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Hindi News ›   Election ›   Election 2024: North East Delhi Parliamentary Seat Profile History And Political Equation

North East Delhi: ऐसा है उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट का इतिहास, कन्हैया या मनोज तिवारी इस बार कौन मारेगा मैदान?

Fri, 10 May 2024 06:17 AM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 10 May 2024 06:17 AM IST
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सार
North East Delhi Seat: उत्तर पूर्वी दिल्ली नाम से लोकसभा सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। इससे पहले उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट का काफी हिस्सा पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट में आता था। 
 
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Election 2024: North East Delhi Parliamentary Seat Profile History And Political Equation
लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

इस लोकसभा चुनाव में कई ऐसी सीटें हैं जहां सबकी नजरें हैं। ऐसी ही एक सीट है राजधानी दिल्ली की उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट। वर्तमान में यहां भाजपा से भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी सांसद हैं। इस बार भी भाजपा ने मनोज तिवारी को उत्तर पूर्वी दिल्ली से अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने उनके सामने जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को मैदान में उतारा है।  पूर्वांचल और बिहार से आने वाले दो चर्चित चेहरों के यहां से उतरने के कारण मुकाबला दिलचस्प हो गया है।  


हमारी खास पेशकश ‘सीट का समीकरण’ में आज इसी उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट की बात करेंगे। इसके चुनावी इतिहास की बात करेंगे। बात करेंगे यहां से जीते उम्मीदवारों की, पिछले चुनाव में इस सीट पर क्या हुआ था? इस बार कैसे समीकरण बन रहे हैं? ये भी जानेंगे…


पहले उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट के बारे में 
दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से एक उत्तर पूर्वी दिल्ली भी है। उत्तर पूर्वी दिल्ली नाम से लोकसभा सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। इस लोकसभा सीट के अंतर्गत 10 विधानसभा क्षेत्र आते है, जिनमें बुराड़ी, तिमारपुर, सीमापुरी (एससी), रोहतास नगर, सीलमपुर, घोंडा, बाबरपुर, गोकलपुर (एससी), मुस्तफाबाद और करावल नगर शामिल हैं। इससे पहले उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट का काफी हिस्सा पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट में आता था, जो 1967 में अस्तित्व में आई थी। 

परिसीमन के बाद 2009 में हुए पहले चुनाव में उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट पर कांग्रेस को जीत मिली। पार्टी के उम्मीदवार जय प्रकाश अग्रवाल ने भाजपा के बीएल शर्मा प्रेम को शिकस्त दी। कांग्रेस ने यह चुनाव 2.22 लाख वोटों से जीता था। जय प्रकाश अग्रवाल को 5,18,191 वोट जबकि बीएल शर्मा प्रेम को 2,95,948 वोट मिले थे। 

2014 में भाजपा ने जीता मुकाबला 
अब बारी थी 2014 के लोकसभा चुनाव की, देश के ज्यादातर हिस्सों में भाजपा को जीत मिलती है। भाजपा के इन सफलताओं में उत्तर पूर्वी दिल्ली समेत दिल्ली की सभी सात सीटें भी शामिल थीं। इस चुनाव में भाजपा ने भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी को यहां से अपना उम्मीदवार बनाया था। मनोज तिवारी ने भाजपा के टिकट पर अपनी किस्मत आजमाई और प्रतिद्वंद्वी आप उम्मीदवार आनंद कुमार को 1,44,084 वोटों से हराया। भाजपा उम्मीदवार को 5,96,125 वोट मिले। वहीं, आप के प्रत्याशी को 4,52,041 वोट मिले। 
 

2019 में भी भाजपा को फिर मिली सफलता
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर दिल्ली की सभी सात सीटों पर जीत हासिल की। इनमें उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट की जीत भी शामिल रही। इस चुनाव में मुकाबला था भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बीच। नतीजे सामने आए तो उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट पर मनोज ने कांग्रेस की शीला दीक्षित को 3,66,102 के विशाल अंतर से हराया। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 7,87,799 वोट मिले। कांग्रेस के उम्मीदवार को 4,21,697 वोट मिले। वहीं, आप इस सीट पर जमानत भी नहीं बचा पाई। आप के दिलीप पांडेय को 1,90,856 वोट से संतोष करना पड़ा।
 

