 वोट मिले।
आपातकाल का समय
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
1977 में पहली बार जीती जनता पार्टी
इस चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के हरिचरण यादव विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के बैजनाथ सिंह वैद्य को 4,321 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरिचरण यादव को 18,304 वोट, जबकि बैजनाथ सिंह वैद्य को 13,983 वोट मिले।
हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
इस चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के हरिचरण यादव विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के बैजनाथ सिंह वैद्य को 4,321 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरिचरण यादव को 18,304 वोट, जबकि बैजनाथ सिंह वैद्य को 13,983 वोट मिले।
हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1980 का चुनाव
1980 के चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की। चुनाव में कांग्रेस (आई) के राजकुमार संजय सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के हरिचरण को 32,644 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजकुमार संजय सिंह को 46,603 वोट, जबकि हरिचरण को 13,959 वोट मिले।
1980 के बाद राज्य में 1985, 1989 और 1991 के चुनाव हुए। इन चुनावों में अमेठी विधानसभा सीट पर लगातार कांग्रेस ने जीत दर्ज की।
1985: कांग्रेस ने दोहराई जीत
1985 के चुनाव की बात करें तो चुनाव में कांग्रेस के राजकुमार संजय सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के बी.सी. मिश्रा को 1,22,352 वोटों के भारी अंतर से हराया।
1989: कांग्रेस ने लगाई जीत की हैट्रिक
इसके बाद 1989 के चुनाव में कांग्रेस के हरिचरण यादव ने जीत दर्ज की। उन्होंने जनता दल के राजकुमार संजय सिंह को 32,248 वोटों के अंतर से हराया।
1980 के चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की। चुनाव में कांग्रेस (आई) के राजकुमार संजय सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के हरिचरण को 32,644 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजकुमार संजय सिंह को 46,603 वोट, जबकि हरिचरण को 13,959 वोट मिले।
1980 के बाद राज्य में 1985, 1989 और 1991 के चुनाव हुए। इन चुनावों में अमेठी विधानसभा सीट पर लगातार कांग्रेस ने जीत दर्ज की।
1985: कांग्रेस ने दोहराई जीत
1985 के चुनाव की बात करें तो चुनाव में कांग्रेस के राजकुमार संजय सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के बी.सी. मिश्रा को 1,22,352 वोटों के भारी अंतर से हराया।
1989: कांग्रेस ने लगाई जीत की हैट्रिक
इसके बाद 1989 के चुनाव में कांग्रेस के हरिचरण यादव ने जीत दर्ज की। उन्होंने जनता दल के राजकुमार संजय सिंह को 32,248 वोटों के अंतर से हराया।
1991: लगातार चौथी बार जीती कांग्रेस
वहीं 1991 के चुनाव में कांग्रेस के हरिचरण यादव लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के जमुना प्रसाद मिश्रा को 15,579 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरिचरण यादव को 33,176 वोट, जबकि जमुना प्रसाद मिश्रा को 17,597 वोट मिले।
1993: पहली बार भाजपा ने दर्ज की जीत
इन चुनावों के बाद राज्य में 1993 के चुनाव हुए। इस चुनाव में अमेठी में पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जमुना मिश्रा विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के राधे श्याम यादव को 3,767 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जमुना मिश्रा को 23,270 वोट, जबकि राधे श्याम यादव को 19,503 वोट मिले।
1996: कांग्रेस ने फिर की वापसी
वहीं 1996 के चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी विधानसभा सीट पर एक बार फिर वापसी करते हुए जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के राम हर्ष सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के जमुना प्रसाद मिश्रा को 4,199 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम हर्ष सिंह को 36,069 वोट, जबकि जमुना प्रसाद मिश्रा को 31,870 वोट मिले।
वहीं 1991 के चुनाव में कांग्रेस के हरिचरण यादव लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के जमुना प्रसाद मिश्रा को 15,579 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरिचरण यादव को 33,176 वोट, जबकि जमुना प्रसाद मिश्रा को 17,597 वोट मिले।
1993: पहली बार भाजपा ने दर्ज की जीत
इन चुनावों के बाद राज्य में 1993 के चुनाव हुए। इस चुनाव में अमेठी में पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जमुना मिश्रा विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के राधे श्याम यादव को 3,767 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जमुना मिश्रा को 23,270 वोट, जबकि राधे श्याम यादव को 19,503 वोट मिले।
1996: कांग्रेस ने फिर की वापसी
