{"_id":"3f047220c90c0bccd591e11701437bb8","slug":"success-story-agra-students-make-blind-navigator-hindi-news-vs","type":"story","status":"publish","title_hn":"Success Story: आगरा के छात्रों ने बनाया 'ब्लाइंड नेविगेटर'","category":{"title":"Success Stories","title_hn":"सफलताएं","slug":"success-stories"}}
Success Story: आगरा के छात्रों ने बनाया 'ब्लाइंड नेविगेटर'
आगरा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Dec 2014 01:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इसे सफलता कहें या समाज सेवा की मिसाल, आगरा के छात्रों ने दृष्टिहीनों के लिए एक विशेष नेविगेटर बनाया है।
हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी विभाग के तृतीय वर्ष के छात्रों ने दृष्टिहीनों की मदद के लिए एक नेवीगेटर तैयार किया है। इसकी मदद से कोई भी दृष्टिहीन रास्ते में आने वाली बाधाओं का पता लगा सकता है।
छात्र अंकुर सिंह चौहान, अमन अनवारिया, अरिदमन सिंह एवं मनीष कुमार ने बताया कि यंत्र को विकसित करने में केवल दो हजार रुपये की लागत आई है। यह यंत्र बहुत ही आसान, छोटा, हल्का है। यंत्र को कमर में बांध दिया जाता है। यंत्र में लगे संवेदक समूह एक सूक्ष्म दर्शनीय क्षेत्र एवं सामने मौजूद बाधाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
यह चमगादड़ के रात में उड़ने के वैज्ञानिक सिद्घांत पर निर्भर है। विभागाध्यक्ष शंकर थाकर के मुताबिक इस यंत्र में अभी और सुधार की संभावना है। इस यंत्र के पूर्ण विकसित होने का मतलब समाज के नेत्रहीन लोगों की मदद के लिए एक कदम बढ़ाते हुए उन्हें नेत्रदान करने जैसा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी विभाग के तृतीय वर्ष के छात्रों ने दृष्टिहीनों की मदद के लिए एक नेवीगेटर तैयार किया है। इसकी मदद से कोई भी दृष्टिहीन रास्ते में आने वाली बाधाओं का पता लगा सकता है।
छात्र अंकुर सिंह चौहान, अमन अनवारिया, अरिदमन सिंह एवं मनीष कुमार ने बताया कि यंत्र को विकसित करने में केवल दो हजार रुपये की लागत आई है। यह यंत्र बहुत ही आसान, छोटा, हल्का है। यंत्र को कमर में बांध दिया जाता है। यंत्र में लगे संवेदक समूह एक सूक्ष्म दर्शनीय क्षेत्र एवं सामने मौजूद बाधाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
विज्ञापन
यह चमगादड़ के रात में उड़ने के वैज्ञानिक सिद्घांत पर निर्भर है। विभागाध्यक्ष शंकर थाकर के मुताबिक इस यंत्र में अभी और सुधार की संभावना है। इस यंत्र के पूर्ण विकसित होने का मतलब समाज के नेत्रहीन लोगों की मदद के लिए एक कदम बढ़ाते हुए उन्हें नेत्रदान करने जैसा है।
विज्ञापन
कमेंट
कमेंट X