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Hisar Lok Sabha: यहां ससुर और दो बहुएं पेश कर रहीं दावेदारी, कांग्रेस के जेपी का भी हिसार से पुराना रिश्ता

Fri, 17 May 2024 05:56 AM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 17 May 2024 05:56 AM IST
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सार
Seat Ka Samikaran: लोकसभा चुनावों में हरियाणा की हिसार सीट चर्चा में है। यह सीट चौधरी देवीलाल के परिवार के लिए विरासत पर दावेदारी की लड़ाई बन चुकी है। अमर उजाला की खास चुनावी सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में जानते हैं यहां का पूरा सियासी गणित... 
 
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Hisar Parliamentary Seat Profile History And Political Equation
हिसार सीट - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

नैना चौटाला, उम्मीदवार जननायक जनता पार्टी सीट हिसार; सुनैना चौटाला उम्मीदवार इंडियन नेशनल लोकदल सीट हिसार; रणजीत सिंह चौटाला उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी सीट हिसार। हरियाणा की यह लोकसभा सीट चौधरी देवीलाल के परिवार के लिए विरासत पर दावेदारी की लड़ाई बन चुकी है। जाट बहुल इस सीट पर कांग्रेस ने जयप्रकाश जेपी को उम्मीदवार बनाया है। इस वजह से यहां चारों प्रमुख दलों के प्रत्याशी जाट हो गए हैं।   

 
हमारी खास पेशकश ‘सीट का समीकरण’ में आज इसी हिसार सीट की बात करेंगे। इसके चुनावी इतिहास की बात करेंगे। बात करेंगे यहां से जीते उम्मीदवारों की, पिछले चुनाव में इस सीट पर क्या हुआ था? इस बार कैसे समीकरण बन रहे हैं? चौटाला परिवार का इस सीट पर कैसा प्रदर्शन रहा है? क्या पहले भी चौटाला परिवार के सदस्य आमने-सामने हुए हैं? ये भी जानेंगे…


पहले हिसार सीट के बारे में 
हरियाणा से लोकसभा के 10 सांसद चुने आते हैं। इन 10 लोकसभा सीटों में से एक हिसार भी है। साल 1951-52 में देश के पहले आम चुनाव हुए तब हिसार नाम से लोकसभा सीट अस्तित्व में आ चुकी थी। हिसार लोकसभा क्षेत्र नौ विधानसभा क्षेत्रों में बंटा हुआ है। इनमें जींद जिले की एक विधानसभा उचाना कलां, भिवानी जिले की एक विधानसभा बवानी खेड़ा और सात विधानसभा क्षेत्र हिसार जिले के आदमपुर, उकलाना, नारनौंद, हांसी, बरवाला, हिसार और नलवा आते हैं। हिसार लोकसभा क्षेत्र में लगभग 18 लाख मतदाता हैं। इनमें से महिलाओं की संख्या 46 प्रतिशत है। महिलाओं की इतनी अधिक आबादी के बावजूद आज तक इस लोकसभा सीट से तीन ही महिलाओं ने अपनी किस्मत आजमाई है और वह भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में। इस बार दो और महिलाएं क्षेत्रीय पार्टियों की तरफ से चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रही हैं। आज तक किसी भी राष्ट्रीय पार्टी ने हिसार लोकसभा क्षेत्र से महिला को टिकट नहीं दिया है। 57 साल के इतिहास में पहली बार है कि इस लोकसभा क्षेत्र से दो महिलाएं किसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।

पहला चुनाव कांग्रेस जीती
1951-52 में हुए पहले आम चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली। पार्टी के उम्मीदवार अचिंत राम ने निर्दलीय उतरे हरदेव सहाय को 29,971 वोट से शिकस्त दी थी।

साल 1957 में देश के दूसरे आम चुनाव हुए। इस चुनाव में हिसार सीट पर कांग्रेस के ठाकर दास भार्गव जीते। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार नेत राम को 85,244 वोट से हराया था।

1962 में लोकसभा चुनाव में हिसार में सोशलिस्ट पार्टी को जीत मिली। सोशलिस्ट पार्टी के मणि राम बागरी ने कांग्रेस उम्मीदवार घमंडी लाल को 27,233 वोट से हरा दिया। 

1967 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के आर. किशन जीते। चुनाव में उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के मणि राम बागरी को 7,179 वोट से हराया था।

1971 में लोकसभा चुनाव में हिसार में कांग्रेस के मणि राम गोदारा ने जीत का परचम लहराया। इस चुनाव में उन्होंने  संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी मणि राम बागरी को 83,694 वोट से हरा दिया।  

