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BJP First List: कमजोर सीटों पर प्रत्याशी उतारकर भाजपा ने पूर्वांचल में बनाई बढ़त, ऐसे साधेंगे जातीय समीकरण!
Sun, 03 Mar 2024 08:47 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 03 Mar 2024 08:47 AM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कमजोर सीटों पर प्रत्याशी उतारकर भाजपा ने बढ़त बना ली है। ब्राहमण, राजपूत और यादव चेहरे के जरिए जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश की गई है। जौनपुर और आजमगढ़ में परिणाम पक्ष में लाने की कवायद की है। चंदौली में जीत का अंतर बढ़ाने की चुनौती होगी।
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BJP First List
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी सीट के साथ ही चंदौली, आजमगढ़ और जौनपुर सीट पर भी प्रत्याशियों की घोषणा कर भाजपा ने विपक्ष पर बढ़त बनाने की कोशिश की है। जौनपुर और आजमगढ़ उन सीटों में शुमार है, जहां परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं आए थे।
चंदौली में भी कांटे के मुकाबले में केंद्रीय मंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय महज 13 हजार मतों से ही जीत कर पाए थे। चंदौली लोकसभा क्षेत्र में वाराणसी जिले की अजगरा और शिवपुर सीट ही इस जीत का आधार बना था।
इन सीटों पर प्रत्याशियों के जरिये भाजपा ने जातीय समीकरण भी साधने की पूरी कोशिश की है। इसमें चंदौली से ब्राहमण, जौनुपर से राजपूत और आजमगढ़ से यादव चेहरे उतारकर भाजपा ने पूर्वांचल के मतदाताओं में सभी वर्ग को संदेश दिया है।
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दरअसल, वर्ष 2014 में प्रचंड मोदी लहर में सपा ने अपने मजबूत गढ़ आजमगढ़ को बचाने के लिए सपा मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव को मैदान में उतारा था। यही कारण है कि पूर्वांचल की सभी सीट पर विजय प्राप्त करने के बाद भी आजमगढ़ में भाजपा को मनमाफिक परिणाम नहीं मिल पाया।
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चंदौली में भी कांटे के मुकाबले में केंद्रीय मंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय महज 13 हजार मतों से ही जीत कर पाए थे। चंदौली लोकसभा क्षेत्र में वाराणसी जिले की अजगरा और शिवपुर सीट ही इस जीत का आधार बना था।
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इन सीटों पर प्रत्याशियों के जरिये भाजपा ने जातीय समीकरण भी साधने की पूरी कोशिश की है। इसमें चंदौली से ब्राहमण, जौनुपर से राजपूत और आजमगढ़ से यादव चेहरे उतारकर भाजपा ने पूर्वांचल के मतदाताओं में सभी वर्ग को संदेश दिया है।
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दरअसल, वर्ष 2014 में प्रचंड मोदी लहर में सपा ने अपने मजबूत गढ़ आजमगढ़ को बचाने के लिए सपा मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव को मैदान में उतारा था। यही कारण है कि पूर्वांचल की सभी सीट पर विजय प्राप्त करने के बाद भी आजमगढ़ में भाजपा को मनमाफिक परिणाम नहीं मिल पाया।
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वर्ष 2019 में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस सीट पर जीत हासिल कर अपना कब्जा बरकरार रखा। हालांकि विधानसभा 2022 में अखिलेश यादव के इस सीट को छाेड़ने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने इसे सपा से छीन लिया।
अब भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को लगातार तीसरी बार टिकट देकर इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखना चाहती है। ऐसे ही मुंबई की सियासत के माहिर खिलाड़ी और महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री रहे कृपा शंकर सिंह को जौनपुर के सियासी समर में उतारा है।
कारण, वर्ष 2019 में भाजपा प्रत्याशी केपी सिंह लाख प्रयास के बाद भी जीत से दूर रह गए थे। जबकि वर्ष 2014 में यह सीट केपी सिंह के पास ही थी।
जौनपुर की एक बड़ी आबादी मुंबई से जुड़ी होने और स्थानीय स्तर पर बढि़या पकड़ रखने वाले कृपा शंकर सिंह के जरिये भाजपा ने दांव चला है। कृपा शंकर सिंह दो वर्ष पहले ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे, मगर उनकी मजबूत पकड़ के चलते उन्होंने तमाम दावेदारों को पछाड़ा है। जौनपुर में पिछले परिणाम को बदलने की चुनौती उनके सामने होगी।
विपक्ष के सामने अब चक्रव्यूह भेदने की चुनौती
कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन में वाराणसी सीट कांग्रेस के खाते में है। ऐसे में यहां पीएम मोदी के सामने प्रत्याशी चयन करना बड़ी चुनौती है। साथ ही आजमगढ़ में निरहुआ के जरिये भाजपा ने मजबूत चेहरा उतारा है। भोजपुरी स्टार के सामने सपा के प्रत्याशी का इंतजार होगा। ऐसे ही चंदौली और जौनपुर में भी विपक्ष के सामने मजबूत रणनीति तय करने की चुनौती होगी।
कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन में वाराणसी सीट कांग्रेस के खाते में है। ऐसे में यहां पीएम मोदी के सामने प्रत्याशी चयन करना बड़ी चुनौती है। साथ ही आजमगढ़ में निरहुआ के जरिये भाजपा ने मजबूत चेहरा उतारा है। भोजपुरी स्टार के सामने सपा के प्रत्याशी का इंतजार होगा। ऐसे ही चंदौली और जौनपुर में भी विपक्ष के सामने मजबूत रणनीति तय करने की चुनौती होगी।