Pariksha Pe Charcha 2020: बच्चों, अभिभावकों के लिए पीएम मोदी ने कहीं ये बड़ी बातें
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों के साथ 'परीक्षा पे चर्चा'
- तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में संपन्न हुआ कार्यक्रम
- करोड़ों लोगों ने लाइव देखा पूरा कार्यक्रम
PM Narendra Modi Pariksha Pe Charcha 2020 Live Updates: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के करोड़ों बच्चों और अभिभावकों की क्लास ली। इसके लिए आज दिल्ली के तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में 'परीक्षा पे चर्चा' का आयोजन किया गया था। बच्चों के लिए पीएम मोदी के कार्यक्रम 'परीक्षा पे चर्चा' का ये तीसरा साल रहा। 2018 में पहली बार इसकी शुरुआत की गई थी। बोर्ड परीक्षाओं से पहले प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम का उद्देश्य है छात्र-छात्राओं को परीक्षा के तनाव से दूर करना और उन्हें सफलता के मायने समझाना। ये कार्यक्रम दिन के 11 बजे से शुरू हुआ। अंत में पीएम मोदी बच्चों से मिले और उन्हें ऑटोग्राफ भी दिए।
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विस्तार
कहां देख सकते हैं 'परीक्षा पे चर्चा'
परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम को देश के किसी भी कोने में बैठे छात्र, अभिभावक, शिक्षक या अन्य लोग देख सकते हैं। दूरदर्शन (DD National) पर इस पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के ट्विटर पेज और यूट्यूब पर भी इस पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा।
पीएम मोदी से रूबरू होंगे 2000 छात्र
दिल्ली के तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में दो हजार छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम के लिए सीधे पीएम मोदी से रूबरू होंगे। ये वे विद्यार्थी हैं जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के जरिए इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए चुना गया है। इनमें से कुछ छात्र-छात्राओं को प्रधानमंत्री से सवाल पूछने का भी अवसर मिलेगा।
सज गया स्टेडियम
परीक्षा पे चर्चा के लिए दिल्ली का तालकटोरा इनडोर स्टेडियम सज चुका है। विद्यार्थियों, शिक्षकों ने अपनी-अपनी जगह लेनी शुरू कर दी है। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शुरू कर दिए गए हैं।स्टेडियम की तस्वीरें और वीडियो प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO - Prime Minister Office) ने ट्वीट की है।
#ParikshaPeCharcha2020 begins soon!
— PMO India (@PMOIndia) January 20, 2020
Large number of students, teachers and parents have gathered to interact with PM @narendramodi.
Do watch. pic.twitter.com/tKKx23mvyT
पीएम मोदी पहुंचे स्टेडियम
प्रधानमंत्री परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के जरिए बच्चों की क्लास लेने के लिए तालकटोरा स्टेडियम पहुंच चुके हैं। कार्यक्रम शुरू करने से पहले वे वहां लगी प्रदर्शनी देख रहे हैं। उनके साथ केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (HRD Minister Ramesh Pokhriyal Nishank) भी पहुंचे हैं।Delhi: Prime Minister Narendra Modi at an exhibition ahead of his interaction with school students during 'Pariksha Pe Charcha 2020' . pic.twitter.com/25epTcjfAi
— ANI (@ANI) January 20, 2020
कार्यक्रम शुरू
पीएम नरेंद्र मोदी इनडोर स्टेडियम में पहुंच चुके हैं। कार्यक्रम शुरू हो चुका है। इस बार कार्यक्रम का संचालन स्कूली छात्र-छात्राएं ही कर रहे हैं। शुरुआत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के स्वागत भाषण के साथ हुई है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया आज हमारे प्रधानमंत्री की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है। पूरा विश्व शांति के लिए हमारे प्रधानमंत्री की ओर देख रहा है। चाहे अटल टिंकरिंग लैब हो या कृत्रिम बुद्धिमता... पूरा विश्व हमसे सीख रहा है।
पीएम मोदी की क्लास शुरू
परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर आ चुके हैं और देशभर के करोड़ों बच्चों के लिए पीएम मोदी की क्लास शुरू हो चुकी है। मंच पर आते ही पीएम मोदी ने कहा - 'नमस्ते, एक बार फिर से आपका दोस्त आपके बीच है।' उन्होंने कहा कि 2020 के शुरू होते ही नया दशक शुरू हो रहा है। ये दशक देश और आपके दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।#WATCH PM Modi interacts with students during ‘Pariksha Pe Charcha 2020’ https://t.co/0J7GheSmt5
— ANI (@ANI) January 20, 2020
तो शुरू करते हैं #WithoutFilter
अभिभावकों का ही काम मैं भी करता हूं। लेकिन अलग तरीके से करता हूं। एक मददगार बनकर, दोस्त, साथी बनकर। इसलिए मैं शायद आपको बोझ नहीं लगता हूं। बातचीत शुरू करेंगे हैशटैग विदाउट फिल्टर (#WithoutFilter)। जैसे आप दोस्तों से बात करते हैं वैसे ही करें।चंद्रयान की कहानी से समझाया सफलता और विफलता का मतलब
सवाल:
राजस्थान की छात्रा यशश्री - बिना तनाव और घबराहट के परीक्षा का सामना कैसे करें? कई बार मूड ऑफ हो जाता है।
पीएम मोदी का जवाब: 'नौजवानों का मूड ऑफ कभी नहीं होना चाहिए। लेकिन कभी-कभी हमारे सोचने का तरीका परेशानी का सबब बन जाता है। अपनी अपेक्षा को अपने साथ इतना न जोड़ दें, कि उसके पूरा न होने से हमारा मूड ऑफ हो जाए। मोटिवेशन और डिमोटिवेशन... ये ऐसी चीजें हैं जिससे हर किसी को गुजरना पड़ता है। बार-बार गुजरना पड़ता है। जैसे- चंद्रयान। आपसब रात को जाग रहे थे। कुछ लोगों ने मुझे कहा था कि आपको वहां नहीं जाना चाहिए, क्या होगा अगर ये मिशन फेल हो गया। मैंने कहा- इसीलिए मुझे जाना चाहिए। मिशन में गड़बड़ी के बाद मैंने वैज्ञानिकों को समझाया और अपने होटल चला गया। लेकिन सोने का मन नहीं हो रहा था। तब मैंने पीएमओ की पूरी टीम को बुलाया। उनसे कहा कि सुबह हमें जल्दी जाना है, लेकिन हम देर से जाएंगे। सुबह एक बार फिर वैज्ञानिकों से मिलेंगे। हम उनसे मिले, मैंने अपने भाव व्यक्त किए। उनके परिश्रम की सराहना की। इतनी बात से वहां के साथ-साथ पूरे देश का माहौल बदल गया। कहने का मतलब ये है कि हम विफलताओं में भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं। हर प्रयास में उत्साह भर सकते हैं। किसी चीज में आप विफल हुए, इसका मतलब ये है कि अब आप सफलता की ओर चल पड़े हैं। अगर वहीं रुक गए, फिर कितने भी ट्रैक्टर लगा दें, आप नहीं निकल सकेंगे। ये आपको खुद तय करना होगा। इमोशन को मैनेज करने का तरीका सबसे अहम है।'
सवाल:
उत्तराखंड के मयंक नेगी - जीवन में सफलता का मापदंड क्या केवल परीक्षा में प्राप्त अंक है। परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए हम अपना कितना ध्यान केंद्रित करें?
पीएम मोदी का जवाब - जाने अनजाने में हम उस रास्ते पर चल पड़े हैं कि सफलता विफलता का मापदंड कुछ विशेष परीक्षाओं के अंक बन गए हैं। माता-पिता भी ऐसा ही वातावरण बना देते हैं। किसी जमाने में शायद ये सही होगा। लेकिन आज दुनिया काफी बदल चुकी है। संभावनाएं बढ़ गई हैं। सिर्फ परीक्षा के अंक ही जिंदगी नहीं हैं। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है। वो बस एक पड़ाव है।
माता पिता से मैं खास प्रार्थना करूंगा कि आप बच्चों के लिए ये नहीं तो कुछ नहीं वाला मूड बना देते हैं, ऐसा बिल्कुल न करें। अच्छा हुआ तो बेहतर, नहीं हुआ तो दुनिया लुट नहीं जाती। सामने कई संभावनाएं हैं। परीक्षा का महत्व है। लेकिन वही जिंदगी है, इस सोच से बाहर आना चाहिए।
सवाल:
मध्यप्रदेश से प्राजक्ता अतंकर, दिल्ली से रिया, पश्चिम बंगाल से अनामिका - जो बच्चे पढ़ाई में नहीं, लेकिन संगीत, खेलकूद जैसी अन्य गतिविधियों में अच्चे होते हैं, उन्हें क्या करना चाहिए? पढ़ाई और इन गतिविधियों के बीच सामंजस्य कैसे बनाएं?
पीएम मोदी का जवाब - शिक्षा नई और बहुत बड़ी दुनिया में प्रवेश करने का रास्ता होती है। हमारी पूरी शिक्षा हमें कई चीजों को जानने समझने के अवसर देती है। जो हम सीखते हैं उसे रोज कसौटी पर कसना चाहिए। शिक्षकों के सवाल-जवाब की कसौटी पर नहीं, जिंदगी की कसौटी पर कसना चाहिए। अगर आप कोई अन्य गतिविधि नहीं करते हैं, तो आप रोबोट बनकर रह जाएंगे। इसलिए समय का संतुलन जरूरी है, लेकिन पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में भी भाग लेना चाहिए।
लेकिन एक नई बुराई इन दिनों प्रवेश कर गई है। अभिभावकों के लिए एक्स्ट्रा एक्टिविटी फैशन स्टेटमेंट बन गया है। वे सोच लेते हैं कि ग्लैमर वाली गतिविधियां बच्चों के लिए ज्यादा अच्छी हैं। नतीजा - जिस तरह परीक्षा का दबाव माता-पिता डालते हैं, उसी तरह इन गतिविधियों का भी दबाव डालने लगते हैं। लेकिन ये बिल्कुल गलत है। बच्चे की रुचि समझकर उसे उसकी पसंद की गतिविधि में आगे बढ़ाना चाहिए।
घर में एक जगह ऐसी हो, जहां तकनीक को इजाजत न हो
कुछ छात्रों ने पीएम मोदी से तकनीक के इस्तेमाल और पढ़ाई में इसकी जरूरत पर सवाल पूछा। इसपर पीएम मोदी ने पहले तकनीक की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि तकनीक का ट्रेंड लगातार तेजी से बदल रहा है और इससे अपडेटेड रहने की जरूरत है। लेकिन जब मैं देखता हूं कि घर में परिवार के चार सदस्य हैं और सभी अपने-अपने फोन में लगे हैं, तो बुरा लगता है।
उन्होंने कहा कि 'क्या हम टेक्नोलॉजी फ्री आवर के बारे में सोच सकते हैं। या घर में एक ऐसी जगह बना सकते हैं जहां तकनीक को इजाजत न हो। इस तरीके से हम एक दूसरे के लिए समय निकाल सकेंगे और तकनीक से भ्रमित नहीं होंगे।'
क्या है पढ़ने का उत्तम समय
'मुझे लगता है कि बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच दूरी थोड़ी ज्यादा है। मैं चाहूंगा कि अभिभावक और शिक्षक ऐसा माहौल बनाएं कि बच्चे खुलकर आपसे हर बात करें। अपनी हर परेशानी साझा करें।'
'जहां तक पढ़ने के सही समय की सवाल है तो मुझे लगता है कि संभव है कि रात को आप ज्यादा फोकस नहीं कर पाएंगे। दिनभर की थकान और कई घटनाओं से गुजरने के बाद हमारा दिमाग हो सकता है पूरा फोकस न कर सके। लेकिन अच्छी नींद के बाद हमारा मन तरोताजा रहता है। इसलिए अनुभव से ऐसा माना गया है और मेरा भी विश्वास है कि सुबह का समय पढ़ाई के लिए सर्वोत्तम है। हालांकि हर विद्यार्थी की अपनी विशेषता होती है। इसलिए आप जिसमें सहूलियत महसूस करते हों, उसी समय में पढ़ें। मुसीबत तब होती है जब हम पढ़ने के बहाने के बजाय न पढ़ने के बहाने खोजते हैं और उसका बोझ पूरे परिवार पर डाल देते हैं।'
दूसरों को देखकर अपना लक्ष्य तय न करें
अपने अंदर की क्षमता को समझना सबसे मुश्किल काम है। अक्सर हम दूसरों को देखकर अपने लक्ष्य तक कर लेते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। हम सभी की क्षमताएं, पसंद-नापसंद अलग हैं। तो पहले ये समझें कि आपको क्या करना अच्छा लगता है। वो कौन सा काम है जो आपको बोझ नहीं लगता, बल्कि आप उसे करना एंजॉय करते हैं। अपनी क्षमता को पहचानकर अपना लक्ष्य चुनें। मेरा अनुरोध है कि माता-पिता भी बच्चों को ये फैसला लेने में उनकी मदद करें, न कि उनपर किसी खास लक्ष्य को चुनने का दबाव बनाएं।
एग्जाम वॉरियर किताब जरूर पढ़ें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों से कहा कि वे परीक्षा से पहले एक बार उनकी किताब एग्जाम वॉरियर (Exam Warrior) जरूर पढ़ें। उन्होंने कहा कि 'तनाव परीक्षा का नहीं, अपेक्षाओं का है। जब हम ये सोच लेते हैं कि हमें इस परीक्षा में इतना बेहतर करना ही है, ये परीक्षा पास करनी ही है, अगर नहीं किया तो मेरा जीवन खराब हो जाएगा.. तब आपके ऊपर दबाव बढ़ता जाता है। एक या दो परीक्षा में विफल हो जाने से सपने खत्म नहीं हो चाहिए। अपने सपनों को कुछ बनने के लक्ष्य से नहीं, कुछ करने के लक्ष्य से जोड़ें।'
'परीक्षा जिंदगी नहीं है, परीक्षा जिंदगी में बस एक मुकाम है। आने वाला कल आपका है। हिंदुस्तान का है।'
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