आपातकाल के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को मिली हार
साल 1977, आपातकाल के बाद देश में चुनाव होते हैं। इस चुनाव में भारतीय लोकदल के टिकट पर मैदान में उतरे इंदर सिंह जीत दर्ज की। इंदर ने कांग्रेस उम्मीदवार जसवंत सिंह को 2.43 लाख मतों से शिकस्त दी। 

तीन साल बाद देश में मध्यावधि चुनाव हुए। इस बार हिसार का मुकाबला दिलचस्प था क्योंकि दो प्रमुख उम्मीदवार एक ही नाम के थे। जनता पार्टी में टूट के बाद बने धड़े जनता पार्टी (सेकुलर) ने मणि राम बागरी पुत्र हरजी राम को अपना के उम्मीदवार बनाया। वहीं, इंडियन नेशनल कांग्रेस (आई) का चेहरा थे मणि राम पुत्र रामजस। इस चुनाव में जनता पार्टी (सेकुलर) के प्रत्याशी 92,711 वोटों से जीत दर्ज करने में सफल रहे। 

1984 के लोकसभा चुनाव में हिसार से कांग्रेस को सफलता मिली। सहानुभूति लहर पर सवार होकर कांग्रेस सत्ता में आई, जिसमें हिसार में मिली जीत भी शामिल थी। यहां कांग्रेस के प्रत्याशी चौधरी बीरेंद्र सिंह ने लोक दल के टिकट पर उतरे ओम प्रकाश चौटाला को 51,206 वोटों से शिकस्त दी।

जय प्रकाश को मिली जीत
1989 के लोकसभा चुनाव में हिसार में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इस बार जनता दल के उम्मीदवार जय प्रकाश ने कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह को 44,679 मतों से हरा दिया। 

दो साल बाद 1991 में देश में लोकसभा चुनाव हुए। हिसार में जनता पार्टी को हराकर कांग्रेस ने फिर वापसी की। कांग्रेस के नारायण सिंह ने जनता पार्टी की तरफ से उतरे जय प्रकाश को 26,194 वोट से हरा दिया। 

1996 के लोकसभा चुनाव में हिसार में जय प्रकाश ने वापसी की। हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर उतरे जय प्रकाश ने समता पार्टी के प्रत्याशी गौरी शंकर को 1,74,652 मतों से हराया। 

1998 के लोकसभा चुनाव में हिसार में हरियाणा लोक दल (राष्ट्रीय) पार्टी को सफलता मिली। पार्टी के उम्मीदवार सुरेंदर सिंह बरवाला ने हरियाणा विकास पार्टी के ओम प्रकाश जिंदल को 80,491 वोटों से हराया। कांग्रेस के टिकट पर उतरे रणजीत सिंह चौटाला इस चुनाव में अपनी जमानत तक नहीं बचा सके और चौथे नंबर पर खिसक गए। वहीं, समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) के टिकट पर उतरे जयप्रकाश जेपी को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। 

1998 के बाद 1999 में देश में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में भी सुरेंदर सिंह बरवाला को सफलता मिली लेकिन इस बार वह इंडियन नेशनल लोक दल के टिकट पर चुनाव मैदान में थे। इस बार बरवाला ने कांग्रेस नेता बीरेंद्र सिंह को 1,60,452 वोटों से हरा दिया। 

2004 चुनाव में सुरेंदर सिंह बरवाला की जीत का रथ रुक गया। इस बार हिसार में कांग्रेस के टिकट पर उतरे जय प्रकाश जेपी को सफलता मिली। उन्होंने इंडियन नेशनल लोक दल के प्रत्याशी सुरेंदर सिंह बरवाला को 1,82,836 वोटों से हरा दिया। 

पूर्व सीएम भजन लाल को मिली जीत
अब आती है 2009 के लोकसभा चुनाव की बारी। इस बार हरियाणा जनहित कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल और इंडियन नेशनल लोक दल से संपत सिंह आमने-सामने थे। इस चुनाव में भजन लाल को 6,983 वोटों से जीत मिली। 

2014 में दो दिग्गजों परिवारों की लड़ाई
2014 में हिसार की सियासी लड़ाई दो बड़े राजनीतिक परिवारों के बीच की थी। इंडियन नेशनल लोक दल के टिकट पर ओम प्रकाश चौटाला के पोते और पूर्व उप-प्रधानमंत्री देवीलाल के परपोते दुष्यंत चौटाला उतरे थे। वहीं दूसरी ओर हरियाणा जनहित कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई थे। इस चुनाव में जीत दुष्यंत चौटाला को मिली और उनकी यह जीत 31,847 वोटों की थी। 

