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Reservation: निजी शिक्षण संस्थानों में भी SC/ST और OBC आरक्षण की गूंज, कांग्रेस ने कानून लाने की उठाई मांग

Mon, 31 Mar 2025 02:34 PM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 31 Mar 2025 02:34 PM IST
सार

Reservation: कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि एससी/एसटी और ओबीसी कोटे के लिए एक नया कानून बनाया जाए, जिससे निजी गैर-अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में भी आरक्षण लागू हो सके।

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SC/ST and OBC Reservation in Private Institutions: Congress Demands New Law for Social Justice, know Details
जयराम रमेश - फोटो : ANI

विस्तार

Reservation: कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को सरकार से मांग की कि एससी/एसटी और ओबीसी कोटे के लिए एक नया कानून बनाया जाए, ताकि निजी गैर-अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में भी आरक्षण लागू हो सके।

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संसदीय समिति की सिफारिश  

कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि संसदीय स्थायी समिति ने अनुच्छेद 15(5) को लागू करने के लिए एक नया कानून लाने की सिफारिश की है। अनुच्छेद 15(5) के तहत सरकार को यह अधिकार है कि वह सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान कर सके, जिसमें सरकारी और निजी दोनों प्रकार के शिक्षण संस्थानों में आरक्षण शामिल है, लेकिन अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को इससे छूट दी गई है।

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कांग्रेस की एससी/एसटी और ओबीसी आरक्षण पुरानी प्रतिबद्धता

रमेश ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणा पत्र में अनुच्छेद 15(5) को लागू करने के लिए कानून लाने का वादा किया था। रमेश ने आगे कहा "संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 364वीं रिपोर्ट में भी अनुच्छेद 15(5) को लागू करने के लिए एक नए कानून की सिफारिश की थी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस मांग को दोहराती है।"

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अनुच्छेद 15 (5) को लागू करने के लिए कानून के घटनाक्रम को स्पष्ट करते हुए रमेश ने कहा कि संसद में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2006 पारित किया गया था और अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के नागरिकों के लिए केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण 3 जनवरी, 2007 से लागू किया गया था।

10 अप्रैल, 2008 को अशोक कुमार ठाकुर बनाम भारत संघ के मामले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2-0 के अंतर से अनुच्छेद 15 (5) को केवल राज्य द्वारा संचालित और राज्य द्वारा सहायता प्राप्त संस्थानों के लिए संवैधानिक रूप से वैध माना जाता है और निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों में आरक्षण को उचित तरीके से तय करने के लिए खुला छोड़ दिया जाता है।

12 मई, 2011 को आईएमए बनाम भारत संघ के मामले में उन्होंने कहा कि 2-0 के अंतर से अनुच्छेद 15 (5) को निजी गैर-सहायता प्राप्त गैर-अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के लिए बरकरार रखा गया है।

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एक अन्य मामले का हवाला देते हुए रमेश ने कहा, "प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट बनाम भारत संघ 29 जनवरी, 2014। 5-0 के अंतर से अनुच्छेद 15(5) को पहली बार स्पष्ट रूप से बरकरार रखा गया है।

उन्होंने कहा, "इसका मतलब है कि निजी शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के नागरिकों के लिए आरक्षण भी संवैधानिक रूप से स्वीकार्य है।"

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