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कहानी चुनाव की: लोक-लाज में देश के पहले चुनाव में वोट नहीं डाल सकीं 28 लाख महिलाएं, EC ने इसलिए काटे लाखों नाम

Fri, 22 Mar 2024 06:33 AM IST
जलज मिश्रा आशीष चौरसिया, नई दिल्ली
आशीष चौरसिया, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 22 Mar 2024 06:33 AM IST
सार

मतदाता सूची तैयार करते वक्त निर्वाचन आयोग को अजीब समस्या का सामना करना पड़ा था। कुछ राज्यों में कई महिला मतदाताओं ने अपने नाम के बजाए परिवार के पुरुष सदस्यों के साथ अपने संबंधों के आधार पर पंजीकरण कराया था। मसलन, अमुक की बहन, मां और पत्नी।

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Election Story Due to public shame 28 lakh women not vote in country first election
मतदान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

यूं तो लोकसभा चुनाव को लेकर कई रोचक किस्से हैं, लेकिन एक किस्सा ऐसा भी है, जो महिलाओं के वजूद व उनकी पहचान से जुड़ा है। देश के पहले लोकसभा चुनाव में (1951-52) में लोक-लज्जा के चलते 28 लाख महिलाएं वोट नहीं डाल सकी थीं। दरअसल, मतदाता सूची तैयार करते वक्त निर्वाचन आयोग को अजीब समस्या का सामना करना पड़ा था। कुछ राज्यों में कई महिला मतदाताओं ने अपने नाम के बजाए परिवार के पुरुष सदस्यों के साथ अपने संबंधों के आधार पर पंजीकरण कराया था। मसलन, अमुक की बहन, मां और पत्नी। इस वजह से आयोग को 28 लाख महिला वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए विवश होना पड़ा था।

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प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन इस बात से खासे नाराज थे। उनके विचार में यह प्रथा अजीबोगरीब और मूर्खतापूर्ण थी। उन्होंने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए कि मतदाता सूची में सुधार करें। ऐसे मतदाताओं के नाम महिलाओं के नाम पर ही अंकित करें। तमाम कोशिशों के बावजूद 28 लाख से अधिक महिलाओं ने अपना नाम दर्ज नहीं कराया, जिससे वे मतदान नहीं कर सकीं। मगर, सुकुमार सेन का यह कदम भविष्य के लिए क्रांतिकारी साबित हुआ।

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नाम काटने पर सेन ने कहा अच्छा हुआ
महिला मतदाताओं के नामों को हटाने से जब हंगामा खड़ा हुआ, तो सेन ने कहा कि यह अच्छा ही हुआ। इससे लोगों में जागरूकता आएगी और अगले चुनाव तक लोग इस तरह की मूर्खतापूर्ण हरकतें नहीं करेंगे। इसका असर 1957 के चुनाव में देखने को मिला और मतदाता सूची में महिलाओं ने अपने खुद के नामों को पंजीकृत कराया।

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बिहार और यूपी में सबसे ज्यादा मामले
चुनाव आयोग के जनरल इलेक्शन 2019: एन एटलस के अनुसार, दूसरे के नाम पर पंजीकरण कराने के मामले बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और विंध्य प्रदेश में ज्यादा सामने आए। हालांकि, किस राज्य में इस तरह के कितने मामले आए, इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है।

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