बृजेंद्र सिंह और बीरेंद्र सिंह
बृजेंद्र सिंह और बीरेंद्र सिंह - फोटो : फाइल
2019 में पहली बार खिला कमल 
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हिसार सीट पर पहली बार जीत दर्ज की। भाजपा की टिकट पर उतरे चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह ने भाजपा को यह जीत दिलाई। भाजपा उम्मीदवार ने नई नवेली जननायक जनता पार्टी से उतरे दुष्यंत चौटाला को 3,14,068 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी।

रणजीत सिंह। नैना चौटाला। सुनैना चौटाला।
रणजीत सिंह। नैना चौटाला। सुनैना चौटाला। - फोटो : @Ch_RanjitSingh@nainachautala@SunainaChautala
इस बार चौटाला परिवार के तीन सदस्य आमने-सामने 
अब बात 2024 के चुनाव की कर लेते हैं। हरियाणा की हिसार सीट पर मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया है।  चौटाला परिवार के तीन सदस्यों के साथ पूर्व सांसद जयप्रकाश जेपी यहां कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं।  भाजपा ने हिसार से चौधरी देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला को मैदान में उतारा है। रणजीत अभी रानियां विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक हैं। हाल ही में वह भाजपा में शामिल हुए थे जिसके बाद उन्हें हिसार सीट से मैदान में उतार दिया गया है। 

इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने सुनैना चौटाला को मैदान में उतारा है। सुनैना इनेलो की महिला विंग की प्रधान महासचिव हैं। रणजीत चौटाला सुनैना चौटाला के रिश्ते में चाचा सुसर हैं।

जननायक जनता पार्टी ने हिसार सीट से ओम प्रकाश चौटाला की बहू नैना चौटाला को मैदान में उतारा है। पूर्व उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की मां नैना अभी राज्य की बाढड़ा सीट से विधायक हैं। 

कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता जय प्रकाश जेपी पर दांव लगाया है। पहले अटकलें थीं कि पार्टी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले मौजूदा सांसद बृजेंद्र सिंह को टिकट दे सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 

पहले भी आमने-सामने रहा चौटाला परिवार
यह पहला मौका नहीं है जब चौटाला परिवार के सदस्य आमने-सामने हैं। इससे पहले  2000 के विधानसभा चुनाव में रोड़ी विधानसभा सीट से ओमप्रकाश चौटाला इनेलो और रणजीत सिंह चौटाला कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर आमने-सामने थे। इस चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला को जीत मिली थी। इसी तरह 2009 के विधानसभा चुनाव में डबवाली सीट पर इनेलो के अजय सिंह चौटाला के सामने उनके चचेरे भाई रवि चौटाला निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर आमने-सामने लड़े, जिसमें अजय सिंह चौटाला जीते थे।

नैना चौटाला को इसलिए उतारा
इस समय किसान जजपा के प्रति आक्रोशित हैं। ऐसे में दुष्यंत चौटाला उनके आक्रोश का शिकार नहीं बनना चाहते हैं। राजनीति में लंबे भविष्य को देखते हुए दुष्यंत ने इस लोकसभा चुनाव के बजाय विधानसभा चुनाव पर फोकस शुरू कर दिया है। हिसार लोकसभा सीट पर दुष्यंत चौटाला 2014 में इनेलो के टिकट से सांसद बन चुके हैं। 2019 के बाद वह जजपा के प्रत्याशी के तौर पर भी चुनाव मैदान में उतरे थे। वे पिछली दस साल में तैयार सियासी जमीन को छोड़ना नहीं चाहते। इस कारण उन्होंने परिवार के सदस्य को यहां उतार कर अपनी मजबूत दावेदारी दिखाने का प्रयास किया है। जजपा के हिसार के तीन विधायकों में से दो बागी हो चुके हैं। ऐसे में हिसार लोकसभा सीट पर नैना चौटाला से मजबूत कोई चेहरा जजपा में नजर नहीं आ रहा था। नैना चौटाला का मायका आदमपुर के गांव दड़ौली में है। वहीं, सुनैना चौटाला का मायका हिसार जिले के उकलाना के दौलतपुर गांव में है। 

इस तरह से हिसार में सियासी बिसात बिछ चुकी है, चुनावी चौसर का खेल जारी है, अब देखना है कि 4 जून को बाजी कौन मारता है।
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