इस बार का मुकाबला हुआ दिलचस्प 
अब बात 2024 के चुनाव की कर लेते हैं। इस बार भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर मौजूदा सांसद मनोज तिवारी लगातार तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं। वहीं, आप और कांग्रेस गठबंधन की तरफ से कन्हैया कुमार उम्मीदवार हैं। जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष रहे कन्हैया सितंबर 2021 में माकपा छोड़कर कांग्रेस में आए थे। 2019 में कन्हैया ने बिहार की बेगूसराय सीट पर भाजपा के गिरिराज सिंह के सामने चुनाव लड़ा था जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।  इस चुनाव में कन्हैया ने बेगूसराय की बजाय उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया है।
 

इस बार के मुद्दे 
देश की सबसे घनी बसावट वाले उत्तर- पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र में लोगों की जिंदगी ठहर सी गई है। कई इलाकों में अब तक विकास की रोशनी नहीं पहुंच सकी है, जबकि देश की संसद से यह महज दस किमी दूर है। आपको हैरानी हो सकती है, लेकिन कई काॅलोनियों में मकानों के दरवाजे बदबू फेंकते नालों के सामने खुलते हैं। करीब तीन लाख की आबादी वाले सोनिया विहार को ही लें, गर्मी में भी यहां की गलियां गंदे पानी में डूबी हैं।

अपनी दैनिक परेशानियों के बावजूद लोगों की चुनावों पर गहरी नजर है। सियासी सरगर्मी पर अपनी बदहाली का जिक्र करने के बाद असलम प्रधान बड़े चाव से सियासत पर चर्चा करते हैं। उनका भी मानना है कि भाजपा के मनोज तिवारी के सामने कांग्रेस के कन्हैया कुमार के आने से लड़ाई कांटे की हो गई है। जबकि अभी तक चुनाव एकतरफा लग रहा था। दोनों प्रत्याशियों की अपनी-अपनी खूबी और खामी है। अच्छा वक्ता होने के साथ कन्हैया युवाओं के बीच पसंद किए जाते हैं। जबकि मनोज तिवारी की पूर्वांचली समाज में गहरी पैठ है।

किसी की राह नहीं आसान...
बीते लोकसभा चुनाव 2019 में मनोज तिवारी को 54 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस और आप को मिलाकर 42 फीसदी वोट मिले थे। इस बार दोनों दल गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हैं। दो पार्टियों के वोट मिलाने के बाद भी जो वोट प्रतिशत का अंतर है उसे पाटना कन्हैया कुमार के लिए बड़ी चुनौती है।  उधर, दो बार से सांसद रहे मनोज तिवारी को भी अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना आसान नहीं होगा। हालांकि, उनकी पत्नी क्षेत्र में घूमकर नाराजगी को पाटने में जरूर जुटी हुई हैं।
 

संसदीय क्षेत्र में धर्म, जाति व वर्ग का समीकरण:
मुस्लिम-21.50 फीसदी
पिछड़ा वर्ग-21 फीसदी
ब्राह्मण-18 फीसदी
अनुसूचित जाति-17 फीसदी
गुर्जर-5.50 फीसदी
वैश्य-5 फीसदी
पंजाबी-5 फीसदी
जाट-4 फीसदी
(नोट: राजनीतिक दलों की तरफ से जुटाए गए अनुमानित आंकड़े)

विधानसभा में काम करने वाले फैक्टर
बुराड़ी, करावल नगर : पूर्वांचली व उत्तराखंड फैक्टर।
बुराड़ी, करावल नगर, घोंडा, और रोहतास नगर : ब्राह्मण फैक्टर।
सीलमपुर, मुस्तफाबाद, गोकलपुरी, सीमापुरी : मुस्लिम बहुल।
सीमापुरी व तिमारपुर : झुग्गी बस्ती का बाहुल्य।
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