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Maharashtra Assembly election: सोने के पालने में आरक्षण की आंच पर जातियों की लड़ाई, मनोज जरांगे फैक्टर अहम

Mon, 18 Nov 2024 06:08 AM IST
दीपक कुमार शर्मा नितिन यादव, जालना (महाराष्ट्र)
नितिन यादव, जालना (महाराष्ट्र) Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 18 Nov 2024 06:08 AM IST
सार

Maharashtra Vidhan Sabha Chunav 2024: मराठा आरक्षण के खिलाफ ओबीसी आरक्षण बचाओ आंदोलन भी जालना जिले में आंतरवाड़ी गांव से महज कुछ किमी दूर वडीगोदरी में शुरू हुआ। नेताओं ने अपने हिसाब से आंदोलनों का साथ दिया और अब उसी के हिसाब से यहां वोटों का गुणा-गणित लगाया जा रहा है। 
 

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Maharashtra election 2024 Manoj Jarange Factor and maratha reservation issue
महाराष्ट्र के जालना जिले में मराठा आरक्षण और ओबीसी आरक्षण बचाओ को लेकर आंदोलन व प्रदर्शन का दौर खूब - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मराठा आरक्षण की आग महाराष्ट्र के जिले जालना के एक छोटे से गांव आंतरवाड़ी से तेजी से फैली। आरक्षण की लड़ाई का नेतृत्व कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने अब चुनाव में साफ कह दिया है कि जो उनका साथ देगा, हम उसका साथ देंगे। बात सिर्फ मराठा आरक्षण की नहीं है। मराठा आरक्षण के खिलाफ ओबीसी आरक्षण बचाओ आंदोलन भी आंतरवाड़ी गांव से महज कुछ किमी दूर वडीगोदरी में शुरू हुआ। नेताओं ने अपने हिसाब से आंदोलनों का साथ दिया और अब उसी के हिसाब से यहां वोटों का गुणा-गणित लगाया जा रहा है। पिछले चुनाव में यहां की पांच विधानसभा सीटों में भोकरदान, पोरतुल और बोदनापुर में भाजपा जीती थी। जालना से कांग्रेस और घनसांवगी से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को विजय हासिल हुई थी।

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इस जिले को स्टील की फैक्टरियों की वजह से जालना यानी सोने का पालना भी कहा जाता है। गन्ने की अच्छी खेती होती है और मौसंबी भी यहां के किसान खूब उगाते हैं। यहां की घनसांवगी सीट के गांव आंतरवाली में मराठा आरक्षण की लड़ाई के नेता मनोज जरांगे पाटिल रहते हैं। उनका गांव इस समय राजनीति का बड़ा केंद्र बना हुआ है। जरांगे पाटिल पहले कभी कांग्रेस में हुआ करते थे, लेकिन आरक्षण की लड़ाई के लिए उन्होंने शिवाजी के नाम पर शिवबा नाम का संगठन बनाया। पैदल मार्च से लेकर गोदावरी में कूदकर जान देने की धमकी भी दी। 29 अगस्त, 2023 को मराठा आरक्षण को लेकर फिर से आंदोलन शुरू हुआ। सप्ताह भर में आंदोलन ने काफी बड़ा रूप ले लिया और इसी बीच पुलिस ने एक दिन लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद आंदोलन की आग तेजी से फैली और आंतरवाली गांव में शरद पवार, उद्धव ठाकरे  और राज ठाकरे जैसे नेता पहुंचे। जरांगे ने घोषणा कर दी कि अब मराठा आरक्षण से कम कुछ मंजूर नहीं होगा। इसके बाद इसी जिले से एक दूसरा मोर्चा खुला। पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य लक्ष्मण हाके ने इस्तीफा देकर वडीगोदरी गांव से ओबीसी आरक्षण बचाओ के नाम से आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन बढ़ा और इसको समर्थन देने के लिए भाजपा से पंकजा मुंडे और धनंजय मुंडे भी पहुंचे। इस बार की सियासी लड़ाई इसी तरह से दो खेमों में बंटती नजर आ रही है। मराठा वर्ग के मुकाबले ओबीसी भी एक अलग खेमे में नजर आ रहा है। माना जाता है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता राव साहब दानवे की हार की एक बड़ी वजह मराठा आरक्षण आंदोलन की नाराजगी थी। ऐसे में इस चुनाव में भी जरांगे फैक्टर अहम साबित होगा।
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जरांगे के घर जुट रही भीड़

