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Maharashtra New CM: चुनाव नतीजा आए बीत गया एक हफ्ता, महाराष्ट्र में आखिर कहां और क्यों अटकी है बात?
Sat, 30 Nov 2024 05:07 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Sat, 30 Nov 2024 05:07 PM IST
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महाराष्ट्र की सियासत
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AMAR UJALA
विस्तार
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हुए अब एक हफ्ता हो चुका है लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे पर संशय बरकरार है। अमित शाह से मुलाकात के बाद महायुति के नेताओं की एक बैठक महाराष्ट्र में होनी थी लेकिन यह टल गई। कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अचानक सतारा में अपने गांव के दौरे पर निकल गए। इस बीच, शिवसेना नेताओं ने शिंदे की किसी भी नाराजगी को नकार दिया है। इससे पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने पद को छोड़ने के संकेत देते हुए कहा था कि उन्हें भाजपा के मुख्यमंत्री बनने से कोई दिक्कत नहीं है।आइये जानते हैं कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे कब आए? नतीजों के बाद क्या-क्या घटनाक्रम हुए? एकनाथ शिंदे ने अपने पद छोड़ने को लेकर क्या कहा था? अमित शाह के साथ बैठक में क्या हुआ? महायुति की बैठक का क्या हुआ? एकनाथ शिंदे अपने गांव के दौरे पर क्यों गए? अब आगे क्या होगा?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे कब आए?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को आए। इन नतीजों में महायुति ने कुल 288 विधानसभा सीटों में से 235 सीटें हासिल कीं। भाजपा ने सबसे अधिक 132 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी दल- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 57 सीटें जीतीं और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 41 सीटें जीतीं। इसके अलावा पांच सीटें महायुति में शामिल अन्य दलों- जन सुराज्य शक्ति (2), राष्ट्रीय युवा स्वाभिमान पार्टी (1) और राष्ट्रीय समाज पक्ष (1) ने जीतीं।
इसके विपरीत लोकसभा में अधिक अधिक सीटें जीतने वाले महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को विधानसभा चुनावों में करारा झटका लगा। एमवीए में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 20 सीटें जीतीं, कांग्रेस ने 16 सीटें हासिल कीं और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शपा) को सिर्फ 10 सीटें मिलीं।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को आए। इन नतीजों में महायुति ने कुल 288 विधानसभा सीटों में से 235 सीटें हासिल कीं। भाजपा ने सबसे अधिक 132 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी दल- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 57 सीटें जीतीं और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 41 सीटें जीतीं। इसके अलावा पांच सीटें महायुति में शामिल अन्य दलों- जन सुराज्य शक्ति (2), राष्ट्रीय युवा स्वाभिमान पार्टी (1) और राष्ट्रीय समाज पक्ष (1) ने जीतीं।
इसके विपरीत लोकसभा में अधिक अधिक सीटें जीतने वाले महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को विधानसभा चुनावों में करारा झटका लगा। एमवीए में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 20 सीटें जीतीं, कांग्रेस ने 16 सीटें हासिल कीं और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शपा) को सिर्फ 10 सीटें मिलीं।
महाराष्ट्र में महायुति की जीत
- फोटो :
PTI
नतीजों के बाद क्या हुआ?
