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Hindi News ›   Education ›   Tamil Nadu: Justice AK Rajan Committee recommends immediate elimination of NEET

विशेषज्ञों की चेतावनी : खत्म की जाए नीट परीक्षा, अगर जारी रही तो नहीं मिलेंगे स्पेशलिट डॉक्टर

Tue, 21 Sep 2021 03:35 PM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Tue, 21 Sep 2021 03:35 PM IST
सार

NEET 2021: तमिलनाडु में चिकित्सा प्रवेश में सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के उम्मीदवारों पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एके राजन समिति ने कहा है कि योग्यता परीक्षा राज्य को स्वतंत्रता पूर्व दिनों में ले जाएगी।

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Tamil Nadu: Justice AK Rajan Committee recommends immediate elimination of NEET
NEET 2021 - फोटो : twitter

विस्तार

मेडिकल प्रवेश परीक्षा - नीट - तुरंत समाप्त कर देना चाहिए। यदि यह जारी रहती है, तो संभावना है कि भविष्य में सरकारी अस्पतालों में नियोजित होने के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होंगे। यह खुलासा सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राजन समिति की 165 पृष्ठों की रिपोर्ट - "तमिलनाडु में मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश पर नीट के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट"- में किया गया है। 

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बता दें कि नीट के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का अध्ययन करने के लिए तमिलनाडु सरकार द्वारा न्यायमूर्ति एके राजन और आठ अन्य सदस्यों की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने 14 सितंबर को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को रिपोर्ट सौंपी। जिसमें कहा गया है कि अगर नीट कुछ और वर्षों तक जारी रहती है, तो यह तमिलनाडु के स्वास्थ्य ढांचे को प्रभावित करेगी, जिससे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्तियों में कमी आएगी।

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उच्चतर माध्यमिक परीक्षा के आधार पर होना चाहिए प्रवेश
समिति ने कहा कि नीट को खत्म करने से सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा और सभी कमजोर छात्र समुदायों को चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रमों में प्रवेश में हो रहे भेदभाव से बचाया जा सकेगा। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि उच्चतर माध्यमिक परीक्षा में छात्रों द्वारा प्राप्त अंक प्रथम डिग्री चिकित्सा कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए एकमात्र मानदंड होना चाहिए। विभिन्न शिक्षा बोर्ड के छात्रों को समान अवसर देने के लिए, अंकों के सामान्यीकरण (नॉर्मलाइजेशन) का पालन किया जा सकता है।

70 फीसदी छात्र अब प्राइवेट अस्पतालों में करना चाहते हैं काम 
जस्टिस एके राजन समिति के सदस्य डॉ जवाहर नेसन ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि नीट के आधार पर दाखिला लेने वाले मुख्य रूप से शहरी, संपन्न, शिक्षित परिवारों से हैं। हमने पाया कि 70 फीसदी छात्रों ने अपना पीजी कोर्स पूरा करने के बाद निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों के साथ काम करना चुना। लेकिन नीट की शुरुआत से पहले ऐसा नहीं था। इससे पहले, 70 फीसदी छात्रों ने सरकारी अस्पतालों में काम करना चुना था। इसलिए मैं कहूंगा कि नीट विनाशकारी है, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को चकनाचूर कर देगी। 

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