सक्सेज स्टोरी : जानिए नफ्ताली बेनेट के बारे में, जो नेतन्याहू को मात देकर बने इस्राइल के नए प्रधानमंत्री
इस्राइल की डिफेंस फोर्सेज की एलीट यूनिट के कमांडो रहे बेनेट ने 2006 में ही राजनीति में अपनी पारी की शुरुआत की थी और सफलता के पायदान चढ़ते हुए 2021 में प्रधानमंत्री बन गए हैं।
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इस्राइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के 12 वर्ष लंबे शासन को खत्म करते हुए नफ्ताली बेनेट नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। नफ्ताली बेनेट ने नए प्रधानमंत्री के तौर पर रविवार, 13 जून, 2021 को पद की शपथ ली।
बेनेट इस्राइल के पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भी बेहद नजदीकी रहे हैं, लेकिन उन्होंने नेतन्याहू की कुछ गलत नीतियों का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचने का मुकाम हासिल किया है। इस्राइल की डिफेंस फोर्सेज की एलीट कमांडो यूनिट सायरेत मटकल और मगलन के कमांडो रहे बेनेट ने 2006 में ही राजनीति में अपनी पारी की शुरुआत की थी और सफलता के पायदान चढ़ते हुए 2021 में प्रधानमंत्री बन गए हैं।
लंबे समय तक नेतन्याहू के राइट हैंड रहे नफ्ताली बेनेट उनकी गठबंधन सरकार के तौर तरीकों से नाखुश थे। नफ्ताली ने संसद में कम बहुमत होने के बावजूद दक्षिणपंथी, वामपंथी और मध्यमार्गी दलों के साथ नया गठबंधन कर सरकार बनाने में सफलता पाई है। हालांकि, बहुमत की कमी के कारण उनका आगे का रास्ता आसान न होकर मुश्किलों भरा नजर आता है। इससे सरकार की स्थिरता पर भी प्रश्न चिह्न लग रहे हैं।
गौरतलब है कि नफ्ताली बेनेट को इस्राइन का घोर दक्षिणपंथी यानी राष्ट्रवादी नेता माना जाता है। मार्च में हुए चुनावों में उनकी राष्ट्रवादी यामिना पार्टी ने 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में केवल सात सीटें जीती थीं। इसके बावजूद उन्होंने नेतन्याहू या अपने अन्य विरोधियों के आगे घुटने नहीं टेके। नफ्ताली इस्राइल की सत्ता के किंगमेकर बनकर उभरे। भले ही उनकी नेशनलिस्ट पार्टी से एक सांसद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन नफ्ताली के सिर पर सत्ता का ताज सज चुका है।
नफ्ताली बेनेट एक धर्मनिष्ठ यहूदी हैं जिन्होंने विशेषकर सेकुलर हाई-टेक क्षेत्र से लाखों रुपये कमाए हैं। तेल अवीव उपनगर में रहने वाले बेनेट पुनर्वास आंदोलन के अगुआ भी रहे हैं। पूर्व सहयोगी से प्रतिस्पर्धी बने बेनेट ने नेतन्याहू के 12 वर्ष के शासन को खत्म करने के लिए मध्य और वाम धड़े के दलों से हाथ मिलाया है। इस्राइल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बेनेट फलस्तीन की स्वतंत्रता के विरोधी रहे हैं।
गौरतलब है कि बेनेट कब्जे वाले वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में यहूदी बस्तियों को बसाने के घोर समर्थक हैं जिसे फलस्तीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई देश शांति की प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा मानते हैं। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के आग्रह पर बस्तियों के निर्माण कार्य को धीमा करने के नेतन्याहू सरकार के कदम का बेनेट ने जबरदस्त विरोध किया था। हालांकि, अपने पहले कार्यकाल में ओबामा इस्राइल और फलस्तीन की शांति प्रक्रिया बहाल करने में नाकाम रहे थे।
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