Kota: कोटा में अब तक 14 आत्महत्याएं, सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई नराजगी; जानें पिछले वर्षों के आंकड़े
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कोटा में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं को गंभीर बताया और राजस्थान सरकार से जवाब मांगा। कोर्ट ने एफआईआर में देरी पर नाराजगी जताई और संबंधित पुलिस अधिकारी को तलब किया। जांच तेज और सही दिशा में करने के निर्देश दिए।
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Supreme Court: देश का सबसे बड़ा कोचिंग हब कहे जाने वाले राजस्थान के शहर कोटा में हर वर्ष लाखों छात्र इंजीनियरिंग (IIT-JEE) और मेडिकल (NEET) की तैयारी के लिए आते हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में यहां आत्महत्या के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। 2025 में छह महीने से भी कम समय में 14 छात्र आत्महत्या के मामले सामने आ चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे गंभीर बताया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति को बताया गंभीर
ताजा घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने दो आत्महत्या मामलों की सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार से तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं की बढ़ती घटनाओं पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई और इस स्थिति को गंभीर बताया।
राज्य सरकार से तीखे सवाल
पीठ ने राज्य सरकार से तीखे सवाल भी किए। जस्टिस पारदीवाला ने राजस्थान राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील से पूछा, "आप एक राज्य के रूप में क्या कर रहे हैं? ये बच्चे आत्महत्या क्यों कर रहे हैं और केवल कोटा में ही? क्या आपने एक राज्य के रूप में इस पर विचार नहीं किया?"
वर्षवार आत्महत्या के आंकड़े
हिंदुस्तान टाइम्स ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि 2022 में कोटा में 15 छात्रों ने आत्महत्या की, 2019 में 18, 2018 में 20, 2017 में सात, 2016 में 17 और 2015 में 18 छात्रों ने आत्महत्या की।
| वर्ष | आत्महत्याओं की संख्या |
|---|---|
| 2015 | 18 |
| 2016 | 17 |
| 2017 | 7 |
| 2018 | 20 |
| 2019 | 18 |
| 2022 | 15 |
| 2024 | 17 |
| 2025 | 14 (अब तक) |
प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम
- स्प्रिंग-लोडेड पंखों की अनिवार्यता: 2023 में छात्रावासों और पीजी में आत्महत्या रोकने के लिए यह कदम उठाया गया।
- मानसिक स्वास्थ्य सहायता: कोचिंग संस्थानों में काउंसलिंग और हेल्पलाइन सेवाओं को लागू किया गया।
- अनिवार्य स्क्रीनिंग टेस्ट: कमजोर छात्रों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त सहायता प्रदान करना।
- रैंकिंग सिस्टम में बदलाव: छात्रों को वर्णानुक्रम में क्रमबद्ध करना ताकि रैंक का मानसिक दबाव कम हो।
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