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Delhi Cantt Assembly Seat: क्या दिल्ली कैंट में आप लगाएगी चौका या भाजपा करेगी वापसी? वीरेंद्र और भुवन में जंग

Tue, 04 Feb 2025 07:18 AM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Tue, 04 Feb 2025 07:18 AM IST
सार

Delhi Cantt Seat: दिल्ली विधानसभा चुनाव में दिल्ली कैंट सीट पर भी मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है। इस सीट पर कांग्रेस ने सिर्फ एक बार जीत दर्ज की है। तीन बार यहां से भाजपा और तीन बार आप ने जीत दर्ज की है।

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Delhi Assembly Election 2025 delhi cantt Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में विधानसभी चुनावों के चुनाव प्रचार खत्म हो गया है। अब 5 फरवरी को वोटिंग के बाद 8 फरवरी को नतीजे आएंगे। सीट पर लगातार सभी पार्टियों की नजर बनी हुई है। इस सीट से वर्तमान में आप के वीरेंद्र सिंह कादियान विधायक हैं। दिल्ली कैंट सीट नई दिल्ली लोकसभा सीट के अंदर आती है।  इस सीट पर इस बार कुल 79667 मतदाता वोट डालने के लिए पात्र हैं। इनमें से 44270 पुरुष और 35395 महिलाएं हैं, बाकि 2 अन्य मतदाता है। 

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में दिल्ली कैंट में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। इसके बाद दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। फिर दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था, जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला।

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कैसा है दिल्ली कैंट का चुनावी इतिहास 
1972 में इस सीट पर सबसे पहले चुनाव हुए। कांग्रेस के ब्रिज लाल दुआ ने भारतीय जन संघ के देव राज सूद को 7509 वोट से हराया। 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

1993: भाजपा के करण सिंह तंवर की जीत  
दिल्ली के विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में विधानसभा के चुनाव हुए। इस सीट पर भाजपा के करण सिंह तंवर ने कांग्रेस के किरण चौधरी को 8869 वोट से हराया। 

1998: कांग्रेस की किरण चौधरी की जीत
1998 में मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच देखने को मिला। कांग्रेस की किरण चौधरी ने भाजपा के करण सिंह तंवर को 2626 वोट से हरा दिया था। 

2003: भाजपा के करण सिंह तंवर एक बार फिर जीते  
2003 में फिर से भाजपा ने सीट पर कब्जा कर लिया था। भाजपा के करण सिंह तंवर ने कांग्रेस के किरण चौधरी को 3766 वोट से हरा दिया था। 

2008: भाजपा के करण सिंह तंवर की तीसरी जीत 
2008 में सीट पर फिर से भाजपा ने जीत दर्ज की। भाजपा के करण सिंह तंवर ने कांग्रेस के अशोक आहूजा को 7261 वोट से हरा दिया था। 

 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2013: आप के सुरेंद्र सिंह को मिली जीत
इस साल दिल्ली कैंट सीट से आप को जीत मिली। आप के सुरेंद्र सिंह ने भाजपा के करण सिंह तंवर को 355 वोट से हराया। सुरेंद्र सिंह भारतीय सेना के सैनिक थे। 

2015: फिर से सुरेंद्र सिंह की जीत 
दिल्ली कैंट सीट पर एक बार फिर से सुरेंद्र सिंह ने ही जीत दर्ज की। आप के सुरेंद्र सिंह ने भाजपा के करण सिंह तंवर को 11253 वोट से हराया। आप को 40133 और भाजपा को 28935 वोट मिले थे। 

 2020: आप के वीरेंद्र सिंह कादियान जीते 
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। दिल्ली कैंट की बात करें तो इस सीट पर आप ने मौजूदा विधायक का टिकट काटकर वीरेंद्र सिंह कादियान को टिकट दिया। उन्होंने भाजपा के मनीष सिंह को 10,590 वोट से हराया। आप को 28971 और भाजपा को 18381 वोट मिले। 

अबकी बार कैसे है समीकरण? 
2025 में दिल्ली में होने वाले चुनावों में आप ने दिल्ली कैंट से मौजूदा विधायक वीरेंद्र सिंह कादियान को टिकट दिया है। भाजपा ने भुवन तंवर और कांग्रेस ने प्रदीप कुमार उपमन्यु को मैदान में उतारा है। 

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