फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   Students are choosing medical instead of engineering for higher education

इंजीनियरिंग में ठहराव, 2020 के पहले जेईई मेन्स में 8.69 लाख परीक्षार्थी तो नीट में 15 लाख

Mon, 20 Jan 2020 07:06 AM IST
संजीव कुमार झा अरविंद / अभिषेक यादव / सीमा शर्मा
अरविंद / अभिषेक यादव / सीमा शर्मा Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 20 Jan 2020 07:06 AM IST
सार

  • सात साल पहले उलट थी तस्वीर, विद्यार्थियों की पसंद अब मेडिकल
  • सर्वाधिक लोकप्रिय विकल्पों के प्रति मिलेनियल्स का बदल रहा रुख 
  • करीब 200 इंजीनियरिंग कॉलेजों ने बंद करने के लिए आवेदन किया 
  • नियम न पूरे करने पर हर साल 100 से ज्यादा कॉलेज बंद होने का खतरा

विज्ञापन
Students are choosing medical instead of engineering for higher education
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

इंजीनियरिंग के प्रति छात्रों के आकर्षण में अब ठहराव आ चुका है। साल में दो बार परीक्षा करवाने के बावजूद बीते सात सालों में जेईई मेन्स के अभ्यर्थियों की संख्या में 33 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं, इस अवधि में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) में छात्रों का संख्या 143 फीसदी बढ़ चुकी है। 

विज्ञापन


प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) सहित देश के सभी प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जनवरी और अप्रैल में दो बार ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) करवाती है। इसमें 12वीं पास विद्यार्थी शामिल होते हैं।
विज्ञापन


जनवरी 2020 में हुई जेईई मेन्स के लिए 9.21 लाख परीक्षार्थियों ने पंजीकरण करवाया था। 8.69 लाख ही शामिल हुए और 52 हजार ने परीक्षा ही नहीं दी। वहीं इस साल एमबीबीएस में दाखिले के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (नीट) में 15 लाख परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


साल 2014 में हुए जेईई मेन्स में 12.34 लाख विद्यार्थी और ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (तब नीट नहीं था) में 6.16 लाख परीक्षार्थी थे। 2016 में नीट की शुरुआत हुई, जिसमें 7.31 लाख विद्यार्थी शामिल हुए और इसके बाद से बढ़ते गए। देश में उच्च शिक्षा के लिए इंजीनियरिंग व मेडिकल, दोनों ही प्रमुख विकल्प समझे जाते हैं।

इनमें शामिल होने वाले अधिकतर परीक्षार्थी 'मिलेनियल्स' यानी साल 2000 के बाद नई सहस्त्राब्दी में जन्मे हैं। इंजीनियरिंग के प्रति घटता रुझान और मेडिकल में बढ़ी रुचि उनके बदले नजरिये को दर्शाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में नीट की वजह से एक साल एमबीबीएस व बीडीएस की सीटें हो जाने से भी रुझान बढ़ा है। 

मांग कम संख्या ज्यादा

इंजीनियरिंग स्नातकों की संख्या मांग की तुलना में दोगुने से भी अधिक बढ़ चुकी है। अनुमान है कि हर साल आठ लाख इंजीनियर बन रहे हैं, जिनमें पांच लाख को रोजगार नहीं मिल पा रहा। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरियां अनिश्चितताओं से भरी हैं।

उद्योगों का कहना है कि इंजीनियरिंग संस्थान पुराने कोर्स पढ़ा रहे हैं, जिनकी जरूरत कम है। प्रतिष्ठित कॉलेजों से बीटेक विद्यार्थी भी कमतर नौकरियों में जा रहे हैं तो कई मेक इन इंडिया व स्किल इंडिया से जुड़कर स्टार्ट-अप पर जोर दे रहे हैं। 

महंगी पढ़ाई, नौकरी नहीं

  • आईआईटी, एमएनआईटी में दाखिले के लिए आठ से 10 लाख विद्यार्थी दो से चार साल महंगी कोचिंग लेते हैं। 23 आईआईटी में 12,279 सीटें, 31 एनआईटी में 18,602, 24 ट्रिपलआईटी में 4023 और 24 केंद्रीय तकनीकी संस्थानों में 4703 सीटें हैं। इन्हें और 10 प्रमुख विश्वविद्यालयों को मिलाकर 40 हजार सीटें मिली हैं, जिन्हें प्रतिष्ठित मानते हैं। बाकी विद्यार्थी निजी कॉलेजों में प्रवेश ले लेते हैं। 
  •  कुछ फिर आईआईटी की कोचिंग करते हैं। कई निजी कॉलेजों की 75 फीसदी तक सीटें खाली रह जाती हैं। स्थिति यह है कि कॉलेज बंद हो रहे हैं या जीरो सेशन चला रहे हैं।
  •  डिग्री लेकर निकले इंजीनियरों को  उचित नौकरी तक नहीं मिल पा रही है। 60 फीसदी से अधिक इंजीनियर बैंक क्लर्क, रेलवे, पटवारी जैसी परीक्षाओं के लिए आवेदन कर रहे हैं तो संविदा तक पर काम करने को राजी हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed