जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय या राज्य कोटा पर अभी फैसला नहीं
- एनटीए ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कोटा पर कहा, आवेदन पत्र में कोई भी विकल्प चुनें
- एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिले की दौड़ शुरू हो चुकी है, उलझन में फंसे हैं छात्र
- जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा होने से पहले सिर्फ स्टेट कोटा से दाखिले होते थे
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा तो मिल गया है, पर उच्च शिक्षा में विशेष राज्य या यूनियन टेरिटरी के नियमों के तहत दाखिले पर अभी फैसला नहीं हुआ है। दाखिले में स्टेट कोटा या ऑल इंडिया कोटा को लेकर उठे सवाल के कारण स्वास्थ्य मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है।
दरअसल एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिले की दौड़ शुरू हो चुकी है। ऐसे में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने छात्रों की उलझन पर जवाब दिया है कि वे आवेदन पत्र में ऑल इंडिया कोटा या स्टेट कोटा कोई भी विकल्प चुन सकते हैं। एनटीए के मुताबिक मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट 2020) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उम्मीदवार 31 दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं।
छात्रों को उम्मीद है कि जम्मू-कश्मीर व लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेशों का दर्जा मिलने से अब तीन मेडिकल कॉलेजों में ऑल इंडिया कोटा लागू होगा। ऐसे में छात्रों के पास बेहतर विकल्प होगा।
छात्रों को परेशान होने की जरूरत नहीं : एनटीए
एनटीए प्रबंधन के मुताबिक, छात्रों को अभी परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि स्टेट और ऑल इंडिया कोटा के तहत सीट आवंटन का काम काउंसिलिंग के दौरान होगा। उसी समय यह तय होगा।
पहले जम्मू-कश्मीर में सिर्फ स्टेट कोटे से होते थे दाखिले
जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा होने के चलते पहले यहां सिर्फ स्टेट कोटा से दाखिले होते थे। पंद्रह फीसदी ऑल इंडिया कोटा लागू नहीं था। जबकि अन्य सभी राज्यों में 85 फीसदी सीटों पर स्टेट और 15 फीसदी सीटों पर ऑल इंडिया कोटा लागू होता है।
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