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LS Polls: हर व्यापारी GST से परेशान, लेकिन वोट में बंटे, दो उम्मीदवारों के बीच चांदनी चौक में कड़ी टक्कर
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अमर उजाला
विस्तार
लाल किला के ठीक सामने बसा चांदनी चौक अपनी हर गली-मुहल्ले में कई एतिहासिक यादों को समेटे हुए है। इसे देखने के लिए देश-दुनिया से पर्यटक यहां आते हैं। दिल्ली और आसपास की एरिया में बनने वाले हाथ के कारीगरों के सामान, कारीगरी वाले कपड़ों, साड़ी-चुन्नी, बेल्ट, चश्मे और पेन जैसी छोटी-छोटी घरेलू उपयोग की चीजों की बिक्री के लिए यह क्षेत्र पूरे देश में प्रसिद्ध है। यानी चांदनी चौक का इलाका बड़े व्यापारियों का गढ़ भी है और छोटे-छोटे कारीगरों, श्रमिकों और कुटीर उद्योग चलाकर अपना परिवार पालने वाले लोगों का बड़ा केंद्र भी। यही कारण है कि इस लोकसभा चुनाव में चांदनी चौक में सबसे बड़ा मुद्दा व्यापारियों की समस्या ही है।
चांदनी चौक के जिस भी व्यापारी से बात कीजिए, वह सबसे पहले जीएसटी की समस्या से व्यापारियों को हो रही परेशानी के बारे में बताएगा। व्यापारियों की शिकायत है कि जीएसटी के नए कानून आने के बाद उनका बड़ा समय जीएसटी भरने की औपचारिकताओं को निभाने में ही निकल जाता है। जीएसटी के कारण हर सामान के मूल्य में 10 से 30 फीसदी तक की वृद्धि हो गई है। अंतिम रूप से इसका पूरा भार सामान्य उपभोक्ताओं को चुकाना पड़ता है, लेकिन चीजों के महंगे हो जाने के कारण बिक्री घट गई है। इसका सीधा असर व्यापारियों को हुआ है। चांदनी चौक के व्यापारी जीएसटी से बहुत परेशान हैं, लेकिन मतदान के मामले में भाजपा और कांग्रेस के बीच बंटे हुए हैं।
दो बनिया उम्मीदवारों में टक्कर
भाजपा नेता हर्षवर्धन ने चांदनी चौक सीट से लगातार दो बार 2014 और 2019 में जीत दर्ज की। इस बार भाजपा ने यहां से व्यापारी नेता प्रवीण खंडेलवाल को प्रत्याशी बनाया है। व्यापारियों का संगठन चलाने के कारण वे इनके बीच काफी लोकप्रिय हैं। नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, भाजपा के मजबूत संगठन का उन्हें लाभ मिल रहा है। जबकि कांग्रेस उम्मीदवार जेपी अग्रवाल इस सीट से पहले भी तीन बार सांसद चुने जा चुके हैं। हर पार्टी कार्यकर्ता और हर व्यापारी से उनकी व्यक्तिगत जान-पहचान जेपी अग्रवाल की सबसे बड़ी ताकत है। यहां उनका पैतृक आवास है। बेहद शांत, सुलझे और सरल स्वभाव के जेपी अग्रवाल यहां के मतदाताओं से भी सीधे तौर पर जुड़े रहे हैं। माना जा रहा है कि यहां के लगभग 3.5 लाख मुस्लिम मतदाता यहां उनकी जीत की गारंटी बन सकते हैं। लेकिन बेहद कड़े मुकाबले में अभी यह कहना मुश्किल है कि बाजी किसके हाथ लगने वाली है।
व्यापारी ने बताया
लाल किला के सामने बने प्राचीन श्री गौरीशंकर मंदिर के सामने कपड़ों की थोक-फुटकर कपड़ों की दुकान चला रहे अनिल कुमार अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि जीएसटी व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गया है। ग्राहकों से जीएसटी वसूलने से लेकर इसे सरकार को भुगतान करने तक यह एक गंभीर समस्या बन चुका है। व्यापारी यही चाहता है कि जो भी सरकार आए, वह जीएसटी को सरल और सस्ता बनाने की कोशिश करे।
फूल विक्रेता मोड़ी ने बताया कि चांदनी चौक का विकास करने का श्रेय दिल्ली सरकार को ही जाता है। इससे चांदनी चौक की सामने वाली मुख्य सड़क बहुत अच्छी हो गई है। लेकिन अंदर की गलियां आज भी बेहद खराब हालत में हैं। हर गली में तारों का जाल बिछा हुआ है, जो हर पल किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित करता रहता है। वे चाहते हैं कि जो भी नेता चुनकर आए, वह इन इलाकों का विकास करने पर अपना ध्यान दे।
चांदनी चौक घूमने आए वरुण कुमार चंदेल ने कहा कि इस इलाके का विकास होने के बाद यहां घूमना ज्यादा आसान हो गया है। यहां पर शाम बिताना अच्छा लगता है। लेकिन चांदनी चौक का विकास यहां के व्यापारियों को परेशान भी करता है। राकेश कुमार ने अमर उजाला को बताया कि दिल्ली सरकार ने चांदनी चौक का विकास करते समय वाहनों के यहां आने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे ग्राहकों को यहां तक पहुंचने में परेशानी होने लगी है।
इसका सीधा असर यह हुआ है कि चांदनी चौक घूमने के लिए आने वाले लोगों की संख्या आधी भी नहीं रह गई है। यानी चांदनी चौक का जो विकास यहां का पर्यटन विकसित करने के लिए किया गया था, वही घरेलू पर्यटकों को यहां से दूर कर रहा है। हालांकि, बाहर से आने वाले पर्यटकों पर ज्यादा असर नहीं हुआ है।
मोदी ज्यादा अच्छे नेता
चांदनी चौक में लगभग एक साल से रिक्शा चला रहे राहुल ने अमर उजाला को बताया कि यहां काफी पर्यटक आते हैं। शाम के समय सबसे ज्यादा कमाई होती है। वे अपने रिक्शे का किराया चुकाने के बाद भी प्रतिदिन चार से पांच सौ रुपये कमा लेते हैं। उनका कहना है कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए सबसे बेहतर नेता हैं। वे गरीबों को राशन दे रहे हैं। आगे भी देश का विकास उन्हीं के हाथों से हो सकता है। इसलिए इस बार भी वे चाहते हैं कि भाजपा ही चुनाव जीते।