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नई शिक्षा नीति पर सिसोदिया बोले- बोर्ड परीक्षा सरल बनाने से रट्टा मारने की समस्या नहीं होगी हल

Tue, 11 Aug 2020 04:57 PM IST
ललित फुलारा एजुकेशन डेस्क,अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क,अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Tue, 11 Aug 2020 04:57 PM IST
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NEP fails to address improvement of public education, focus only on private institutes: Sisodia
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया - फोटो : Twitter

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) से छात्रों के रट्टा मारने की समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि एनईपी में बोर्ड परीक्षा को सरल बनाने के प्रस्ताव से रट्टा लगाने की समस्या हल नहीं होगी, क्योंकि शिक्षा प्रणाली अब भी मूल्यांकन प्रणाली का गुलाम बनी रहेगी।

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उन्होंने कहा कि एनईपी सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने में विफल है। यह  निजी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करती है और कुछ सुधार वास्तविकता पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली हमेशा से मूल्यांकन प्रणाली का गुलाम रही है और आगे भी रहेगी। बोर्ड परीक्षाएं सरल बनाने से मूल समस्या हल नहीं होगी जो कि रट्टा लगाना है। जोर अब भी वार्षिक परीक्षाओं पर रहेगा, जरूरत सत्र के अंत में छात्रों का मूल्यांकन करने से जुड़ी अवधारणा को दूर करने की है, चाहे यह सरल हो या कठिन।
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नई शिक्षा नीति के कुछ सुझाव सिर्फ आशाओं पर आधारित
सिसोदिया ने कहा कि नई शिक्षा नीति में कुछ प्रस्तावित सुधार अच्छे भी हैं और वास्तव में हम उनपर पहले से ही काम कर रहे हैं। कुछ सुझाव सिर्फ आशाओं पर आधारित हैं और उनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। इसमें सरकारी स्कूलों पर ध्यान नहीं दिया गया।
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नई शिक्षा नीति में इस बात का कोई जिक्र नहीं किया गया कि देश में सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए क्या किया जाना चाहिए या क्या किया जाएगा। क्या इसका मतलब यह है कि सभी पहलों को निजी स्कूलों और कॉलेजों में सफलतापूर्वक लागू किया जाएगा और यही एकमात्र तरीका है? नीति कहती है कि परोपकारी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा। स्कूलों की लगभग सभी बड़े चेन और यहां तक कि उच्च शिक्षण संस्थान एक परोपकारी मॉडल पर आधारित हैं, जिसे उच्चतम न्यायालय पहले ही ‘‘शिक्षण की दुकानें’’ कह चुका है। तो क्या हम सिर्फ उसे ही बढ़ावा देने वाले हैं? फिर हमें नई नीति की जरूरत क्यों है?

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