Teachers Day: 46 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार, किसी ने रंगोली से सिखाई गणित तो किसी ने शुरू किए बैग लेस डेज
Teachers Day National Teachers Award 2022: किसी शिक्षक ने बच्चों को गणित और आकृतियां सिखाने के लिए रंगोली का इस्तेमाल किया, फर्श पर बीजगणितीय टाइलिंग, रोल नंबर के रूप में आवर्त सारणी बनवाई तो किसी ने स्कूल में बैग लेस डेज स्कीम लागू की।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Teachers Day 2022 National Teachers Award: शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को स्कूली शिक्षा में अद्वितीय योगदान देने वाले 46 चयनित शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार 2022 प्रदान कर सम्मानित किया। इन शिक्षकों ने अपने स्कूल और क्षेत्र में कई प्रकार के नवाचार किए। किसी शिक्षक ने बच्चों को गणित और आकृतियां सिखाने के लिए रंगोली का इस्तेमाल किया, फर्श पर बीजगणितीय टाइलिंग, रोल नंबर के रूप में आवर्त सारणी बनवाई तो किसी ने स्कूल में बैग लेस डेज स्कीम लागू की। किसी ने "छात्रों को कोई सजा नहीं" की शुरुआत की थी।
शिक्षकों द्वारा अपनाई गई नवीन शिक्षण-प्रशिक्षण प्रथाओं के कारण उन्हें इस साल राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया। शिक्षा मंत्रालय (एमओई) कठोर पारदर्शी और ऑनलाइन तीन चरणों वाली चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान करने के लिए हर साल 05 सितंबर को शिक्षक दिवस पर विज्ञान भवन में एक समारोह का आयोजन करता है। यह सम्मान राष्ट्रपति के कर-कमलों से प्रदान किए जाते हैं।
यूपी के शिक्षक ने आवर्त सारणी को ही बनाया रोल नंबर
वहीं, उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में कंपोजिट स्कूल, सहवा के एक शिक्षक खुर्शीद अहमद ने छात्रों के लिए याद रखना आसान बनाने के लिए आवर्त सारणी के तत्वों को रोल नंबर के रूप में उपयोग किया। कठिन विषय के अध्यापन में इन सरल नवाचारों का उपयोग करने के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है। अहमद ने कहा कि सीमित संसाधनों से मैंने विज्ञान के मॉडल जैसे हृदय, मानव संचार प्रणाली आदि को री-सायकल्ड सामग्री से बनाया और छात्रों से क्रोमैटोग्राफी जैसे प्रयोग करवाए।
लद्दाख के शिक्षक ने की "नो पनीशमेंट" की शुरुआत
लद्दाख के गवर्नमेंट मिडिल स्कूल के शिक्षक मोहम्मद जाबिर ने "छात्रों को कोई सजा नहीं" की शुरुआत की। जाबिर ने पढ़ाने के नए तरीके खोजे जो 'नो पनीशमेंट' के सिद्धांत पर आधारित हैं। बच्चों के मनोविज्ञान के अनुसार चतुराई से काम करते हुए, उन्होंने इसका इस्तेमाल किया। उन्होंने ध्वन्यात्मकता, व्याकरण, शब्दावली, दूसरों के बीच पढ़ाने के लिए 'सीखते समय ताली' की तकनीक का प्रयोग किया।
बच्चों को साबुन और जूतें बनाना सिखाया
मुंबई के छत्रभुज नरसी मेमोरियल स्कूल की प्रिंसिपल कविता सांघवी ने स्कूली पाठ्यक्रम में जीवन कौशल जोड़ते हुए बच्चों को साबुन और जूतें बनाना सिखाया जाना शुरू किया। उन्होंने स्कूल में बैग लेस डे इनिशिएटिव भी लागू किया। साथ ही छात्रों को कला और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों के साथ प्रयोग करने में मदद की। वहीं, नीरज सक्सेना, जो शासकीय प्राथमिक विद्यालय सालेगढ़, मध्य प्रदेश में एकमात्र शिक्षक हैं, ने आसपास के गांवों में महिलाओं को स्कूल के काम के लिए स्वयंसेवकों के रूप में काम करने के लिए प्रेरित और संगठित किया।
बिहार के शिक्षक ने किए इनोवेशन
बिहार के ललित नारायण लक्ष्मी नारायण प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ाने वाले सौरभ सुमन ने अपने स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग के लिए स्मार्ट कार्ड, स्मार्ट ब्लाइंड स्टिक, ऑटोमैटिक सिक्योरिटी रोड सिस्टम, एसएमएस अलर्ट फ्लड कंट्रोल सिस्टम, वॉयस नियंत्रित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और स्मार्ट कूड़ेदान जैसे कई इनोवेशन पेश किए। वहीं, तेलंगाना में एक जिला परिषदीय स्कूल की शिक्षिका कंडाला रमैया ने छात्रों को आकृतियों का ज्ञान सिखाने के लिए गणितीय रंगोली बनवाना शुरू किया। उन्होंने स्कूल में फर्श पर बीजगणित वाली टाइलिंग और गणित की अवधारणाओं के साथ दीवार पेंटिंग भी बनवाई।
समारोह के दौरान राष्ट्रपति का संबोधन लाइव सुनें
LIVE: President Droupadi Murmu’s address at the presentation of National Awards to teachers on the occasion of Teachers’ Day in New Delhi https://t.co/sea7ZEk5Fj
— President of India (@rashtrapatibhvn) September 5, 2022
इन 46 शिक्षकों का हुआ सम्मान
सम्मानित शिक्षकों में युद्धवीर, वीरेंद्र कुमार और अमित कुमार (हिमाचल प्रदेश); हरप्रीत सिंह, अरुण कुमार गर्ग और वंदना शाही (पंजाब); शशिकांत संभाजीराव कुलठे, सोमनाथ वामन वाके और कविता सांघवी (महाराष्ट्र); कंडाला रमैया, टीएन श्रीधर और सुनीता राव (तेलंगाना); प्रदीप नेगी और कौस्तुभ चंद्र जोशी (उत्तराखंड), सुनीता और दुर्गा राम मुवाल (राजस्थान), नीरज सक्सेना और ओम प्रकाश पाटीदार (मध्य प्रदेश), सौरभ सुमन और निशि कुमारी (बिहार), जी पोंसकरी और उमेश टीपी (कर्नाटक), माला जिगदल दोरजी और सिद्धार्थ योनजोन (सिक्किम); अंजू दहिया (हरियाणा), रजनी शर्मा (दिल्ली), सीमा रानी (चंडीगढ़), मारिया मुरेना मिरांडा (गोवा), उमेश भरतभाई वाला (गुजरात), ममता अहर (छत्तीसगढ़), ईश्वर चंद्र नायक (ओडिशा), बुद्धदेव दत्ता (पश्चिम बंगाल), मिमी योशी (नगालैंड), नोंगमैथेम गौतम सिंह (मणिपुर), रंजन कुमार विश्वास (अंडमान और निकोबार) से पुरस्कार विजेता शिक्षकों में शामिल हैं।
कमेंट
कमेंट X