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NDA: पुरानों ने मझधार में फंसाया, नए साथियों ने उबारा; नीतीश-नायडू न जुड़ते तो बहुमत तक पहुंचना होता मुश्किल

Wed, 05 Jun 2024 07:13 AM IST
निर्मल कांत ब्यूरो/हिमांशु मिश्र/मनीष शुक्ला
ब्यूरो/हिमांशु मिश्र/मनीष शुक्ला Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 05 Jun 2024 07:13 AM IST
सार

Lok Sabha Polls: अपने दम पर 370 का नारा देने वाली भाजपा को अपने पुराने सहयोगियों से उतना लाभ नहीं मिला जितना चुनाव से पहले एनडीए में शामिल हुए नए साथियों ने दिलाया। साथ ही पार्टी को कभी अपना गढ़ रहे राज्यों में इस बार तगड़ा झटका लगा। हालांकि कुछ राज्यों ने सत्ता में बने रहने की उसकी उम्मीदें जिंदा रखीं।

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The old people trapped NDA in the middle, the new comrades saved it
नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू - फोटो : एएनआई

विस्तार

लोकसभा चुनाव में पुराने साथी भाजपा के लिए घाटे का सौदा साबित हुए, वहीं नए साथियों ने लाज बचा ली। अगर चुनाव से ठीक पहले भाजपा को जदयू, लोजपा (आर) और तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी) का साथ नहीं मिलता तो एनडीए के लिए बहुमत के जादुई आंकड़े को छूना सपना बन जाता। नतीजे बताते हैं कि भाजपा के पुराने साथी एनसीपी (अजित पवार) और शिवसेना (शिंदे), सुभासपा लाभप्रद साबित नहीं हुए।

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चुनाव से ठीक पहले भाजपा पांच दलों जदयू, टीडीपी, लोजपा (आर), जनसेना पार्टी और रालोद को एनडीए में शामिल करने में कामयाब रही। जनवरी में नीतीश कुमार ने तो मार्च में चंद्रबाबू नायडू, चिराग पासवान, पवन कल्याण और जयंत चौधरी के साथ गठबंधन पर सहमति बनी। चुनाव में जदयू को 12, लोजपा (आर) को पांच, टीडीपी को 16,  जनसेना को दो और रालोद को दो सीट मिली। इन दलों ने संयुक्त रूप से 37 सीटें जीती। यही वह आंकड़ा है, जिसकी बदौलत एनडीए बहुमत के जादुई आंकड़े को पार कर पाया।
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कारगर साबित नहीं हुए अजित-शिंदे
महाराष्ट्र में भी भाजपा को बड़ा झटका लगा है। बीते चुनाव में सहयोगियों के सहारे प्रदेश की 48 में से 43 सीटें जीतने वाले एनडीए का आंकड़ा इस बार 19 पर ही अटक गया। पार्टी के लिए शिवेसना (शिंदे) और एनसीपी (अजित) घाटे का सौदा साबित हुए। शिंदे शिवसेना (यूबीटी) में और अजित एनसीपी (शरद पवार) के वोट बैंक में निर्णायक सेंध नहीं लगा पाए। इन्हें क्रमश: पांच और एक सीट ही हासिल हुई। पिछली बार अकेले दम पर 23 सीटों पर जीत हासिल करने वाली भाजपा के खाते में मात्र 11 सीटें ही आई हैं। राज्य में इस चुनाव में भाजपा कांग्रेस के बाद दूसरे नंबर पर खिसक गई।
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सुभासपा का नहीं दिखा असर
चुनाव में उत्तर प्रदेश में सुभासपा को साधने का भाजपा को कोई लाभ नहीं मिला। पार्टी अपनी घोसी सीट भी नहीं बचा पाई। अपना दल दो में से ही एक ही सीट जीत पाई।

उत्तर प्रदेशः सत्ता पर काबिज होने के बावजूद तगड़ा झटका
पिछले दो लोकसभा चुनावों में भाजपा की झोली भरने वाले उत्तर प्रदेश ने इस बार मुंह मोड़ लिया। सबसे अधिक 80 सीटों वाले राज्य में भाजपा को सिर्फ 33 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। पिछली बार की तुलना में पार्टी को 29 सीटों का नुकसान हुआ है। भाजपा ने 2014 में 71 तो 2019 में 62 सीटें जीती थीं। राम मंदिर निर्माण को मुद्दा बनाने वाली भाजपा फैजाबाद में ही अपनी सीट नहीं बचा सकी। राज्य में सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिली हैं। पिछली बार सपा को पांच और कांग्रेस को एक ही सीट पर जीत हासिल हुई थी।

बिहार, हरियाणा और बंगाल  में भी पिछली बार से कम सीटें
बिहार में भाजपा को पिछली बार की तुलना में पांच सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी ने पिछली बार 17 सीटें हासिल की थीं। इस बार 12 ही आई हैं। हरियाणा में भी उसे पांच सीटें गंवानी पड़ी। पार्टी ने पिछली बार 10 पर जीत हासिल की थी। इस बार 5 सीटों पर विजयी मिली।

पश्चिम बंगाल से भाजपा को इस बार बहुत उम्मीदें थी, लेकिन पार्टी अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराने में नाकाम रही। पार्टी ने पिछली बार 18 सीटें हासिल की थी। इस बार उसका आंकड़ा घटकर 12 सीटों पर आ गया। 

राजस्थान: दस सीटों का नुकसान
राजस्थान में विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत का फायदा लोकसभा चुनाव में भाजपा को नहीं मिला। पार्टी इस बार मात्र 14 सीटें ही हासिल कर सकी, जबकि पिछली बार उसे 24 पर जीत हासिल हुई थी। इस तरह, उसे 10 सीटों का नुकसान हुआ। 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 25 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।

मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ ने उम्मीदें जगाए रखीं
नई दिल्ली। भाजपा को 200 का आंकड़ा पार कराने में मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन तीनों राज्यों में भाजपा ही सत्तारूढ़ है। मध्य प्रदेश में भाजपा का जनता ने भरपूर साथ दिया है। 29 सीटों में से पार्टी के खाते में 29 सीटें आई हैं जबकि पिछली बार 28 और 2014 में 27 सीटें पार्टी ने जीती थीं। पार्टी ने पिछली बार की एक सीट की कसक भी इस बार पूरी कर दी।

गुजरात सदाबहार साथी: पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के गृह राज्य गुजरात ने इस बार भी भाजपा का पूरा साथ दिया और पार्टी की झोली में 26 में से 25 सीटें डाली। पिछले दो चुनावों में पार्टी राज्य की सभी सीटों पर जीत हासिल कर रही थी।

छत्तीसगढ़ का सहारा: राज्य में भाजपा को जनता ने पूरा प्यार लुटाया है। राज्य की 11 में से 10 सीटें पार्टी के हिस्से में आई हैं। पिछली बार पार्टी को नौ पर ही जीत मिली थी।  


दिल्ली में फिर मिलीं सातों की सात सीटें
देश की राजधानी दिल्ली में भाजपा के खाते में पिछली बार की तरह सातों सीटें आई हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी व कांग्रेस ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था लेकिन दोनों दल भाजपा के विजयी रथ को रोकने में नाकाम रहे।

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