NEET SS 2021: नीट सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा पैटर्न में बदलाव मामला, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और एमसीआई से मांगा जवाब
NEET SS 2021: सुप्रीम कोर्ट ने नीट-एसएस 2021 के लिए परीक्षा पैटर्न में अंतिम समय में बदलाव का आरोप लगाने वाली पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों की याचिका पर केंद्र और राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद को नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई अगले सोमवार को होगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने नीट-एसएस 2021 के लिए परीक्षा पैटर्न में अंतिम समय में बदलाव का आरोप लगाने वाली पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों की याचिका पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद यानी एमसीआई को नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई अगले सोमवार को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-सुपर स्पेशियलिटी (नीट-एसएस) 2021 के परीक्षा पैटर्न के लिए राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा किए गए "अचानक" और "लास्ट-मिनट" परिवर्तनों को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर सुनवाई की। याचिका देश भर के 41 योग्य स्नातकोत्तर डॉक्टरों द्वारा दायर की गई थी, जो NEET-SS 2021 को क्रैक करके सुपर-स्पेशलिस्ट बनने की इच्छा रखते हैं।
Supreme Court issues notice to the Centre and National Medical Council on a plea by post-graduate doctors alleging the last minute change in exam pattern for NEET-SS 2021. SC to hear the case next Monday. pic.twitter.com/uhBQMCjhu0
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) September 20, 2021
याचिका में यह दलील देते हुए कि बदलाव करने का अधिकार न होने के बावजूद स्पष्ट रूप से मनमाने आधार पर नीट-एसएस 2021 की परीक्षा से कुछ समय पहले पेपर पैटर्न में किए गए परिवर्तनों को रद्द करने की मांग की गई थी। इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्न की खंडपीठ ने सुनवाई की।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने प्रस्तुत किया कि इस वर्ष 13/14 नवंबर को होने वाली परीक्षा के लिए अधिसूचना 23 जुलाई, 2021 को जारी की गई थी। हालांकि, नए परीक्षा का पैटर्न को लेकर 31 अगस्त, 2021 को एक और अधिसूचना जारी की गई थी। प्रचलित पैटर्न के अनुसार जो 2018 से 2020 तक अस्तित्व में रहा है, सुपर स्पेशियलिटी में प्रश्न से 60% अंक आवंटित किए गए थे जबकि 40% अंक फीडर पाठ्यक्रमों के प्रश्नों के लिए वितरित किए गए थे। हालांकि, प्रस्तावित पैटर्न के अनुसार, क्रिटिकल केयर सुपर स्पेशियलिटी के लिए संपूर्ण प्रश्न सामान्य मेडिसिन से लिए जाएंगे।
अधिवक्ता दीवान ने तर्क दिया कि इससे अन्य विषयों के छात्रों को काफी नुकसान होता है। उन्होंने बताया कि परीक्षा अधिसूचना जारी होने के बाद और छात्रों द्वारा अपनी तैयारी शुरू करने के बाद प्राधिकरण को ये बदलाव नहीं करने चाहिए थे। वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि यह एक अच्छी तरह से स्थापित सिद्धांत है कि खेल शुरू होने के बाद नियमों को नहीं बदला जा सकता है। इस पर कोर्ट ने मामले को अगले सोमवार, 27 सितंबर को आगे के विचार के लिए निर्धारित किया है।
कमेंट
कमेंट X