महाराष्ट्र में महायुति की ऐतिहासिक जीत के बाद सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई। गठबंधन के घटक भाजपा, शिवसेना व एनसीपी में अलग-अलग बैठकों का दौर शुरू हो गया। साथ ही सीएम पद को लेकर दबाव बनाने की राजनीति भी शुरू हो गई। नतीजे के अगले ही दिन यानी 24 नवंबर को एनसीपी के विधायक दल की बैठक हुई जिसमें अजित पवार को नेता चुना गया। पार्टी के नेता छगन भुजबल ने अजित पवार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की। वहीं, शिवसेना विधायकों ने एकनाथ शिंदे को अपना नेता चुना। पार्टी नेता प्रताप सरनाईक ने कहा कि सभी विधायक चाहते हैं कि शिंदे सीएम बने रहें।
उधर 26 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल खत्म होना था लिहाजा इसी दिन राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही शिवसेना प्रमुख कार्यवाहक मुख्यमंत्री की भूमिका में आ गए। इससे पहले एकनाथ शिंदे ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि वे उनके समर्थन में मुंबई में एकत्र न हों। उन्होंने महायुति गठबंधन की मजबूती को भी दोहराया और कहा कि निर्णायक जीत के बाद भी गठबंधन एकजुट रहेगा।
महाराष्ट्र में महायुति की ऐतिहासिक जीत के बाद सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई। गठबंधन के घटक भाजपा, शिवसेना व एनसीपी में अलग-अलग बैठकों का दौर शुरू हो गया। साथ ही सीएम पद को लेकर दबाव बनाने की राजनीति भी शुरू हो गई। नतीजे के अगले ही दिन यानी 24 नवंबर को एनसीपी के विधायक दल की बैठक हुई जिसमें अजित पवार को नेता चुना गया। पार्टी के नेता छगन भुजबल ने अजित पवार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की। वहीं, शिवसेना विधायकों ने एकनाथ शिंदे को अपना नेता चुना। पार्टी नेता प्रताप सरनाईक ने कहा कि सभी विधायक चाहते हैं कि शिंदे सीएम बने रहें।
उधर 26 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल खत्म होना था लिहाजा इसी दिन राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही शिवसेना प्रमुख कार्यवाहक मुख्यमंत्री की भूमिका में आ गए। इससे पहले एकनाथ शिंदे ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि वे उनके समर्थन में मुंबई में एकत्र न हों। उन्होंने महायुति गठबंधन की मजबूती को भी दोहराया और कहा कि निर्णायक जीत के बाद भी गठबंधन एकजुट रहेगा।
महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
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PTI
एकनाथ शिंदे ने अपनी दावेदारी छोड़ने को लेकर क्या कहा था?
शिवसेना नेता शिंदे ने 27 नंवबर को मुख्यमंत्री पद की अपनी दावेदारी छोड़ने का संकेत दिया। उन्होंने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीएम पद को लेकर चल रही चर्चा को विराम दे दिया। एकनाथ शिंदे ने कहा कि मेरे मन में सीएम बनने की लालसा नहीं है। पीएम मोदी और अमित शाह जो भी निर्णय लेंगे मुझे मंजूर होगा। सरकार बनाते समय मेरी तरफ से कोई अड़चन नहीं आएगी। मैं चट्टान की तरह साथ खड़ा हूं। भाजपा की बैठक में जो भी निर्णय लिया जाएगा, हमें मान्य होगा। भाजपा का सीएम मुझे मंजूर है।
बुधवार को ही भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे के सीएम पद पर बयान पर प्रतिक्रिया दी। फडणवीस ने कहा कि महायुति में एक-दूसरे के प्रति कभी मतभेद नहीं रहे और जल्द ही वे दिल्ली में नेताओं से मिलेंगे और निर्णय लेंगे। वहीं, एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने कहा कि दिल्ली में सरकार गठन पर चर्चा होने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। महायुति गठबंधन के भीतर महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री को लेकर चल रही खींचतान के बीच 27 नवंबर को एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना सांसदों ने संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।
शिवसेना नेता शिंदे ने 27 नंवबर को मुख्यमंत्री पद की अपनी दावेदारी छोड़ने का संकेत दिया। उन्होंने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीएम पद को लेकर चल रही चर्चा को विराम दे दिया। एकनाथ शिंदे ने कहा कि मेरे मन में सीएम बनने की लालसा नहीं है। पीएम मोदी और अमित शाह जो भी निर्णय लेंगे मुझे मंजूर होगा। सरकार बनाते समय मेरी तरफ से कोई अड़चन नहीं आएगी। मैं चट्टान की तरह साथ खड़ा हूं। भाजपा की बैठक में जो भी निर्णय लिया जाएगा, हमें मान्य होगा। भाजपा का सीएम मुझे मंजूर है।
बुधवार को ही भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे के सीएम पद पर बयान पर प्रतिक्रिया दी। फडणवीस ने कहा कि महायुति में एक-दूसरे के प्रति कभी मतभेद नहीं रहे और जल्द ही वे दिल्ली में नेताओं से मिलेंगे और निर्णय लेंगे। वहीं, एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने कहा कि दिल्ली में सरकार गठन पर चर्चा होने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। महायुति गठबंधन के भीतर महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री को लेकर चल रही खींचतान के बीच 27 नवंबर को एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना सांसदों ने संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।
अमित शाह, देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे
- फोटो :
ANI
अमित शाह के साथ बैठक में क्या हुआ?
शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे, भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस, एनसीपी प्रमुख अजित पवार और महायुति के अन्य नेताओं ने गुरुवार रात (28 नवंबर) को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। नेता महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्र हुए।
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार शिंदे ने बैठक में कहा, 'मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी थी कि महायुति के मुख्यमंत्री को लेकर कोई बाधा नहीं है। यह लाडला भाई दिल्ली आ गया है और लाडला भाई मेरे लिए किसी भी चीज से बड़ा पद है।'
वहीं केंद्रीय मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मुलाकात के बाद शिंदे ने बैठक को 'अच्छा और सकारात्मक' बताया। उन्होंने कहा कि एक और बैठक शुक्रवार को मुंबई में होगी, जिसमें यह तय होने की उम्मीद है कि मुख्यमंत्री की भूमिका कौन संभालेगा।
शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे, भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस, एनसीपी प्रमुख अजित पवार और महायुति के अन्य नेताओं ने गुरुवार रात (28 नवंबर) को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। नेता महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्र हुए।
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार शिंदे ने बैठक में कहा, 'मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी थी कि महायुति के मुख्यमंत्री को लेकर कोई बाधा नहीं है। यह लाडला भाई दिल्ली आ गया है और लाडला भाई मेरे लिए किसी भी चीज से बड़ा पद है।'
वहीं केंद्रीय मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मुलाकात के बाद शिंदे ने बैठक को 'अच्छा और सकारात्मक' बताया। उन्होंने कहा कि एक और बैठक शुक्रवार को मुंबई में होगी, जिसमें यह तय होने की उम्मीद है कि मुख्यमंत्री की भूमिका कौन संभालेगा।
रामदास अठावले
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amar ujala
शिंदे की केंद्र में भूमिका की चर्चा क्यों हुई?
29 नवंबर को शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने शिंदे को केंद्र में भूमिका दिए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया दी। शिवसेना नेता ने यह कहा कि एकनाथ शिंदे केंद्रीय मंत्रिमंडल में कोई पद नहीं लेंगे क्योंकि उनकी रुचि महाराष्ट्र की राजनीति में है। इससे पहले 26 नवंबर को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा था कि देवेंद्र फडणवीस को महायुति सरकार का नेतृत्व करना चाहिए क्योंकि महाराष्ट्र के लोग चाहते हैं कि वे अगले मुख्यमंत्री बनें और एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री हो सकते हैं या मोदी सरकार में शामिल हो सकते हैं।
29 नवंबर को शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने शिंदे को केंद्र में भूमिका दिए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया दी। शिवसेना नेता ने यह कहा कि एकनाथ शिंदे केंद्रीय मंत्रिमंडल में कोई पद नहीं लेंगे क्योंकि उनकी रुचि महाराष्ट्र की राजनीति में है। इससे पहले 26 नवंबर को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा था कि देवेंद्र फडणवीस को महायुति सरकार का नेतृत्व करना चाहिए क्योंकि महाराष्ट्र के लोग चाहते हैं कि वे अगले मुख्यमंत्री बनें और एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री हो सकते हैं या मोदी सरकार में शामिल हो सकते हैं।
एकनाथ शिंदे।
- फोटो :
एक्स/एकनाथ शिंदे
एकनाथ शिंदे अपने गांव के दौरे पर क्यों गए?
मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर जारी सस्पेंस के बीच शुक्रवार (29 नवंबर) को एकनाथ शिंदे के सतारा जिले में अपने पैतृक गांव चले गए। वहीं शुक्रवार को मुंबई में होने वाली बैठक भी टल गई। औरंगाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक संजय शिरसाट के मुताबिक महाराष्ट्र के लिए मुख्यमंत्री पद के चेहरे का नाम शुक्रवार आधी रात तक घोषित किया जाना चाहिए था।
एकनाथ शिंदे के गांव जाने पर शिवसेना नेता शिरसाट ने कहा कि जब भी एकनाथ शिंदे को लगता है कि उन्हें सोचने के लिए कुछ समय चाहिए तो वह अपने पैतृक गांव चले जाते हैं।
हालांकि, शिवसेना नेता उदय सामंत ने सीएम चेहरे को लेकर अटकलों के बीच एकनाथ शिंदे के 'नाराज' होने की सभी खबरों का खंडन किया। सामंत ने स्पष्ट किया कि पार्टी प्रमुख शनिवार को अपने पैतृक गांव से वापस आ जाएंगे और अगले मंत्रिमंडल को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा।
उदय सामंत ने एएनआई को बताया, 'उनके नाराज होने की खबरें मीडिया से सामने आ रही हैं। हम शुक्रवार सुबह तक एकनाथ शिंदे के साथ थे। शनिवार को वह वापस आएंगे और ऐसा नहीं है कि बैठक केवल आमने-सामने से होती है, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, मोबाइल के जरिए भी होती हैं। जैसा कि एकनाथ शिंदे ने कहा है कि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा।'
मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर जारी सस्पेंस के बीच शुक्रवार (29 नवंबर) को एकनाथ शिंदे के सतारा जिले में अपने पैतृक गांव चले गए। वहीं शुक्रवार को मुंबई में होने वाली बैठक भी टल गई। औरंगाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक संजय शिरसाट के मुताबिक महाराष्ट्र के लिए मुख्यमंत्री पद के चेहरे का नाम शुक्रवार आधी रात तक घोषित किया जाना चाहिए था।
एकनाथ शिंदे के गांव जाने पर शिवसेना नेता शिरसाट ने कहा कि जब भी एकनाथ शिंदे को लगता है कि उन्हें सोचने के लिए कुछ समय चाहिए तो वह अपने पैतृक गांव चले जाते हैं।
हालांकि, शिवसेना नेता उदय सामंत ने सीएम चेहरे को लेकर अटकलों के बीच एकनाथ शिंदे के 'नाराज' होने की सभी खबरों का खंडन किया। सामंत ने स्पष्ट किया कि पार्टी प्रमुख शनिवार को अपने पैतृक गांव से वापस आ जाएंगे और अगले मंत्रिमंडल को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा।
उदय सामंत ने एएनआई को बताया, 'उनके नाराज होने की खबरें मीडिया से सामने आ रही हैं। हम शुक्रवार सुबह तक एकनाथ शिंदे के साथ थे। शनिवार को वह वापस आएंगे और ऐसा नहीं है कि बैठक केवल आमने-सामने से होती है, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, मोबाइल के जरिए भी होती हैं। जैसा कि एकनाथ शिंदे ने कहा है कि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा।'
शिवसेना नेता संजय शिरसाट
- फोटो :
एएनआई
विभागों को लेकर भी महायुति में क्या चल रहा है?
सरकार गठन से पहले ही महाराष्ट्र सरकार में विभागों पर दावेदारी को लेकर बयानबाजी शुरू है। शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने शनिवार (29 नवंबर) को जोर देकर कहा कि पार्टी को नई महाराष्ट्र सरकार में महत्वपूर्ण गृह विभाग मिलना चाहिए और दावा किया कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को दरकिनार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पीटीआई से बातचीत में शिवसेना विधायक शिरसाट ने कहा कि शिंदे की सकारात्मक छवि और उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं को देखते हुए यदि उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में ढाई साल और मिलते तो वह और अधिक योगदान देते।
शिरसाट ने कहा, 'गृह विभाग पार्टी (शिवसेना) के पास होना चाहिए। यह विभाग (आमतौर पर) उपमुख्यमंत्री के पास होता है। अगर मुख्यमंत्री गृह विभाग का प्रभार संभालें तो यह सही नहीं होगा।'
सरकार गठन से पहले ही महाराष्ट्र सरकार में विभागों पर दावेदारी को लेकर बयानबाजी शुरू है। शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने शनिवार (29 नवंबर) को जोर देकर कहा कि पार्टी को नई महाराष्ट्र सरकार में महत्वपूर्ण गृह विभाग मिलना चाहिए और दावा किया कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को दरकिनार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पीटीआई से बातचीत में शिवसेना विधायक शिरसाट ने कहा कि शिंदे की सकारात्मक छवि और उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं को देखते हुए यदि उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में ढाई साल और मिलते तो वह और अधिक योगदान देते।
शिरसाट ने कहा, 'गृह विभाग पार्टी (शिवसेना) के पास होना चाहिए। यह विभाग (आमतौर पर) उपमुख्यमंत्री के पास होता है। अगर मुख्यमंत्री गृह विभाग का प्रभार संभालें तो यह सही नहीं होगा।'
महाराष्ट्र में आगे क्या?
शनिवार को भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने पीटीआई को बताया कि महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की नई सरकार 5 दिसंबर को बनेगी। भाजपा नेता ने यह ही कहा कि देवेंद्र फडणवीस अगले मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं।
शनिवार को भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने पीटीआई को बताया कि महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की नई सरकार 5 दिसंबर को बनेगी। भाजपा नेता ने यह ही कहा कि देवेंद्र फडणवीस अगले मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं।