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सुप्रीम कोर्ट का अंतिम वर्ष की परीक्षा पर रोक के लिए याचिकाओं पर अंतरिम आदेश देने से इनकार

Fri, 31 Jul 2020 05:30 PM IST
ललित फुलारा एजुकेशन डेस्क,अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क,अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Fri, 31 Jul 2020 05:30 PM IST
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UGC university final year exams row: SC adjourns hearing till August 10, asks to submit MHA’s stand
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उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के बीच अंतिम वर्ष की परीक्षाएं सितंबर में कराने सबंधी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देश रद्द करने के लिए दायर याचिका पर कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने केन्द्र से कहा कि गृह मंत्रालय को इस विषय पर अपना रुख साफ करना चाहिए।

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यूजीसी ने शीर्ष अदालत से कहा कि किसी को भी इस गफलत में नहीं रहना चाहिए कि उच्चतम न्यायालय इस मसले पर विचार कर रहा है, तो अंतिम साल और सेमेस्टर की परीक्षा पर रोक लग जाएगी। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के दौरान कहा कि वह इस विषय पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही पीठ ने इस मामले को 10 अगस्त के लिये सूचीबद्ध कर दिया।
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केंद्र और यूजीसी की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि गृह मंत्रालय के दृष्टिकोण से वह न्यायालय को अवगत कराएंगे। मेहता ने कहा कि वे अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर चिंतित है क्योंकि देश में आठ सौ से ज्यादा विश्वविद्यालयों में से 209 ने परीक्षा प्रक्रिया पूरी कर ली है। उन्होंने कहा कि इस समय करीब 390 विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। मेहता ने कहा, ‘किसी को भी इस गफलत में नहीं रहना चाहिए कि चूंकि यह न्यायालय इस मामले पर विचार कर रहा है तो इसे पर रोक लगा दी जायेगी। छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखनी चाहिए।’

इस पर पीठ ने कहा, ‘हम इस तरह का कोई आदेश पारित नहीं कर रहे हैं।’ पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के वकील से कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन समिति का इस बारे में 19 जून का आदेश पेश किया जाए। पीठ ने कहा, ‘इस फैसले (महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन समिति) को रिकार्ड पर लाया जाए।’ पीठ ने कहा कि इस मामले में सारे हलफनामे सात अगस्त तक दाखिल किए जाएं। इस मामले की सुनवाई के अंतिम क्षणों में कुछ याचिकाकर्ताओं के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने असम और बिहार के बाढ़ग्रस्त इलाकों के छात्रों की दयनीय स्थिति की ओर पीठ का ध्यान आकर्षित किया।


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पीठ ने कहा, ‘आज यह अंतरिम आदेश का मामला नहीं है। हम 10 अगस्त को सुनेंगे।’’ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने न्यायालय में दाखिल हलफनामे में अंतिम वर्ष और अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं सितंबर के अंत में कराने के निर्णय को उचित ठहराते हुये कहा है कि देश भर में छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को बचाने के लिये ऐसा किया गया है। यूजीसी ने अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने संबंधी छह जुलाई की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 50 पेज का हलफनामा न्यायालय में दाखिल किया है। इसमें कहा गया है कि इस साल जून में कोविड-19 महामारी की स्थिति को देखते हुये उसने विशेषज्ञ समिति से 29 अप्रैल के दिशा-निर्देशों पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया था। अप्रैल के दिशा-निर्देशों में विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से कहा गया था कि वे अंतिम वर्ष की परीक्षाएं जुलाई, 2020 में आयोजित करें।

यूजीसी के अनुसार विशेषज्ञ समिति ने ऐसा ही किया और अपनी रिपोर्ट में सेमेस्टर और अंतिम वर्ष की परीक्षाएं ऑफलाइन, ऑनलाइन या मिश्रित प्रक्रिया से सितंबर, 2020 के अंत में कराने की सिफारिश की थी। हलफनामे के अनुसार विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर यूजीसी ने छह जुलाई की बैठक में चर्चा की और इसे मंजूरी दी। इसके तुरंत बाद कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के बारे में परिवर्तित दिशा-निर्देश जारी किए गए।
 

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