एनईपी-2020: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जुड़ीं इंजीनियरिंग की किताबें, प्रो. पुनिया बोले- नए पाठ्यक्रम को सरल भाषा में किया तैयार
तकनीकी किताबों के किसी चैप्टर में यदि कोई बदलाव होता है या फिर छात्र संबंधित चैप्टर को अंग्रेजी में समझना चाहेगा तो मोबाइल से गूगल लिंक के माध्यम से बार कोड को स्कैन करने से उसे सभी प्रकार की जानकारियां मिलेंगी। नए पाठ्यक्रम पर इंजीनियरिंग की किताबों को लर्निंग आउटकम के आधार पर सरल भाषा में तैयार किया गया है।
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तकनीकी कॉलेजों के इंजीनियरिंग के छात्र अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी किताबें पढ़ेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत लर्निंग आउटकम पर आधारित भारतीय भाषाओं में तैयार इन किताबों में बार कोड है।
तकनीकी किताबों के किसी चैप्टर में यदि कोई बदलाव होता है या फिर छात्र संबंधित चैप्टर को अंग्रेजी में समझना चाहेगा तो मोबाइल से गूगल लिंक के माध्यम से बार कोड को स्कैन करने से उसे सभी प्रकार की जानकारियां मिलेंगी। नए पाठ्यक्रम पर इंजीनियरिंग की किताबों को लर्निंग आउटकम के आधार पर सरल भाषा में तैयार किया गया है।
फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, वर्कशॉप, इंवायरमेंटल साइंसेज, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की किताबें आठ भारतीय भाषाओं में तैयार की गई हैं। इनमें अंग्रेजी, हिंदी, ओड़िया, तमिल, तेलगू, कन्नड़, मराठी, बंगाली, गुजराती शामिल हैं। वहीं, मलयालम भाषा पर काम हो रहा है, जबकि पॉलिटेक्निक में डिप्लोमा प्रोग्राम की किताबें 10 भारतीय भाषाओं (हिंदी, ओड़िया, तमिल, तेलगू, कन्नड़, मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, असमी) में उपलब्ध करवाई गई है।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के उपाध्यक्ष प्रो. एमपी पुनिया ने अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा से शैक्षणिक सत्र 2022-23 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तकनीकी कॉलेजों में पढ़ाई में किस प्रकार से बदलाव होंगे, उस पर विस्तार से जानकारी दी।
भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने पर तकनीकी शब्दों को छात्र कैसे समझेंगे?
- इंजीनियरिंग की किताबों को अनुवाद करते समय बहुत ध्यान रखा गया है। इसमें विषय विशेषज्ञों के अलावा भाषा विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया था। पहले जो दिक्कत आ रही थी, वह पूरी तरह ठीक कर ली गई है। भारतीय भाषाओं में अनुवाद करते समय कुछ तकनीकी शब्दों में अंग्रेजी में रहने दिया गया है, ताकि उलझन न हो।
नए पाठ्यक्रम और लर्निग आउटकम पर आधारित किताबों से शिक्षक कैसे जुड़ेंगे?
- नए पाठ्यक्रम और लर्निंग आउटकम पर आधारित इंजीनियरिंग की इन किताबों से शिक्षकों को पूरी तरह से जोड़ दिया गया है। कोरोना काल में जब शिक्षण संस्थान बंद थे तो कुल 6 लाख शिक्षकों में से ढाई लाख से अधिक शिक्षकों की विशेष ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है।
एनईपी के तहत तकनीकी शिक्षा के छात्रों को भी एंट्री-एग्जिट की सुविधा मिलेगी?
- तकनीकी कॉलेजों के छात्रों को भी पढ़ाई के दौरान एंट्री-एग्जिट की सुविधा मिलेगी। चार वर्षीय इंजीनियरिंग डिग्री प्रोग्राम में यदि कोई छात्र पहले वर्ष की पढ़ाई पूरी करता है तो उसे अंडरग्रेजुएट सर्टिफिकेट मिलेगा। दूसरे वर्ष पूरा करने पर अंडरग्रेजुएट डिप्लोमा, तीसरे वर्ष की पढ़ाई पूरी करने पर बैचलर ऑफ वोकेशनल एजुकेशन और चौथे वर्ष यानी अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी करने पर बीटेक की डिग्री मिलेगी। वहीं, पॉलिटेक्निक यानी इंजीनियरिंग डिप्लोमा वाले छात्रों को भी यह सुविधा मिलेगी।
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का लाभ यहां भी मिलेगा?
- एआईसीटीई की तकनीकी यूनिवर्सिटी और सभी राज्यों के तकनीकी कॉलेजों, पीजीडीएम स्टेंडअलोन कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2022 से एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मकसद इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट समेत अन्य प्रोग्राम के छात्रों को किसी भी विषयों को पढ़ाई करने की आजादी देना है। जो भी वे अपने विषय के अलावा किसी भी अन्य कॉलेज से पढ़ाई करते हैं, उसके क्रेडिट उनके एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में जुड़ जाएंगे। इसके लिए इन कॉलेजों को 30 मई तक समय दिया गया है।