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प्रदूषण से निपटने के लिए आईआईटी दिल्ली ने बनाया 'चक्र शील्ड', जानिए कैसे करेगा काम
Tue, 05 Nov 2019 09:15 PM IST
Mohit Mudgal
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Mohit Mudgal
Updated Tue, 05 Nov 2019 09:15 PM IST
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली (फाइल फोटो)
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली ने फरवरी 2018 में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रिसर्च ऑन क्लीन एयर की स्थापना की। जिसके द्वारा आईआईटी दिल्ली अब देश में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तकनीकी समाधान लेकर आया है।
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आईआईटी दिल्ली ने कम लागत वाले कुछ उपकरण बनाएं हैं। जिससे दिल्ली और उत्तर भारत के राज्य का प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। ऐसा ही एक उपकरण है 'चक्र शील्ड'। चक्र शील्ड प्रदूषण को स्याही में बदलने के लिए प्रयोग होता है, जो बाद में चित्रकारी के काम में आ सकती है। आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्रों द्वारा बनाया गया 'रेट्रोफिट डिवाइस' प्रदूषण के 90 प्रतिशत कणों को एगजास्ट में ही रोक लेता है जिससे डीजल जनरेटर से होने वाले प्रदूषण पर काबू पाया जा सकता है।
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साल 2017 में डिज़ाइन किया गया उपकरण 'नैसोफिल्टर', उपभोक्ताओं को पीएम 2.5 के कणों सहित वायु प्रदूषण से बचा सकता है, जिससे सांस की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। इस उपकरण के उपयोग से पीएम 10 के कणों से पूरी तरह से बचा जा सकता है, जबकि ये पीएम 2.5 के 95 प्रतिशत कणों पर काबू पा सकता है। नैसोफिल्टर 8 से 10 घंटो तक उपयोग में लाया जा सकता है।
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दूसरे स्टार्ट-अप 'क्रिया लैब्स' ने पराली जलाने के कारण होने वाले प्रदूषण को रोकने के प्रयास में एक प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी विकसित की है। जिससे एग्रो वेस्ट जैसे चावल के भूसे को पल्प में बदल लिया जाता है। इस पल्प का उपयोग कई बायोडिग्रेडेबल उत्पाद जैसे कप, प्लेट और अन्य टेबलवेयर बनाने में किया जा सकता है।
इजीयो वायु प्रदूषण मॉनिटर को हमारे स्थानीय वातावरण जैसे कि एक कमरे या कार में प्रदूषण के स्तर की जांच करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। स्टार्ट-अप एयरोग्राम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बनाए गए इस डिवाइस से पूरे शहर के लिए एक विस्तृत नक्शा बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में प्रदूषण के स्तर का पता लगाने में भी मदद कर सकती है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रिसर्च ऑन क्लीन एयर को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने स्टार्ट-अप नेशनल अवॉर्ड 2017 से सम्मानित किया था। सेंटर ने साउथ कोरिया सरकार द्वारा जारी की गई दुनिया के टॉप 50 तकनीकी स्टार्टअप की सूची में भी जगह बनाई है। ये स्टार्ट अप आईआईटी दिल्ली के छात्रों, पूर्व छात्रों और शिक्षकों द्वारा संचालित किया जाता है।
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