वहीं 1996 के चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी विधानसभा सीट पर एक बार फिर वापसी करते हुए जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के राम हर्ष सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के जमुना प्रसाद मिश्रा को 4,199 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम हर्ष सिंह को 36,069 वोट, जबकि जमुना प्रसाद मिश्रा को 31,870 वोट मिले।
2002: भाजपा ने की वापसी
1996 के बाद 2002 के चुनाव हुए, जिसमें भाजपा ने एक बार फिर बाजी मारी। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अमिता सिंह विजयी हुईं। उन्होंने कांग्रेस के आशीष को 18,765 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अमिता सिंह को 55,949 वोट, जबकि आशीष को 37,184 वोट मिले।
2007: कांग्रेस ने जीत चुनाव
वहीं 2007 के चुनाव की बात करें तो चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की। इस विधानसभा चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट से कांग्रेस की अमिता सिंह विजयी हुईं। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के आशीष को 12,424 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अमिता सिंह को 48,108 वोट, जबकि आशीष को 35,684 वोट मिले।
1996 के बाद 2002 के चुनाव हुए, जिसमें भाजपा ने एक बार फिर बाजी मारी। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अमिता सिंह विजयी हुईं। उन्होंने कांग्रेस के आशीष को 18,765 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अमिता सिंह को 55,949 वोट, जबकि आशीष को 37,184 वोट मिले।
2007: कांग्रेस ने जीत चुनाव
वहीं 2007 के चुनाव की बात करें तो चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की। इस विधानसभा चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट से कांग्रेस की अमिता सिंह विजयी हुईं। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के आशीष को 12,424 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अमिता सिंह को 48,108 वोट, जबकि आशीष को 35,684 वोट मिले।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
2012: अमेठी में पहली बार जीती सपा
इस चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट पर सपा की एंट्री हुई। इस चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के गायत्री प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस की अमिता सिंह को 8,760 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में गायत्री प्रसाद को 58,434 वोट, जबकि अमिता सिंह को 49,674 वोट मिले।
2017: भाजपा ने एक बार फिर की वापसी
इस चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गरिमा सिंह विजयी हुईं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के गायत्री प्रसाद को 5,065 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में गरिमा सिंह को 64,226 वोट, जबकि गायत्री प्रसाद को 59,161 वोट मिले। वहीं बसपा के रामजी 30175 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022: सपा ने मारी बाजी
इस चुनाव में यूपी विधानसभा चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की महाराजी प्रजापति विजयी हुईं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के डॉ. संजय सिंह को 18,096 वोटों के अंतर से हराया। चुना में महाराजी प्रजापति को 88,217 वोट, जबकि डॉ. संजय सिंह को 70,121 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के आशीष शुक्ला 14,080 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
इस चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट पर सपा की एंट्री हुई। इस चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के गायत्री प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस की अमिता सिंह को 8,760 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में गायत्री प्रसाद को 58,434 वोट, जबकि अमिता सिंह को 49,674 वोट मिले।
2017: भाजपा ने एक बार फिर की वापसी
इस चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गरिमा सिंह विजयी हुईं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के गायत्री प्रसाद को 5,065 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में गरिमा सिंह को 64,226 वोट, जबकि गायत्री प्रसाद को 59,161 वोट मिले। वहीं बसपा के रामजी 30175 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022: सपा ने मारी बाजी
इस चुनाव में यूपी विधानसभा चुनाव में अमेठी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की महाराजी प्रजापति विजयी हुईं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के डॉ. संजय सिंह को 18,096 वोटों के अंतर से हराया। चुना में महाराजी प्रजापति को 88,217 वोट, जबकि डॉ. संजय सिंह को 70,121 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के आशीष शुक्ला 14,080 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।