  • जरांगे फैक्टर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनसे मिलने रोजाना काफी संख्या में स्थानीय लोग और कार्यकर्ता उनके गांव आंतरवाली पहुंचते हैं। आसपास के गांव में भी सरपंच का नाम पूछो, तो रास्ता आंतरवाली की ओर ही बता दिया जाता है।
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  • यहां इंतजार कर रहे आशीष का कहना है कि वह जरांगे के हिसाब से ही चलेंगे। जब पूछा गया कि जरांगे तो साफ नहीं बोल रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि समर्थक इशारों से ही अंदाजा लगा लेते हैं। कैक्टस की खेती के बीच बने घर में चौपाल लगाकर बैठे लोगों ने मराठी में जवाब दिया कि यहां पर जरांगे समर्थकों की संख्या अच्छी है। पूरे राज्य में जरांगे फैक्टर काम करेगा। हालांकि वडीगोदरी गांव के चौराहे पर चाय पी रहे पवन कहते हैं ओबीसी एकजुट हो जाएं, तो क्या नहीं हो सकता।
  • ओबीसी में यहां पर बंजारा जाति की संख्या अच्छी खासी है। रामदास मुंडे ने कहा कि पहली बार यह लकीर खिंची है कि मराठा और ओबीसी आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। वह इसकी वजह दोनों से ओर से चली आरक्षण की लड़ाई को मानते हैं।

घनसांवगी में ही सबसे बड़ा घमासान
जालना में सबसे हॉट सीट भी घनसांवगी ही बनी हुई है। यहां पर मराठों की संख्या अच्छी खासी है। एनसीपी-शरद गुट से लगातार तीन बार के विधायक और पूर्व मंत्री राजेश टोपे मैदान में हैं। कोरोना काल में उनके कामों की लोग तारीफ करते हैं, पर यह भी कहा जा रहा है कि इस बार उनको ओबीसी वोट मिलने पर संशय है। उनके सामने तीन बार हार चुके हिकमत उधान शिवसेना शिंदे गुट से हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन महायुति को उम्मीद है कि ओबीसी वोट उसकी ओर से आने से सीट के समीकरण बदल सकते हैं। इस लड़ाई के बीच नया पेच ओबीसी आंदोलन के नेता रहे बलिराम खटके की पत्नी कावेरी ताई ने फंसा दिया है। कावेरी प्रकाश आंबेडकर के वंचित बहुजन आघाड़ी से लड़ रही हैं। ऐसे में महायुति खेमे को ओबीसी वोट बंटने का भी डर है। भाजपा में रहे सतीश घाटगे निर्दलीय लड़ रहे हैं।  



राव साहब दानवे की प्रतिष्ठा भी दांव पर
जिले की भोकरदान सीट से भाजपा के पूर्व सांसद राव साहब दानवे के बेटे संतोष राव दानवे मैदान में हैं। 38 साल के संतोष पिछली विधानसभा में युवा विधायकों में से एक रहे हैं। उनके सामने एनसीपी-शरद के चंद्रकात दानवे हैं। राव साहब दानवे की बेटी भी औरंगाबाद जिले से चुनाव लड़ रही हैं। दानवे समर्थक लोकसभा सीट की गलती न दोहराने की अपील कर रहे हैं। जालना सीट पर कांग्रेस के मौजूदा विधायक कैलाश गोरंटेल के सामने छात्र राजनीति से आए अर्जुन खोतकर शिवसेना शिंदे से हैं। जालना में मुस्लिम मतदाता लगभग 20 फीसदी हैं, जो अहम साबित होते रहे हैं। शिक्षक वारिस का मानना है कि यहां भी उनका वोट एक ओर ही जाएगा, हालांकि किसी ओर के नाम पर वह मुस्कुरा कर चल देते हैं।

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