Year Ender 2021: शिक्षा क्षेत्र में कईं बदलाव से भरा रहा 2021, ऑनलाइन शिक्षा के मजबूतीकरण पर हुआ काम
देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू हो गई है, अब धीरे-धीरे इसको योजनाबद्ध तरीके से विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2021 में ई-लर्निंग को और भी ज्यादा प्राथमिकता देते हुए नए संकल्प सरकार द्वारा लिए गए। नवाचार के माध्यम से डिजिटल शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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विस्तार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत रूचि के अनुसार छात्र अपने पाठ्यक्रमों का चयन कर सकते हैं। अब धीरे-धीरे एनईपी को देश के राज्यों में भी राज्य सरकारें लागू कर रही हैं। 2021 वर्ष में ज्यादातर समय ऑनलाइन शिक्षण प्रणाली से ही कक्षाओं का संचालन हुआ, फिर चाहे वह स्कूल शिक्षा हो या उच्च शिक्षा हो। अप्रैल-मई 2021 में आई कोरोना की दूसरी लहर के बाद स्कूल और कॉलेज में शिक्षण प्रणाली को बदलने पर ध्यान दिया गया। ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था पर काफी जोर देकर, डिजिटल शिक्षा में नवाचार के माध्यम से छात्रों को शिक्षा प्राप्त करवाई गई। वहीं, शिक्षा मंत्रालय की तरफ से भी पूरे वर्ष छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इस पर कई नीतियां तैयार की गई।
योजनाबद्ध तरीके से लागू हो रहा है एनईपी
मध्य प्रदेश और कर्नाटक में 2021 में एनईपी को लागू कर दिया गया है। वहीं, शिक्षा मंत्रालय द्वारा भी एनईपी के तहत लगातार बच्चों में जागरूकता भी फैलाई जा रही है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार ने 2021 के बजट सत्र में शिक्षा के क्षेत्र के लिए 93 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए। इसमें से स्कूल शिक्षा और साक्षरता के लिए 54,873 करोड़ रुपये और उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए 38,350 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
स्कूलों को डिजिटल करना अहम प्राथमिकता
स्कूलों में ई-लर्निंग और सामान्य कक्षाओं की व्यवस्था को संस्थागत रूप देने पर सरकार ने अहम भूमिका निभाई। जिससे हजारों स्कूलों को डिजिटल स्वरूप में ढालने पर काम हुआ। ई-लर्निंग को बढ़ावा देते हुए बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से विभिन्न गतिविधियों में काम करने के गुर भी सिखाए गए।
#NEP2020inAction: #NEP2020 lays emphasis on undertaking specific actions including creating an ecosystem for appropriate assessment and certification of disabled learners.
— Ministry of Education (@EduMinOfIndia) December 21, 2021
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समग्र शिक्षा से छात्रों को नई दिशा मिलेगी
शिक्षा मंत्रालय की तरफ से 6 से 14 वर्ष की आयु के उन छात्रों के लिए एनसीईआरटी द्वारा एक नई मुहिम तैयार की गई है। जिससे इन छात्रों को नियमित स्कूली शिक्षा स्वरूप में ढाला जा सके। इन स्कूल से ड्रॉप हुए छात्रों को प्राथमिक स्कूलों से उच्च प्राथमिक स्कूलों के स्तर तक लाने में अहम भूमिका निभाई जा रही है। समग्र शिक्षा की नीति अपनाकर ऐसे छात्रों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
#NEP2020inAction: A bridge course has been developed by the @ncert, targeted at Out-of-School Children (OoSC) studying in special training centres. The key objective of this course is mainstreaming of those children in regular schools. pic.twitter.com/oIUEvnNFWd
— Dr. Subhas Sarkar (@Drsubhassarkar) December 20, 2021
हल्का हुआ बस्ते का बोझ
नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों के स्कूल के बस्ते के वजन को भी कम करने पर जोर दिया गया। जिसमें स्कूल बेग छात्रों के वजन का 10 फीसद से ज्यादा नहीं होना चाहिए। दूसरी कक्षा तक कोई होमवर्क नहीं दिया जाएगा। तीसरी से पांचवीं कक्षा के लिए सप्ताह में दो घंटे का ही होमवर्क दिया जाएगा। मिडिल स्कूल यानी छठी से सातवीं कक्षा के होमवर्क, दिन में एक घंटा और सप्ताह में करीब 5 से 6 घंटे निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त माध्यमिक और 12वीं कक्षा तक के लिए दिन में अधिकतम होमवर्क दो घंटे और सप्ताह में करीब 10 से 12 घंटे का होमवर्क ही दिया जा सकता है।
#NEP2020inAction: स्कूल बैग नीति, नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है। यह व्यवस्था बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और तनाव मुक्त अध्ययन पर केंद्रित है। इस नीति के अनुसार छात्रों का स्कूल बैग उनके शरीर के वज़न के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिये।
— Ministry of Education (@EduMinOfIndia) December 18, 2021
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शिक्षण प्रणाली को मिल रही है नई रूपरेखा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शिक्षकों को एक बेहतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिससे उन्हें नई तकनीक के विभिन्न आयामों के परिदृश्य में ढलना सिखाया जा रहा है। इससे शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया को नई दिशा देने का मकसद है। बीते एक वर्ष में विभिन्न सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को ऑनलाइन कक्षाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। अब शिक्षकों में ये प्रवृत्ति भी विकसित हो गई है कि वह खुद भी नई-नई प्रेजेंटेशन तैयार करके छात्रों को ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए पढ़ा रहे हैं। बच्चे भी इसका खूब लाभ उठा रहे हैं। सत्र 2021-22 में सरकार की तरफ से स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों की समग्र उन्नति के लिए निष्ठा अभियान के तहत 56 लाख से ज्यादा स्कूल शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का मार्ग प्रशस्त किया गया।
#NEP2020inAction: 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020' अनुभवात्मक शिक्षण पर केंद्रित है जहाँ छात्र अनुभव द्वारा सीखते हैं । शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए नवीन शिक्षण प्रणाली पर कोर्सेज तैयार किये गए हैं।
— Ministry of Education (@EduMinOfIndia) December 16, 2021
(15/62)#AmritMahotsav pic.twitter.com/3RIGT3lTV6
इस तरह रहेगी शिक्षण व्यवस्था
एनईपी के तहत, स्कूली पढ़ाई में बड़ा बदलाव करते हुए पाठ्यक्रम संरचना के 10+2 ढांचे की जगह 5+3+3+4 की नई संरचना लागू करने की बात कही गई है। यह स्कूली शिक्षा व्यवस्था तीन से आठ वर्ष, 8 से 11 वर्ष, 11 से 14 वर्ष और 14 से 18 वर्ष की उम्र के युवाओं के लिए होगी। साथ ही विद्यार्थियों को कौशल या व्यावहारिक जानकारियां देने और 5वीं कक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा देने पर भी जोर दिया गया है। जिससे तीन भाषाओं को अपनाया जा रहा है और इसके तहत छात्रों को पढ़ाए जा रहा है।
हैपीनेस करिकुलम भी हो रहे हैं लागू
दिल्ली, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र समेत अब उत्तर प्रदेश में भी वर्ष 2021 में हैप्पीनेस करिकुलम पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए लागू किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अनुभूति पाठ्यचर्या को लागू किया जा रहा है। जिससे छात्रों को समाज, प्रकृति और देश के बारे में विभिन्न बातों को बताया जाएगा।
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