{"_id":"5e5113038ebc3ef3d7088fb7","slug":"upsc-toppers-rajasthan-tailor-two-sons-amit-and-pankaj-inspiring-success-story","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिता दर्जी, मां करती है तुरपाई का काम, दोनों बेटों ने IAS बनकर कायम की मिसाल","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
पिता दर्जी, मां करती है तुरपाई का काम, दोनों बेटों ने IAS बनकर कायम की मिसाल
Sat, 22 Feb 2020 05:42 PM IST
Trainee Trainee
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Trainee Trainee
Updated Sat, 22 Feb 2020 05:42 PM IST
विज्ञापन
अमित और पंकज अपनी मां के साथ
- फोटो : social media
यह कहानी है राजस्थान के झुंझुनू में रहने वाले दो भाइयों की और उनके माता-पिता की। साधारण तरीके से जीवन-यापन करने वाला परिवार नहीं जानता था कि कड़ी मेहनत और संकल्प के दम पर एक दिन उनका जीवन बदल जाने वाला है।
विज्ञापन
सपने देखना और उन्हें साकार कर लेना बहुत बड़ी बात होती है। ऐसा ही कुछ पंकज कुमावत और अमित कुमावत के साथ हुआ, जब उनका सिलेक्शन यूपीएससी की सिविल सेवा की परीक्षा में हो गया। पंकज ने 443वीं और अमित ने 600वीं रैंक हासिल की। अपने बेटों के रिजल्ट की खबर सुनते ही पिता सुभाष कुमावत का सीना गर्व से चौड़ा हो गया और आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। सुभाष पेशे से एक टेलर हैं और उनकी पत्नी राजेश्वरी देवी उनके साथ ही तुरपाई करने का काम करती हैं।
विज्ञापन
पंकज और अमित दोनों ने आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। इसके बाद पंकज ने नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी भी करना भी शुरू कर दिया था। दोनों भाइयों का सपना सिविल सेवा की परीक्षा को पास करना ही था लेकिन परिवार के सामने आर्थिक तंगी एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी थी। फिर भी माता-पिता ने हार नहीं मानी। दिन-रात मेहनत कर दोनों सिलाई और तुरपाई के काम में व्यस्त रहते थे ताकि उनके दोनों बेटे बिना किसी रुकावट के पढ़ाई कर सकें।
विज्ञापन
आखिरकार पूरे परिवार की मेहनत रंग लाई। एक इंटरव्यू के दौरान पंकज और अमित ने कहा कि हम दोनों भाइयों के लिए पढ़ना जितना आसान था और हमारे माता-पिता के लिए हमें पढ़ाना उतना ही कठिन। हालांकि, हमारे माता-पिता हम दोनों भाइयों से हमेशा कहा करते थे कि पढ़कर-लिखकर एक बड़ा आदमी बनना है। कोई भी चुनौती आए उसका डटकर सामना करना है और हम आपका साथ हमेशा देंगे।
यह एक सकारात्मक सोच का और दृढ़ संकल्पों का ही नतीजा है कि अमित और पंकज ने परेशानियों का सामना करते हुए अपने माता-पिता का सपना पूरा किया।
कमेंट
कमेंट X