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Hindi News ›   Education ›   NEP’s nutritious breakfast idea for school children a welcome step: Vice-President

उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा- नई शिक्षा नीति में स्कूली बच्चों के लिए पौष्टिक नाश्ते का विचार स्वागतयोग्य कदम

Fri, 07 Aug 2020 04:47 PM IST
ललित फुलारा एजुकेशन डेस्क,अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क,अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Fri, 07 Aug 2020 04:47 PM IST
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NEP’s nutritious breakfast idea for school children a welcome step: Vice-President
उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू (फाइल फोटो)

उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कहना है कि नई शिक्षा नीति में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य और पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। स्कूली बच्चों को पौष्टिक नाश्ता प्रदान करने का नवीनतम कदम स्वागत योग्य है। उन्होंने यह बात शुक्रवार को एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक डिजिटल विमर्श कार्यक्रम का उद्घाटन के अवसर पर कही।

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उन्होंने कहा, ‘नई शिक्षा नीति में पौष्टिक नाश्ता प्रदान करना एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन महामारी और भूख की समस्याओं के संदर्भ में बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। केंद्र की स्वास्थ्य और पोषण संबंधी पहलों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना शामिल है जिससे 98.16 लाख से अधिक महिलाएं, लाभान्वित हुई हैं।
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उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत कृषि के क्षेत्र में पारंपरिक ज्ञान का खजाना है। इस ज्ञान को पुरातन के रूप में अस्वीकार करने के बदले हमें इनमें से सर्वश्रेष्ठ तकनीकों को कृषि में आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में भूख, कुपोषण, शिशु मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है और भारत सरकार ने देश में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी समस्याओं को हल करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
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इससे पहले बृहस्पतिवार को नायडू ने कोरोना महामारी के कारण मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के बाधित होने पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि डिजिटल कक्षाएं अस्थायी व्यवस्था है और यह कभी शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने यह भी कहा था कि कोई भी डिजिटल व्यवस्था कक्षाओं में बैठकर पढ़ने-पढ़ाने की अनुभूति नहीं करा सकती। उन्होंने कहा था कि नई शिक्षा नीति में मातृ भाषा पर ज़ोर दिया गया है। भारतीय भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन किया जाना अत्यंत आवश्यक है। कोई भाषा थोपी नहीं जानी चाहिए और न ही किसी भाषा का विरोध ही किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि एनईपी में भारतीय संस्कारों के प्रति गहरी आस्था के साथ साथ विश्व भर से उत्कृष्ट विचारों, शिक्षा पद्धतियों के समावेश, दोनों पर बराबर का बल दिया गया है।

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