मध्य प्रदेश: हिंदी भाषा में शुरू होगा चिकित्सा पाठ्यक्रम, पांच वर्ष पहले इस वजह से नहीं हुई थी शुरुआत
Madhya Pradesh: इससे पहले 2016 में, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय ने हिंदी में इंजीनियरिंग और चिकित्सा शिक्षा की घोषणा की थी। हालांकि, विश्वविद्यालय हिंदी में एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू नहीं कर सका क्योंकि इसे भारतीय चिकित्सा परिषद से अनुमति नहीं मिली थी।
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मध्य प्रदेश में हिंदी भाषा में भी चिकित्सा पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। इस बता की घोषणा राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने की है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार "निकट भविष्य में" हिंदी में चिकित्सा का अध्ययन करने का विकल्प देगी। एमबीबीएस कोर्स, नर्सिंग और अन्य पैरामेडिकल कोर्स में हिंदी माध्यम कैसे शुरू किया जाए, यह तय करने के लिए हम जल्द से जल्द एक समिति बनाने जा रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रम (सामग्री) हिंदी में भी तैयार हो। बता दें कि इस फैसले का मकसद छात्रों में सामाजिक और चिकित्सकीय नैतिकता की भावना पैदा करना है।
पहले भी हो चुकी है हिंदी भाषा में चिकित्सा पढ़ाने की कोशिश
इससे पहले 2016 में, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय ने हिंदी में इंजीनियरिंग और चिकित्सा शिक्षा की घोषणा की थी। जिसके बाद हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम की शुरुआत भी की, लेकिन पहले वर्ष में केवल तीन छात्रों ने प्रवेश लिया, और बाद में, विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम बंद कर दिया, और छात्रों को अंग्रेजी माध्यम में इंजीनियरिंग जारी रखने के लिए निजी कॉलेजों में स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि, विश्वविद्यालय हिंदी में एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू नहीं कर सका क्योंकि इसे भारतीय चिकित्सा परिषद से अनुमति नहीं मिली थी।
हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा अनुवाद
हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति रामदेव भारद्वाज ने कहा कि अब, राज्य सरकार ने पाठ्यक्रम के लिए अनुमति लेने का फैसला किया है और पाठ्यक्रम हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया जाएगा। हिंदी माध्यम परियोजना में इंजीनियरिंग की विफलता के पीछे का कारण इंजीनियरिंग शब्दावली का हिंदी में अनुवाद था। लेकिन अब, हमने अंग्रेजी भाषा से मेडिकल कोर्स की शब्दावली को बनाए रखने का फैसला किया है ताकि छात्रों को मेडिकल शिक्षा के बारे में सीखने में कोई कठिनाई न हो।
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