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Hindi News ›   Education ›   SAU president said, No fund crunch in South Asian University, will open new campuses in SAARC countries

SAU: साउथ एशियन यूनिवर्सिटी को सदस्य मुल्कों से मिलने लगा फंड, SAARC देशों में खुलेंगे नए कैंपस- अग्रवाल

Wed, 21 Feb 2024 12:55 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 21 Feb 2024 12:55 PM IST
सार

SAARC: दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय को सदस्य सार्क देशों से धन मिलने लगा है। एसएयू के अध्यक्ष के.के. अग्रवाल ने कहा कि भारत के अलावा संस्थान को अन्य सदस्य देशों से वित्तिय पोषण नहीं मिल रहा था।

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SAU president said, No fund crunch in South Asian University, will open new campuses in SAARC countries
सार्क देश

विस्तार

South Asian University: एक साक्षात्कार में साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष के.के. अग्रवाल ने कहा कि दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय को दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सदस्य देशों से धन मिलना शुरू हो गया है, यह एक ऐसा कदम है जो विश्वविद्यालय को अपने वित्तीय संकट से उभरने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय बिना छात्रवृत्ति के अधिक छात्रों को आकर्षित करके और शिक्षकों के लिए तर्कसंगत वेतन संरचना से खर्च को नियंत्रित करने पर ध्यान देगा।

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अग्रवाल ने कहा, "विश्वविद्यालय को सभी सदस्य देशों द्वारा वित्त पोषित किया जाना चाहिए। अन्य लोग काफी समय से अपना हिस्सा नहीं दे रहे थे, मैंने उन सभी से बात की है और कुल मिलाकर उनकी प्रतिक्रिया यह है कि अब जब चीजें बेहतर होने लगी हैं।"
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एसएयू लगभग चार वर्षों से नियमित अध्यक्ष के बिना काम कर रहा था और यह पद पिछले साल दिसंबर में भरा गया था।

उन्होंने आगे कहा, "नियमित प्रबंधन के अभाव और भारत के अलावा सात सार्क देशों द्वारा वित्त पोषण की कमी के कारण विश्वविद्यालय को अत्यधिक वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था।"
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अग्रवाल ने कहा, "अगर कोई संस्थान इतने समय तक नेतृत्वहीन रहता है तो जाहिर है कि उसे नुकसान होगा, सभी प्रतिनिधि देशों की सरकारें अब विश्वविद्यालय को उचित तरीके से चलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

उन्होंने कहा, "हम हर किसी को मिलने वाली फेलोशिप और छात्रवृत्ति की संख्या को सीमित करने पर काम करेंगे। इसलिए कुछ ऐसी चीजों का संयोजन हमें यथार्थवादी बजट तक पहुंचने में मदद करेगा।"

भारत को छोड़कर, सात SAAR देश - अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका - मिलकर अंतरराष्ट्रीय संस्थान को कुल फंडिंग का 43 प्रतिशत योगदान देते हैं। भारत संस्थान को अपना संचालन चलाने के लिए 57 प्रतिशत धनराशि प्रदान करता है।

अग्रवाल ने कहा, "हम धन का उपयोग करके प्रत्येक सार्क देश में एसएयू के ऑफशोर कैंपस खोलने और पूरे भारत में इसकी शाखाएं स्थापित करने पर भी विचार करेंगे।"

इससे पहले 2022 में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि सार्क के कुछ देशों ने विश्वविद्यालय को वित्तीय सहायता के अपने हिस्से का भुगतान नहीं किया है, जिसके कारण विश्वविद्यालय को गंभीर वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

लोक लेखा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के शीर्ष तीन पदों पर 2019 से  तदर्थ सदस्यों (कुछ दिनों के लिए न्युक्त सदस्य) द्वारा कार्य किया जा रहा था, इस दौरान रजिस्ट्रार को दी गई गलत कर छूट के कारण लगभग 90 लाख रुपये का नुकसान हुआ। 


विश्वविद्यालय में छात्रों द्वारा भूख हड़ताल भी की गई जिसके परिणामस्वरूप छात्रवृत्ति वजीफे में कटौती को वापस लेने और यौन उत्पीड़न समिति में छात्रों के प्रतिनिधित्व सहित अन्य मुद्दों का समर्थन करने वाले शिक्षकों को निलंबित और निष्कासित कर दिया गया।

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