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Hindi News ›   Education ›   UGC wrote letter to all universities for this software

UGC ने सभी विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र, कहा इस सॉफ्टवेयर का प्रयोग अनिवार्य

Tue, 17 Dec 2019 10:05 AM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Garima Garg Updated Tue, 17 Dec 2019 10:05 AM IST
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UGC wrote letter to all universities  for this software
UGC

अब एम फिल और पीएचडी में दूसरे के शोध या साहित्य की चोरी (प्लैजरिजम) नहीं हो सकेगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने थीसिस और रिसर्च पेपर में साहित्यिक चोरी पर रोक लगाने के लिए प्लैजरिजम डिटेकशन सॉफ्टवेयर के उपयोग का निर्देश दिया है। इसका प्रयोग इंजीनियरिंग, मेडिकल, आर्किटेक्चर, फार्मेसी, आईआईटी, आईआईएम, आईआईएससी समेत अन्य विश्वविद्यालयों को करना अनिवार्य है।

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यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि सेंट्रल, स्टेट, डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी, प्राइवेट समेत अन्य संस्थानों में प्लैजरिजम डिटेकशन सॉफ्टवेयर का प्रयोग अनिवार्य है। विश्वविद्यालयों को लाइब्रेरी में इस सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करना होगा ताकि छात्र थीसिस और शिक्षक रिसर्च पेपर तैयार करते समय साहित्यिक चोरी की स्वयं जांच कर सकें। इसकी जानकारी मिलने पर छात्र या शिक्षक थीसिस व रिसर्च पेपर में सुधार कर सकेंगे। इससे उनके समय की बचत भी होगी। थीसिस व रिसर्च पेपर में चोरी रोकने के लिए अकादमिक सत्यनिष्ठा व साहित्यिक चोरी रोकथाम विनियम 2018 और एम फिल व पीएचडी उपाधि प्रदान करने हेतु न्यूनतम मापदंड विनियम 2016 लागू होगा। इसी विनियम के आधार पर छात्र व शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।  
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60 फीसदी चोरी पर डिग्री रद्द तो 40 पर एक साल की रोक
 साहित्यिक चोरी का स्तर चार भागों में विभाजित है। दस फीसदी साहित्यिक चोरी पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। दस से 40 फीसदी साहित्यिक चोरी पर उक्त शोधार्थी को छह महीने के अंदर दोबारा अपना शोधपत्र तैयार करना होगा जबकि 40 से 60 फीसदी साहित्यिक चोरी पर एक साल के लिए रोक लगाई जाएगी। वहीं, 60 से 80 फीसदी पर उसका रजिस्ट्रेशन तक रद होगा। एम फिल और पीएचडी छात्रों को थीसिस के साथ एक शपथ पत्र देना होगा। इस शपथपत्र में उन्हें बताना पड़ेगा कि शोध पत्र, शोध निबंध या समान दस्तावेज उसके द्वारा तैयार किए गए हैं। यह दस्तावेज उसका मौलिक लेखन कार्य है और किसी भी प्रकार की साहित्यिक चोरी से मुक्त है। वहीं, सुपरवाइजर या गाइड को प्रमाण पत्र में बताना होगा कि उसके छात्र ने अपने शोध में साहित्यिक चोरी नहीं की है। 

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