Success Story: टेम्पो चालक की बेटी ने नीट यूजी परीक्षा में पाई सफलता, जानिए पूरी कहानी

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Sun, 21 Nov 2021 04:41 PM IST

सार

Success Story: 22 वर्षीय नाजिया चौथी बार नीट की परीक्षा में शामिल हुई थी। उन्हें  नीट (यूजी) 2021 परीक्षा में 668 अंक प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर नाजिया को 1759वां स्थान प्राप्त हुआ है। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में उन्हें 477वीं रैंक मिली है। 
अपने परिवार के साथ नाजिया।
अपने परिवार के साथ नाजिया। - फोटो : Social Media
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विस्तार

मेहनत से  किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश की जाए तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं होता है। समय- समय पर यह बात चरितार्थ होती रहती है। इसका एक और उदाहरण राजस्थान के झालावाड़ में देखने को मिला है। यहां एक टेम्पो चालक की बेटी नाजिया ने नीट परीक्षा में सफलता हासिल की है। इस सफलता की खास बात यह भी है कि नाजिया अपने गांव की पहली डॉक्टर बनने जा रही है। 
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22 वर्षीय नाजिया चौथी बार नीट की परीक्षा में शामिल हुइ थी। उन्हें  नीट (यूजी) 2021 परीक्षा में 668 अंक प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर नाजिया को 1759वां स्थान प्राप्त हुआ है। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में उन्हें 477वीं रैंक मिली है। 

सफलता का श्रेय कोचिंग और साईकिल को
नाजिया झालावाड़ जिले के पचपहाड़ नामक गांव की रहनी वाली हैं। उनके पिता इसामुद्दीन टेम्पो चलाने का काम करते हैं। उनकी मां और मां अमीना बी एक घरेलू महिला हैं एवं खेतों में मजदूरी करती हैं। नाजिया ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोटा स्थित कोचिंग संस्थान को दिया है। साथ ही नाजिया ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई साइकल ने भी उन्हें सफलता प्राप्त करने में काफी मदद की है। 
नाजिया ने 8वीं कक्षा के बाद पढ़ाई के लिए एक अन्य विद्यालय में प्रवेश लिया था। यह स्कूल उनके घर से काफी दूर था। 9वीं कक्षा में सरकार द्वारा प्रदान की गई साईकिल ने नाजिया के सपनों को उड़ान देने में मदद की। इसकी मदद से ही वह अपने स्कूल जाती थी। 

छात्रवृति बनी वरदान
एक गरीब और अशिक्षित परिवार से ताल्लुक रखने वाली नाजिया को सरकार से मिलने वाली छात्रवृति  से भी काफी मदद मिली।  पढ़ाई में होनहार नाजिया को दसवीं और बारहवीं दोनों ही कक्षाओं में छात्रवृति की सौगात मिली थी। इसकी मदद से ही उन्होंने अपने जिले के पास कोटा शहर में स्थित एक कोचिंग में दाखिला लिया। उनकी लगन को देखकर कोचिंग संस्थान ने भी उनकी आधी से ज्यादा फीस माफ की। इससे उन्हें सफलता प्राप्त करने का मनोबल भी मिला। नाजिया के अनुसार छात्रवृति उनके लिए एक वरदान से कम नहीं थी। 
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