पॉपकॉर्न बेचते-बेचते खरीद डाले 11 सिनेमा हॉल, पढ़ें ‘होलीडे इन’ होटल्स के फाउंडर की Success Story
जब मैं मात्र नौ महीने का था, तभी मेरे पिता का देहांत हो गया और मेरी मां मुझे लेकर अपने गृहनगर मेम्फिस लौट आईं। बचपन से ही मैं छोटे-मोटे काम करके पैसे कमाने लगा और मां की मदद करने लगा। 17 वर्ष की उम्र में रोजी-रोटी कमाने के लिए मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी, क्योंकि महामंदी के चलते मेरी मां की नौकरी छूट गई थी।
उसके बाद मैं मेम्फिस में सिनेमा हॉल के बाहर पॉपकॉर्न बेचने लगा। मेरे पॉपकॉर्न की बिक्री इतनी बढ़ी कि सिनेमा हाल के मालिक को टिकटों की बिक्री से जितनी कमाई नहीं होती थी, उससे ज्यादा मेरी कमाई होने लगी। नतीजतन सिनेमा हॉल के मैनेजर ने मुझे वहां पॉपकॉर्न बेचने से मना कर दिया।
तब मैंने पिनबॉल मशीनों और सिगरेट वेंडिंग मशीनों का प्रबंध किया और अपनी कमाई का कुछ हिस्सा उस स्थान के मालिकों को देने लगा। इसके अलावा मैंने आइसक्रीम स्टोर भी खरीदा। धीरे-धीरे मेरी कमाई इतनी बढ़ी कि विभिन्न शहरों में मैंने 11 सिनेमा हॉल खरीद लिए। बीस वर्ष की उम्र में पंद्रह घंटे काम करके मैंने इतने पैसे जुटा लिए कि अपने और अपनी मां के लिए घर खरीद सकूं।
बाद में मैंने अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए उसी घर की जमानत पर घर की लागत से ज्यादा रकम उधार ले ली। यह मेरे लिए जीवन को बदलने वाला अनुभव था। उसके बाद तो मैं विनिर्माण व्यवसाय में भी उतर गया।
सफल होने के लिए अवसरों पर ध्यान दें
एक बार मैं परिवार के साथ वाशिंगटन डीसी जा रहा था। रास्ते में मुझे अच्छे और गुणवत्ता पूर्ण होटल नहीं मिले। मुझे अपने बच्चों को अपने साथ कमरे में रखने के लिए अतिरिक्त पैसे देने पड़े। तभी मैंने ठान लिया कि मैं पूरे देश में अच्छे और गुणवत्ता पूर्ण होटल बनाऊंगा, जिसमें छुट्टियां बिताने के लिए लोग बार-बार आना पसंद करेंगे। और इस तरह ‘होलीडे इन’ शृंखला की शुरुआत हुई।
मेरी समझ से सबसे ज्यादा सफल लोग वे हैं, जो अपने काम और अपने परिवार पर गर्व करते हैं। धन कमाना अच्छी बात है, लेकिन पैसा ही सब कुछ नहीं है। गलतियां सबसे होती हैं, मैंने स्वयं कई गलतियां कीं, लेकिन सबसे बड़ी गलती (गलतियों पर बहुत ज्यादा परेशान होना) मैंने कभी नहीं की। सफल होने के लिए अवसरों पर ध्यान देना चाहिए। काम ही वह मास्टर की है, जो अवसरों के दरवाजे खोलती है।
सफल होने के लिए अवसरों पर ध्यान देना चाहिए। काम ही वह मास्टर की है, जो अवसरों के दरवाजे खोलती है।
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