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Kolkata: रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में टीएमसी छात्र संगठन का विरोध, कार्यवाहक कुलपति का कक्ष बंद
Tue, 25 Mar 2025 07:38 PM IST
आकाश कुमार
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: आकाश कुमार
Updated Tue, 25 Mar 2025 07:38 PM IST
सार
Kolkata: टीएमसी छात्र संगठन ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति शुभ्र कमल मुखर्जी के कक्ष को बंद कर दिया, आरोप लगाया कि वे अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नीतिगत फैसले ले रहे हैं। विरोध के चलते मुखर्जी ने विश्वविद्यालय न जाने का फैसला किया।
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Protest (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
Kolkata: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के छात्र संगठन ने मंगलवार को रवींद्र भारती विश्वविद्यालय (RBU) के कार्यवाहक कुलपति शुभ्र कमल मुखर्जी के कक्ष को बंद कर दिया। छात्रों का आरोप है कि मुखर्जी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नीतिगत फैसले ले रहे हैं।
जब प्रदर्शन हुआ, उस समय मुखर्जी अपने जोड़ासांको कैंपस स्थित कार्यालय में मौजूद नहीं थे। लगभग 50 छात्र संगठन के सदस्यों ने उनके कार्यालय के बाहर धरना दिया और कक्ष का दरवाजा बंद कर दिया। मुखर्जी ने इस स्थिति को "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण" बताया।
इससे एक दिन पहले भी, टीएमसीपी के सदस्यों ने कार्यवाहक कुलपति को उनके कक्ष में प्रवेश करने से रोका था और उनके इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की थी।
प्रदर्शन तब शुरू हुए जब मुखर्जी ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (EC) की बैठक बुलाई और कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक व शैक्षणिक निर्णय लिए।
टीएमसीपी के एक नेता का कहना है कि कार्यवाहक कुलपति को इस तरह की नीति संबंधी बैठकें बुलाने का अधिकार नहीं है, यह केवल पूर्णकालिक कुलपति कर सकते हैं। एक अन्य छात्र नेता ने कहा कि जब तक मुखर्जी को उनके पद से हटाया नहीं जाता, तब तक उन्हें कुलपति कार्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
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यह विश्वविद्यालय पिछले डेढ़ साल से प्रशासनिक दिक्कतों से जूझ रहा है। राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस, जो कि राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं, ने 2023 में मुखर्जी को कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया था। तब से वे इस पद पर कार्यरत हैं।
मुखर्जी ने कहा, "यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वे मुझे उस स्थान पर प्रवेश करने से रोक रहे हैं, जो गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की यादों से जुड़ा है। क्या यह किसी टैगोर प्रेमी के लिए झटका नहीं है?"
उन्होंने यह भी दावा किया कि यह केवल छात्र नहीं, बल्कि कुछ गैर-शिक्षण कर्मचारी और अन्य शक्तियां भी इस विरोध के पीछे हैं। उन्होंने कहा कि वह वर्तमान स्थिति में विश्वविद्यालय नहीं जाएंगे और इस मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है।
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जब प्रदर्शन हुआ, उस समय मुखर्जी अपने जोड़ासांको कैंपस स्थित कार्यालय में मौजूद नहीं थे। लगभग 50 छात्र संगठन के सदस्यों ने उनके कार्यालय के बाहर धरना दिया और कक्ष का दरवाजा बंद कर दिया। मुखर्जी ने इस स्थिति को "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण" बताया।
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इससे एक दिन पहले भी, टीएमसीपी के सदस्यों ने कार्यवाहक कुलपति को उनके कक्ष में प्रवेश करने से रोका था और उनके इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की थी।
प्रदर्शन तब शुरू हुए जब मुखर्जी ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (EC) की बैठक बुलाई और कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक व शैक्षणिक निर्णय लिए।
टीएमसीपी के एक नेता का कहना है कि कार्यवाहक कुलपति को इस तरह की नीति संबंधी बैठकें बुलाने का अधिकार नहीं है, यह केवल पूर्णकालिक कुलपति कर सकते हैं। एक अन्य छात्र नेता ने कहा कि जब तक मुखर्जी को उनके पद से हटाया नहीं जाता, तब तक उन्हें कुलपति कार्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
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यह विश्वविद्यालय पिछले डेढ़ साल से प्रशासनिक दिक्कतों से जूझ रहा है। राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस, जो कि राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं, ने 2023 में मुखर्जी को कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया था। तब से वे इस पद पर कार्यरत हैं।
मुखर्जी ने कहा, "यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वे मुझे उस स्थान पर प्रवेश करने से रोक रहे हैं, जो गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की यादों से जुड़ा है। क्या यह किसी टैगोर प्रेमी के लिए झटका नहीं है?"
उन्होंने यह भी दावा किया कि यह केवल छात्र नहीं, बल्कि कुछ गैर-शिक्षण कर्मचारी और अन्य शक्तियां भी इस विरोध के पीछे हैं। उन्होंने कहा कि वह वर्तमान स्थिति में विश्वविद्यालय नहीं जाएंगे और इस मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है।
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