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दरभंगा: मिथिलांचल की सांस्कृतिक राजधानी में चुनावी दांवपेच, BJP के गोपाल जी राजद के ललित यादव को दे रहे चुनौती

Thu, 09 May 2024 07:29 AM IST
शिव शरण शुक्ला भूपेंद्र कुमार
भूपेंद्र कुमार Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 09 May 2024 07:29 AM IST
सार

छह विधानसभा सीटों वाले इस संसदीय क्षेत्र में लगभग 16.20 लाख वोटर हैं। यहां ब्राह्मण, मुस्लिम और यादव वोट निर्णायक होते हैं। दरभंगा को ब्राह्मणों का गढ़ कहा जाता है। करीब साढ़े चार लाख वोटर ब्राह्मण हैं। नौ बार इस सीट से ब्राह्मण सांसद बने हैं। मुसलमान वोटरों की संख्या लगभग साढ़े तीन लाख है। यादव वोटर तीन लाख हैं। राजपूत और भूमिहार एक-एक लाख हैं।
 

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Darbhanga Ground Report: Election tactics in the cultural capital of Mithilanchal loksabha polls 2024
ग्राउंड रिपोर्ट। - फोटो : amar ujala

विस्तार

खाना, पान, पाग, मछली और आतिथ्य सत्कार के लिए विख्यात मिथिलांचल की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा कई कारणों से हाई प्रोफाइल सीट रही है। यह इलाका दरभंगा महाराज की वजह से विख्यात रहा। उन्हें एक समय देश का सबसे बड़ा जमींदार कहा जाता था। क्रिकेटर से राजनेता बने कीर्ति आजाद तीन बार भाजपा के टिकट पर दरभंगा सीट से सांसद रहे। उनका मुकाबला राजद के कद्दावर नेता अली अशरफ फातमी से होता था और तीनों बार ही जीत कीर्ति के खाते में गई। इन मुकाबलों को लोग आज भी याद करते हैं। हालांकि अब कीर्ति आजाद कांग्रेस में हैं और दरभंगा के चुनावी मुकाबले से दूर हैं। भाजपा ने मौजूदा सांसद गोपाल जी ठाकुर पर फिर दांव लगाया है। उन्होंने 2019 में राजद के कद्दावर नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी को ढाई लाख से अधिक वोटों से हराया था। गोपाल के सामने हैं राजद के ललित यादव। मुस्लिम और यादव वोटों के बूते वे भाजपा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पिछले चुनाव में यादव मतों में बिखराव के चलते राजद प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा था। ललित यादव दरभंगा ग्रामीण विधानसभा सीट से छह बार विधायक रहे हैं, पहली बार 1995 में जीते थे। 2022 में नीतीश कैबिनेट में मंत्री भी रहे। दिलचस्प यह कि इस सीट से जीतने वालों को केंद्र में मंत्री पद भी मिलता रहा है।

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इस संसदीय सीट के ज्यादातर लोग शहर में ट्रैफिक से परेशान हैं और इससे निजात चाहते हैं। खासकर, जहां भी रेलवे लाइन है, वहां लेवल क्रॉसिंग पार करना भारी मशक्कत का काम है। बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए रोगियों को पटना ले जाना पड़ता है। लोग यहां एम्स की तरह मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल चाहते हैं। हवाई अड्डा बना है, पर अभी फ्लाइट ज्यादा नहीं हैं। दरभंगा के खंडहरनुमा किले के पास मिठाई सप्लाई का काम करने वाले महेश मिले, मगर चुनाव को लेकर उत्साहित नहीं दिखे। वहीं, चाय की दुकान पर बैठे व्यापारी जयकृष्ण सहनी कहते हैं, भाजपा ने अच्छा काम किया है, मोदी ने राम मंदिर बनवाया। हमें और क्या चाहिए।
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छह विधानसभा सीटों वाले इस संसदीय क्षेत्र में लगभग 16.20 लाख वोटर हैं। यहां ब्राह्मण, मुस्लिम और यादव वोट निर्णायक होते हैं। दरभंगा को ब्राह्मणों का गढ़ कहा जाता है। करीब साढ़े चार लाख वोटर ब्राह्मण हैं। नौ बार इस सीट से ब्राह्मण सांसद बने हैं। मुसलमान वोटरों की संख्या लगभग साढ़े तीन लाख है। यादव वोटर तीन लाख हैं। राजपूत और भूमिहार एक-एक लाख हैं।
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महापंडितों की भूमि रही है दरभंगा
प्राचीन काल से यह क्षेत्र महापंडितों का जन्म स्थान रहा है। कुमारिल भट्ट, मंडन मिश्र, गदाधर पंडित, शंकर, वाचस्पति मिश्र, विद्यापति, नागार्जुन जैसी शख्सियतें यहां की पहचान हैं। दरभंगा दो शब्दों से बना है, द्वार-बंग। संस्कृत में द्वार का मतलब दरवाजा, यानी बंगाल का दरवाजा। फारसी में इसे दर-ए-बंग कहते थे। यह भी माना जाता है कि इस शहर को मुगल काल में दरभंगी खान ने बसाया था। शहर बागमती नदी के किनारे बसा हुआ है।

रोचक रहा है सीट का इतिहास

  • 1952 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के अब्दुल जलील पहली बार सांसद बने। 1957 से 1972 तक कांग्रेस का कब्जा रहा। 1972 में दिग्गज कांग्रेसी नेता ललित नारायण मिश्र जीते थे। 1977 में जनता पार्टी के सुरेंद्र झा सांसद बने। 1980 में यह सीट कांग्रेस के हरिनाथ मिश्रा ने जीती। 1984 में लोकदल के विजय मिश्र यहां से जीते।
  •  1989 में जनता दल के शकीलुर्रहमान जीते तो 1991 और 96 में जनता दल से फातमी जीते। 1998 में वे राजद के टिकट पर जीते। 
  • 1999 में कीर्ति आजाद ने पहली बार भाजपा के लिए यह सीट जीती। 2004 में फिर राजद से फातमी जीते। 2009 और 2014 में भाजपा से आजाद फिर जीते। लोग आज भी इन हाई प्रोफाइल मुकाबलों को याद करते हैं।

दोनों प्रत्याशियों का एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप
राजद प्रत्याशी ललित यादव कहते हैं कि दरभंगा के विकास में सबसे बड़े बाधक तो निवर्तमान भाजपा सांसद ठाकुर ही हैं। उन्होंने तो निर्माण स्थल पर धरना-प्रदर्शन तक करवा दिया। वे तो पांच ऐसे काम तक नहीं गिना सकते जो उन्होंने किए हों। अगर महागठबंधन की सरकार बनी तो एक माह के अंदर एम्स का काम शुरू करवाने का वादा है।  वहीं, भाजपा प्रत्याशी गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि हमने दरभंगा में एयरपोर्ट बनवाया, अब लोग डेढ़ घंटे में दिल्ली मुंबई बंगलुरू से यहां पहुंच सकते हैं। लेकिन एम्स का राजद ने अटका दिया। सीएम नीतीश कुमार तैयार थे, पर तब सरकार से राज जुड़ गया था। अब नतीजों के बाद एम्स ही प्राथमिकता है। 
 

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