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स्कूली बच्चों ने की अपील : प्रकृति के लिए खतरा बन रही प्लास्टिक, पर्यावरण बचाने में करो मदद

Thu, 17 Jun 2021 08:46 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Thu, 17 Jun 2021 08:46 PM IST
सार

बच्चों ने चिंता जताई है कि यह प्रदूषण हमारी धरती की पवित्रता खत्म कर रहा है और जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। इन बच्चों में अमृतसर, पंजाब और दिल्ली के मीरा बाग स्थित निजी स्कूलों के विद्यार्थी शामिल हैं। 

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School Kids demands to prevent environment from plastic and pollution
पर्यावरण - फोटो : self

विस्तार

तीन स्कूली बच्चों ने बेहद भावुक मगर महत्वपूर्ण अपील की है। बच्चों ने पर्यावरण बचाने के लिए अपील करते हुए लोगों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों से आगे आने का आह्वान किया है। बच्चों का कहना है कि प्लास्टिक थैलियां और बैग्स प्रकृति के लिए खतरा बन रहे हैं। इनसे पर्यावरण प्रदूषित होता है। बच्चों ने चिंता जताई कि प्रदूषण हमारी धरती की पवित्रता खत्म कर रहा है और जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है।

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इन स्कूली बच्चों में तीन कैरवबीर सिंह, अनन्या अग्रवाल और शहराज सिंह संधू तीनों मिलेनियम स्कूल, अमृतसर, पंजाब के विद्यार्थी हैं। जबकि चौथी, दिल्ली के मीरा बाग स्थित सेंट मार्क्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की सातवीं कक्षा की छात्रा अनाया खुराना है। इन बच्चों ने अमर उजाला को भेजे अपने ई-मेल में प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग और भविष्य में उसके संभावित खतरों के बारे में चिंता जताई है।
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बच्चों का कहना है कि बात चाहे पंजाब के ग्रेटर लुधियाना के मत्तेवाड़ा वन क्षेत्र में बन रहे इंडस्ट्रियल पार्क, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के समीप बंगाल की खाड़ी में गैलाथिया नेशनल पार्क क्षेत्र में बंदरगाह कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल और टाउनशिप परियोजना की हो या फिर लक्षद्वीप में लागू हो रहे नए विवादित कानून की, ये सभी प्रमुख चिंताओं के तौर पर उभर रहे हैं। बच्चों ने गैलाथिया नेशनल पार्क, मत्तेवाड़ा वन क्षेत्र को बचाने की अपील के साथ ही लक्षद्वीप में नए कानून को पलटाने के लिए भी मदद मांगी है। 
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अमृतसर की कक्षा छठवीं की छात्रा अनन्या अग्रवाल ने लिखा कि प्लास्टिक की थैलियां धरती और जमीन को प्रदूषित कर रही हैं। इस पर रोक लगवाने में हमारी मदद कीजिए - 

School Kids demands to prevent environment from plastic and pollution
Environment Pollution

प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं है और सदियों तक मिट्टी में रहता है। महासागरों में रोजाना प्लास्टिक खाने से सुमद्री जीव मर रहे हैं और उनकी प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं। अब मनुष्य द्वारा खाए जाने वाले भोजन में भी माइक्रो-प्लास्टिक पाया जा रहा है। पृथ्वी पर हमारा भविष्य गंभीर खतरे में है। कृपया मेरे भविष्य को बचाने के लिए सभी तरह के प्लास्टिक बैग के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में तत्काल कार्रवाई करें। मेरा दम घुट रहा है। कम्पोस्टेबल बैग समाधान नहीं हैं। कृपया हमें सही विकल्प प्रदान करें। कृपया, लुधियाना के पास मत्तेवाड़ा वन को बचाएं। कृपया गैलाथिया वन्यजीव अभयारण्य और ग्रेट निकोबार द्वीप को बचाएं। कृपया लक्षद्वीप में लागू किए जा रहे कानूनों को उलटने में मदद करें। 

- अनन्या अग्रवाल, कक्षा-6 की छात्रा, अमृतसर


वहीं, दिल्ली से कक्षा 7वीं की छात्रा, अनाया खुराना ने प्लास्टिक के उपयोग के कारण हमारी पृथ्वी को होने वाले खतरों के बारे में ध्यान आकर्षित किया। अनाया ने लिखा -

School Kids demands to prevent environment from plastic and pollution
पर्यावरण बचाओ - फोटो : अमर उजाला

प्लास्टिक हमारी धरती के लिए बहुत ही खतरनाक पदार्थ रहा है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो हमारी धरती को नुकसान पहुंचा रहा है। यह मनुष्यों, पौधों और वन्य जीव सबके लिए हानिकारक है। हम कल्पना कर सकते हैं कि प्लास्टिक का उपयोग हमें कैसे प्रभावित कर रहा है। मेरा और मेरी धरती का दम घुट रहा है और हमें इन्हें बचाने की जरूरत है। हमें प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों और प्लास्टिक से बनी अन्य सभी सामग्रियों पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है। हमें प्लास्टिक यों ही कहीं भी नहीं फेंकना चाहिए। हमें इनके रिसाइकलिंग के लिए और अधिक उपाय करने की आवश्यकता है। मेरा आप सभी से अनुरोध है कि सरकार से प्लास्टिक के इस्तेमाल, बोतल, प्लास्टिक बैग इधर-उधर फेंकने पर सख्त जुर्माना लगाने की अपील करें।

- अनाया खुराना, कक्षा 7वीं की छात्रा, दिल्ली


जबकि, अमृतसर के ही छठवीं कक्षा के छात्र कैरवबीर सिंह और शहराज सिंह संधू ने लिखा कि पृथ्वी पर हमारा भविष्य गंभीर खतरे में है। इसलिए हमें पर्यावरण बचाने के लिए आगे आना चाहिए। बकौल कैरवबीर - 

प्लास्टिक की थैलियां धरती और जमीन को प्रदूषित कर रही हैं। प्लास्टिक खाने से जानवर मर रहे हैं और प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं। पृथ्वी पर हमारा भविष्य गंभीर खतरे में है। मेरा  भी दम घुटता है। कृपया मत्तेवाड़ा वन क्षेत्र, गैलाथिया वन्यजीव अभयारण्य और ग्रेट निकोबार द्वीप को भी बचाएं। साथ ही लक्षद्वीप में लागू हो रहे प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले कानूनों को खत्म कराने में मदद करें। 

 - कैरवबीर सिंह, शहराज सिंह संधू , छात्र, अमृतसर


 

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