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Hindi News ›   Education ›   Uniform Education System Up To Class 12, PIL Filed In Delhi High Court

Uniform Education System: दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका, 12वीं तक समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग

Sun, 01 May 2022 09:32 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Sun, 01 May 2022 09:32 PM IST
सार

Uniform Education System: याचिका में समानता की स्थिति, सभी को समान अवसर, बंधुत्व, एकता और राष्ट्र की अखंडता बनाए रखने का हवाला दिया गया है।  

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Uniform Education System Up To Class 12, PIL Filed In Delhi High Court
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका के जरिये केंद्र सरकार को कक्षा 12वीं तक एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में केंद्र सरकार को 12वीं कक्षा तक के सभी छात्रों के लिए एक समान शिक्षा प्रणाली, समान पाठ्यक्रम और मातृ भाषा में पढ़ाई लागू करने का निर्देश देने के लिए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। 

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याचिका में समानता की स्थिति, सभी को समान अवसर, बंधुत्व, एकता और राष्ट्र की अखंडता बनाए रखने का हवाला दिया गया है। अनुच्छेद 14-16 के तहत याचिका में उल्लेख किया गया है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (आईसीएसई) के पाठ्यक्रम और राज्य बोर्डों के पाठ्यक्रम पूरी तरह से अलग हैं, और यही कारण है कि छात्रों को समान अवसर नहीं मिलते हैं। 
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शिक्षा, कोचिंग और पुस्तक माफिया पर लगाए आरोप

याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार ने आरोप लगाया कि शिक्षा माफिया और कोचिंग माफिया एक राष्ट्र, एक शिक्षा बोर्ड नहीं बनने देना चाहते हैं। पुस्तक माफिया सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें नहीं चाहते हैं। यही कारण है कि कक्षा 12वीं तक एक समान शिक्षा प्रणाली अभी तक लागू नहीं की गई है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली न केवल लोगों के बीच समाज में विभाजन पैदा कर रही है बल्कि समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, बंधुत्व, एकता और राष्ट्र की अखंडता के खिलाफ भी है। 

 

सभी प्रवेश परीक्षाओं के पाठ्यक्रम लगभग एक समान

याचिका में कहा गया है कि पाठ्यक्रम सभी प्रवेश परीक्षाओं जैसे संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई), बिड़ला प्रौद्योगिकी और विज्ञान प्रवेश परीक्षा (बिटसैट), राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नीट), प्रबंधन योग्यता परीक्षा (मैट), राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट), राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), केंद्रीय विश्वविद्यालय सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीयू-सीईटी), सामान्य कानून प्रवेश परीक्षा (सीएलएटी), अखिल भारतीय विधि प्रवेश परीक्षा (आईलेट), सिम्बायोसिस प्रवेश परीक्षा (सेट), किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (केवीपीवाई), नेशनल एंट्रेंस स्क्रीनिंग टेस्ट (एनईएसटी), प्रोबेशनरी ऑफिसर (पीओ), स्पेशल क्लास रेलवे अपरेंटिस (एससीआरए), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (एनआईएफटी), डिजाइन के लिए अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा (एआईईईडी), नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट इन आर्किटेक्चर (नाटा), सेंटर फॉर एन्वायरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी (CEPT), आदि के लिए समान हैं। लेकिन फिर भी स्कूल माफिया एक राष्ट्र-एक शिक्षा बोर्ड नहीं चाहते हैं। 

 

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वर्तमान शिक्षा व्यवस्था समाज में भेदभाव पैदा करने वाली

याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में कहा है कि यह सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान नहीं करता है क्योंकि सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम बिल्कुल अलग हैं। हालांकि अनुच्छेद 14, 15, 16, 21, 21ए के अनुच्छेद 38, 39, 46 इस बात की पुष्टि करते हैं कि शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है और सरकार क्षेत्र, धर्म, नस्ल, जाति, वर्ग या संस्कृति के आधार पर इसमें भेदभाव नहीं कर सकती है। जबकि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था समाज में भेदभाव पैदा करने वाली है।

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