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भिखमंगे बच्चों ने बना लिया अपना बैंक
एजुकेशन डेस्क/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Oct 2014 12:25 PM IST
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नन्हीं आंखों में बड़ा बनने का सपना लेकर बाराबंकी का सोनू यादव घर से भागकर दिल्ली तो पहुंच गया, लेकिन चंद घंटों में ही दुनिया की कड़वी हकीकत से उसका सामना हो गया। सारे सपने पलक झपकते ही टूटते नजर आ रहे थे। मगर कुछ कर दिखाने की ललक सोनू में बरकरार थी और इसी वजह से उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक अनूठी मिसाल पेश कर दी।
कूड़ा बीनने, भीख मांगने से लेकर मजदूरी करने वाले इन बच्चों ने पेट काटकर पैसा बचाया और इसे चिल्ड्रन डेवलपमेंट खजाना में जमा कराया। एक एनजीओ के माध्यम से राजधानी से शुरू हुई इस योजना से अब देश विदेश के 13 हजार से अधिक बच्चों ने जुड़कर अपने लिए 28.50 लाख रुपये का खजाना जमा कर लिया है। एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में ही आठ हजार से अधिक बच्चे बाल श्रम से जुड़े हुए हैं।
इस अनोखी मुहिम में बच्चों की मदद करने वाली संस्था बटरफ्लाई की निदेशिका रीटा पानिकर के मुताबिक, 2001 में चांदनी चौक में पांच बच्चों के लिए इसकी शुरुआत की थी। लेकिन कोई भी बैंक अकाउंट खोलने के लिए तैयार नहीं था। इसके बाद हमने चिल्ड्रन डेवलपमेंट बैंक खोला, लेकिन आरबीआई की मनाही के चलते बैंक की बजाय उसका नाम चिल्ड्रेन डेवलपमेंट खजाना कर दिया गया।
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इतना ही नहीं जमा होने वाले पैसों का पूरा हिसाब बच्चे स्वयं रखते हैं। दिल्ली में खजाने की 16 मिलाकर आठ देशों में कुल 152 ब्रांच हैं। इसके लिए प्रति ब्रांच वॉलंटियर मैनेजर भी हैं जो स्वयं उससे जुड़कर हिसाब-किताब रखते हैं।
आठ देशों के 13 हजार बच्चे जुडे़
इस योजना में शामिल कुल 13, 229 बच्चों में से 56 फीसदी लड़के तो 44 फीसदी लड़कियां शामिल हैं। भारत, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल समेत अफ्रीका के दो देश घाना और मेडागास्कर के बच्चे जुड़े हैं। भारत में जम्मू कश्मीर, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, राजस्थान, महाराष्ट्र और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में चिल्ड्रन डेवलपमेंट खजाना की ब्रांच हैं, जहां बच्चे अपनी बचत को जमा करवाते हैं।
दिल्ली में स्पेशल ट्रेनिंग लेने पहुंचे
चिल्ड्रन डेवलपमेट खजाने से जुड़ने वाले बच्चों को अब लाइफ स्किल डेवलपमेंट एजुकेशन भी दी जा रही है। इसी के तहत आठ देशों समेत के कुल 44 बच्चों को यह ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें से 28 भारत तो अन्य बाहरी देशों से आए हुए हैं।
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कूड़ा बीनने, भीख मांगने से लेकर मजदूरी करने वाले इन बच्चों ने पेट काटकर पैसा बचाया और इसे चिल्ड्रन डेवलपमेंट खजाना में जमा कराया। एक एनजीओ के माध्यम से राजधानी से शुरू हुई इस योजना से अब देश विदेश के 13 हजार से अधिक बच्चों ने जुड़कर अपने लिए 28.50 लाख रुपये का खजाना जमा कर लिया है। एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में ही आठ हजार से अधिक बच्चे बाल श्रम से जुड़े हुए हैं।
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इस अनोखी मुहिम में बच्चों की मदद करने वाली संस्था बटरफ्लाई की निदेशिका रीटा पानिकर के मुताबिक, 2001 में चांदनी चौक में पांच बच्चों के लिए इसकी शुरुआत की थी। लेकिन कोई भी बैंक अकाउंट खोलने के लिए तैयार नहीं था। इसके बाद हमने चिल्ड्रन डेवलपमेंट बैंक खोला, लेकिन आरबीआई की मनाही के चलते बैंक की बजाय उसका नाम चिल्ड्रेन डेवलपमेंट खजाना कर दिया गया।
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इतना ही नहीं जमा होने वाले पैसों का पूरा हिसाब बच्चे स्वयं रखते हैं। दिल्ली में खजाने की 16 मिलाकर आठ देशों में कुल 152 ब्रांच हैं। इसके लिए प्रति ब्रांच वॉलंटियर मैनेजर भी हैं जो स्वयं उससे जुड़कर हिसाब-किताब रखते हैं।
आठ देशों के 13 हजार बच्चे जुडे़
इस योजना में शामिल कुल 13, 229 बच्चों में से 56 फीसदी लड़के तो 44 फीसदी लड़कियां शामिल हैं। भारत, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल समेत अफ्रीका के दो देश घाना और मेडागास्कर के बच्चे जुड़े हैं। भारत में जम्मू कश्मीर, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, राजस्थान, महाराष्ट्र और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में चिल्ड्रन डेवलपमेंट खजाना की ब्रांच हैं, जहां बच्चे अपनी बचत को जमा करवाते हैं।
दिल्ली में स्पेशल ट्रेनिंग लेने पहुंचे
चिल्ड्रन डेवलपमेट खजाने से जुड़ने वाले बच्चों को अब लाइफ स्किल डेवलपमेंट एजुकेशन भी दी जा रही है। इसी के तहत आठ देशों समेत के कुल 44 बच्चों को यह ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें से 28 भारत तो अन्य बाहरी देशों से आए हुए हैं।
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