रवि तेजा की नन्ही-सी कोशिश ने अफसरों को जगा दिया

संपादकीय डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 04 Feb 2018 10:02 PM IST
Ravi Teja
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कितने खुश दिखाई दे रहे थे मोटरसाइकिल पर वे दोनों। पति आगे बैठकर बाइक चला रहा था और करीब छह महीने के नवजात को गोद में लेकर पीछे पत्नी बैठी थी। लेकिन अगले ही पल सड़क के एक बड़े गड्ढे से बचने के चक्कर में मोटरसाइकिल ने अपना संतुलन खो दिया। दुर्घटना हुई और सवारियों के सिर में चोट लगी। पति-पत्नी तो बच गए, मगर उनका बच्चा इस आघात के लिए तैयार नहीं था। उसने दम तोड़ दिया। मैं इस पूरी घटना का साक्षी था।
हर दिन समृद्ध होते हैदराबाद का बुनियादी ढांचा तैयार करने वाले हजारों मजदूरों में से एक मेरे पिता भी हैं। जिस दिन वह दुखद घटना घटी, मैं अपने पिता के साथ उस सड़क के करीब ही खड़ा था। मेरे पिता वहीं काम कर रहे थे। भले अभी मेरी उम्र तेरह वर्ष की है, लेकिन पिछले साल के उस हृदय विदारक दृश्य ने मेरे बाल मन पर गहरा असर डाला। दुनियादारी की समझ मुझमें नहीं है, पर उस दिन मुझे इतना जरूर पता चल गया कि उस बच्चे की मौत की असली वजह सड़क के गड्ढे ही थी। दरअसल कुछ समय पहले ही मैंने अपनी आंखों से एक और दुर्घटना घटित होते हुए देखी थी, तब एक डेढ़ साल के बच्चे की मौत खुले बोरवेल में गिरने से हो गई थी।

मैंने पता किया, तो मालूम हुआ कि जिनकी जिम्मेदारी सड़क के गड्ढे भरने की है, वे कभी इस काम को गंभीरता से नहीं लेते। मैंने सोचा कि प्रशासन के भरोसे बैठने से अच्छा है कि खुद ही काम पर जुट जाया जाए और अपनी तरफ से कुछ किया जाए, जिससे कि ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस तरह मैंने अपने इलाके की सड़कों के सभी गड्ढे भरने का फैसला किया। मैं नहीं जानता था कि यह काम अकेले कर पाऊंगा या नहीं, लेकिन उस बच्चे का चेहरा रह-रहकर याद आ रहा था, जिसने मुझे यह काम करने की प्रेरणा दी।
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