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Hindi News ›   Education ›   Sanskriti university gave lessons of self sufficiency to the disabled

संस्कृति यूनिवर्सिटी पढ़ा रही नि:शक्तों को आत्मनिर्भरता का पाठ  

Thu, 13 Sep 2018 03:22 PM IST
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 13 Sep 2018 03:22 PM IST
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Sanskriti university gave lessons of self sufficiency to the disabled
sanskriti university - फोटो : अमर उजाला
शिक्षा के क्षेत्र में संस्कृति यूनिवर्सिटी का नाम जाना-पहचाना है। उत्तर प्रदेश के चुनिंदा संस्थानों में संस्कृति यूनिवर्सिटी की गिनती होती है। ऐसे में उसकी सामाजिक जिम्मेदारी भी कहीं ज्यादा है। संस्कृति यूनिवर्सिटी और विकलांग एवं पुनर्वास केंद्र दिल्ली एक साथ मिलकर सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। 
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संस्कृति यूनिवर्सिटी के उप कुलाधिपति राजेश गुप्ता ने कहा कि आज के समय में नि:शक्त बच्चों को आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया जाना बेहद जरूरी है। उनके जीवन यापन और समाज के योग्य बनाना सिर्फ सरकार का ही काम नहीं है बल्कि इस दिशा में समाज के समन्वित प्रयास की भी जरूरत है।  
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विकलांग एवं पुनर्वास केंद्र दिल्ली के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने कहा कि हमारा देश आर्थिक समृद्धि की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन निशक्त बच्चों के हालात संतोषजनक नहीं कहे जा सकते हैं। राजेश गुप्ता के मुताबिक, संस्कृति यूनिवर्सिटी और विकलांग एवं पुनर्वास केंद्र दिल्ली के संयुक्त प्रयासों से इस समय 100 से अधिक नि:शक्त बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। 
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संस्कृति यूनिवर्सिटी का मकसद नि:शक्त बच्चों  को  स्वावलंबी बनाना भी है। संस्था द्वारा बच्चों को लाने ले जाने की व्यवस्था तो मुफ्त है ही, उन्हें ड्रेस और किताबें भी फ्री में उपलब्बध कराई जाती हैं। यहां बच्चे साक्षरता का पाठ ग्रहण करने के साथ ही मोमबत्ती, अगरबत्ती, मोती की माला, दीपक वगैरह का भी निर्माण करते हैं।      


शिक्षिका अपूर्वा देसाई बताती हैं कि हमारे यहां छात्र-छात्राओं को खेल, डांस, सांकेतिक भाषा, स्पीच थैरेपी, आदि में भी दक्ष किया जाता है। यहां अलीगढ़, पलवल, हाथरस, मथुरा आदि के 100 से अधिक नि:शक्त बच्चों के भविष्य का निर्माण हो रहा है। यहां बीएड और डीएड स्पेशल की कक्षाएं भी संचालित हो रही हैं। इनमें मथुरा जनपद के अलावा देश के दूसरे राज्यों के छात्र-छात्राएं भी लाभांवित हो रहे हैं।  
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