Ground Report: उत्तर-पश्चिम दिल्ली का रण, मूलभूत समस्याओं से परेशान मतदाता; काम करने वाले नेता को ही देंगे वोट
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Ground Report: उत्तर-पश्चिम दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में डेढ़ सौ गांव और ढाई सौ से ज्यादा अवैध बस्तियां और इंडस्ट्रियल एरिया हैं। यहां के लाखों वोटर तय करते हैं कि सांसद कौन बनेगा।
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विस्तार
उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा सीट में डेढ़ सौ गांव और ढाई सौ से ज्यादा अवैध बस्तियों के अलावा इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने वाले लाखों वोटर तय करते हैं कि यहां का सांसद कौन बनेगा। देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र में शामिल बड़े-बड़े इलाके इसी लोकसभा क्षेत्र के हिस्से में आते हैं। इन औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले लोग और इस क्षेत्र की 250 से ज्यादा अवैध बस्तियों में रहने वाले लाखों वोटरों के झुकाव से यहां के प्रत्याशी के संसद भवन पहुंचने की राह तय होती है। वैसे तो लोकसभा क्षेत्र उत्तर पश्चिम के इस इलाके में बड़े रिहायशी और पॉश इलाके भी हैं। लेकिन संसद भवन में पहुंचने का मजबूत रास्ता यहां के हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर इलाके के 150 गांव भी बनाते हैं। फिलहाल 2024 के लोकसभा चुनाव में इस बार कभी यहीं से भाजपा के सांसद रहे उदित राज गठबंधन के तहत कांग्रेस के खाते में आई इस सीट से प्रत्याशी हैं। जबकि भारतीय जनता पार्टी से पूर्व मेयर योगेंद्र चंदोलिया चुनाव लड़ रहे हैं।
काम करने वाले नेता को ही दिया जाएगा वोट
दिल्ली के उत्तर पश्चिम लोकसभा क्षेत्र में एक बड़ी और सबसे ज्यादा वोट करने वाली आबादी औद्योगिक क्षेत्रों में काम करती है। यहां के नरेला में सुरक्षा उपकरणों को बनाने वाली कंपनी में काम करने वाले अमित मोहन बताते हैं कि वह उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के रहने वाले हैं। बीते 10 सालों से वह यहीं पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह जिस बस्ती में रह रहे हैं वह अवैध है। पिछले विधानसभा चुनावों में इन बस्तियों को वैध करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन चुनाव खत्म होने के साथ ही इस प्रक्रिया को भी रोक दिया गया। वह कहते हैं कि उनका वोट इस बार इसी आधार पर तय होगा कि उनकी इस अवैध बस्ती को वैध कौन करने वाला है। इसी इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने वाले बाबू प्रकाश राठौड़ कहते हैं कि उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा नरेला जैसे इंडस्ट्रियल एरिया की गलियों में गुजर रहा है। वह चाहते हैं कि औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जाए। ताकि उनके जैसे लाखों कर्मचारियों को अपने कार्यक्षेत्र के हिस्से में बेहतर सुविधाएं तो मिल सकें।
मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं लोग
यहां के बवाना, मुंडका, मंगोलपुरी और नरेला समेत बादली जैसे इलाकों के हिस्से में आने वाले कई गांव के लोगों की भी अपनी समस्याएं हैं। बादली के हिस्से में आने वाले गांव जैतन के पंकज डेढा कहते हैं कि उनके गांव में अभी भी विकास की बहुत आवश्यकता है। पंकज के मुताबिक यहां के तकरीबन डेढ़ सौ से ज्यादा छोटे-बड़े गांव में अभी भी मेट्रो नेटवर्क से लेकर कनेक्टिविटी की बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके अलावा बिजली-पानी समेत सड़कों और अन्य छोटे-छोटे स्थानीय मुद्दों जिसमें पार्को से लेकर स्कूलों तक की जरूरत है। पंकज कहते हैं कि इस इलाके में तीन बार लोकसभा का चुनाव हुआ है। जिसमें दो बार भारतीय जनता पार्टी का सांसद चुना गया। उनका आरोप है कि पिछले चुनावों में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाले हंसराज हंस का टिकट आखिर भारतीय जनता पार्टी ने इस बार क्यों काट दिया। वह अपने सवाल का जवाब भी देते हैं कि निश्चित तौर पर उन्होंने काम नहीं किया था, इसीलिए पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इलाके के लोग इस बात को समझते हैं। इसलिए वह इस क्षेत्र में विकास करने वाले प्रत्याशी को ही वोट देंगे।
चुनाव की दशा और दिशा तय करेंगे बस्तियों के मतदाता
यहां के औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की संस्था इंडस्ट्रियल एरिया एंप्लॉई वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव ब्रजेश झा कहते हैं कि उत्तर पश्चिमी लोकसभा क्षेत्र में फैक्टरी में काम करने वाले लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां पर उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और राजस्थान समेत हरियाणा देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लाखों प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित वर्कर मतदाता हैं। बृजेश कहते हैं इनमें से अधिकांश लोग यहां की तकरीबन ढाई सौ से ज्यादा अवैध बस्तियों मे रहते हैं। यह वही बस्तियां हैं, जो लोकसभा और विधानसभा चुनाव में दशा दिशा तय करती हैं। उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव में इस बार फिर से इन्हीं ढाई सौ बस्तियों में रहने वाले लाखों वोटों के मतदान पर इस इलाके के प्रत्याशी की हार और जीत तय होगी। यहां रहने वाले हरीश शर्मा बताते हैं कि उनकी बस्तियों को पिछले कुछ समय से नियमित किए जाने की बात की जा रही थी। लेकिन वह अभी तक नियमित नहीं हो पाई हैं। इस बार फिर नेताओं ने अपने वादों में उनकी इस मांग को आगे रखा है। हरीश कहते हैं कि शनिवार को चुनाव है इसलिए वोट तो दिए ही जाएंगे। लेकिन देखना यही होगा कि लोगों का भरोसा किसकी ओर ज्यादा है।
भाजपा और कांग्रेस के अपने अपने तर्क
भाजपा नेता गौरव जैन कहते हैं कि भाजपा ने इस इलाके में सबसे ज्यादा काम किया है। गौरव कहते हैं कि दिल्ली के सबसे बड़े प्रतिष्ठित स्थान के तौर पर उभरे और डेवलप हुए नेताजी सुभाष प्लेस की चमक दमक से लेकर केंद्र सरकार की योजनाओं को बेहतर तरीके से यहां की जरूरतमंद आबादी में उतारा गया है। इस इलाके के इंडस्ट्रियल एरिया में विकास के नाम पर जितना काम हुआ है, वह अपने में एक नजीर है। केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ इन इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने वाले कामगारों को मिल रहा है। जबकि कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष हरजोत सिंह कहते हैं कि उनका प्रत्याशी इस बार सबसे मजबूत है। उनका तर्क है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर यहां पर बीते पांच वर्षों में जो काम रुका हुआ था उसको आगे ले जाएगी।